भास्कर न्यूज|लुधियाना पंजाब सरकार द्वारा उद्योगों को सस्ती बिजली देने के वादे पर अब उद्योगपतियों ने सवाल खड़े कर दिए हैं। कारोबारियों का कहना है कि सरकार ने इंडस्ट्री को 5 रुपये प्रति यूनिट दर पर बिजली देने का वादा किया था, लेकिन वर्तमान में उन्हें 10 रुपए प्रति यूनिट से भी महंगी बिजली मिल रही है। इसके साथ ही अगर कोई उद्योगपति शाम 6 से रात 10 बजे तक फैक्ट्री चलाना चाहता है, तो उसे 2 रुपये प्रति यूनिट का अतिरिक्त सरचार्ज देना होगा। उद्योग जगत ने इस नीति को खुला अन्याय बताते हुए कहा कि सरकार ने वादा तो किया, लेकिन उसे निभाया नहीं। एक तरफ बिजली की कीमत लगातार बढ़ रही है, दूसरी ओर बिजली आपूर्ति भी पूरी नहीं हो रही। ऐसे में उत्पादन प्रभावित हो रहा है और कारोबारियों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। पीएसपीसीएल (पंजाब स्टेट पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड) द्वारा भेजी गई शर्तों के अनुसार, पिक ऑवर यानी शाम 6 बजे से रात 10 बजे तक फैक्ट्री संचालन पर अतिरिक्त सरचार्ज देना अनिवार्य है। ऐसा न करने पर फैक्ट्री को बंद रखना पड़ेगा। उद्योगपतियों ने आरोप लगाया कि पंजाब सरकार एक ओर निवेश आकर्षित करने की बात करती है, वहीं दूसरी ओर नीतियों से मौजूदा उद्योगों को ही पीछे धकेल रही है। उनका कहना है कि अगर यह स्थिति बनी रही, तो पंजाब का औद्योगिक भविष्य संकट में पड़ जाएगा। अब कारोबारी संगठनों ने इस मुद्दे पर आवाज उठाने की तैयारी भी शुरू कर दी है। फोकल पॉइंट के कारोबारी राजन गुप्ता ने कहा कि एक तरफ सरकार जनता को फ्री बिजली दे रही है, दूसरी तरफ उद्योगों से दोगुना पैसा वसूला जा रहा है। अब कि 2 यूनिट अलग से लेना, पूरी तरह गलत है। दिन में भी बिजली पूरी नहीं मिलती और अब ये नई जबरन वसूली। उद्योगपति सरकार से पूछ रहे हैं कि क्या अब बिना सरचार्ज के फैक्ट्री चलाना भी गुनाह हो गया, बिना सूचना के बिजली कटौती और अलग से सरचार्ज वसूली से उद्योग घाटे में जा रहा है। यूनाइटेड साइकिल पार्ट्स एसोसिएशन के पूर्व प्रधान डीएस चावला ने कहा कि जब विभाग कहता है कि बिजली की कमी है, तो फिर 2 यूनिट सरचार्ज लेकर कहां से बिजली आ जाती है ये सीधी ब्लैकमेलिंग है। सरकार के मंत्री कहते हैं बिजली उत्पादन पूरा है। जबकि विभाग के अधिकारी कहते हैं बिजली की भारी कमी है, कट लगेंगे। पंजाब सरकार इंडस्ट्री को काम नहीं करने देना चाहती है। जतिंदरपाल सिंह सलूजा ने कहा कि पहले ही न घर पर बिजली होती है और न ही फैक्ट्री में। उसके बावजूद पंजाब सरकार कारोबारियों को दबाने में लगी है। पहले ही पंजाब की इंडस्ट्री मंदी से गुजर रही है, जबकि सरकार को साथ देना चाहिए उसके बावजूद कारोबारियों पर और बोझ डाल रहे है, जिस वजह से सभी कारोबारी बहुत परेशान हैं। पंजाब सरकार इंडस्ट्री की कमर तोड़ रही है।


