अन्नदाताओं से मुनाफाखोरी

खाद विक्रेताओं व भास्कर रिपोर्टर की बातचीत से जानिए…कैसे हो रही कालाबाजारी
मानसून की बारिश शुरू होते ही किसानों ने धान की बुआई की तैयारी शुरू कर दी है। लेकिन खाद सबसे बड़ा रोड़ा बन गया है। इसकी कालाबाजारी शुरू हो गई है। 45 किलो यूरिया की सरकारी कीमत 266 रुपए तय है, लेकिन यह बाजार में 430 रुपए में बेची जा रही है। वहीं 1350 रुपए की 50 किलो डीएपी की बोरी के लिए किसानों से 1650 रुपए लिए जा रहे हैं। खाद की कालाबाजारी की सूचना पर दैनिक भास्कर ने रांची जिले के सबसे ज्यादा धान उत्पाद इलाके रातू, ब्रांबे और मांडर इलाके में पड़ताल की। हर इलाके में भास्कर रिपोर्टर किसान बनकर खाद खरीदने पहुंचा। लेकिन ​कहीं भी सरकारी दर पर खाद देने को कोई दुकानदार तैयार नहीं हुआ। हर जगह यूरिया की बोरी के 400 से 430 रुपए मांगे गए। वहीं डीएपी के लिए 1600 से 1650 रुपए की मांग की गई। गौरतलब है कि धान की खेती में यूरिया और डीएपी का बड़े पैमाने पर उपयोग होता है। इसके अलावा मक्का, मड़ुआ और सब्जी की खेती में भी इसकी जरूरत पड़ती है। धान की खेती करने वाले चान्हो के किसान इनामुल हक, महली भगत, मोहन उरांव आदि ने कहा कि सरकार को यूरिया की कीमत को नियंत्रित करने के लिए लैंपस से इसकी बिक्री करनी चाहिए। इससे दुकानदारों की मनमानी पर रोक लगेगी। वरना छोटे किसान तो खेती ही नहीं कर पाएंगे। 380 रु. लगेंगे, एक पैसा कम नहीं रिपोर्टर: यूरिया कैसे मिलेगा दुकानदार: 380 रुपए लगेंगे। रिपोर्टर: सरकारी रेट तो 266 रुपए है। ज्यादा नहीं ले रहे? दुकानदार: कहां ज्यादा ले रहे हैं। पहले 330 का आता था। अब 380 रु. हो गया है। रिपोर्टर: कुछ कम तो ​कीजिए? दुकानदार: नहीं, कुछ भी कम नहीं होगा। रिपोर्टर: डीएपी भी चाहिए, कितना देना होगा? दुकानदार: दो तरह का है…1450 रुपए और 1600 रुपए। इससे कम नहीं। 350 रुपए बोरी से कम नहीं होगा रिपोर्टर: यूरिया चाहिए…कितने की बोरी मिलेगी? दुकानदार: 350 रु. बोरी देंगे। रिपोर्टर: कुछ कम नहीं होगा? सरकारी दर से काफी ज्यादा है? दुकानदार: एक पैसा भी कम नहीं होगा। इतना ही लगेगा। रिपोर्टर: डीएपी का क्या रेट लगाएंगे? दुकानदार: डीएपी के 1450 रु. लगेंगे। इससे कम नहीं। 15 दिन बाद यही 600 रु में मिलेगा रिपोर्टर: यूरिया कैसे दे रहे हैं? दुकानदार: कितना लेना है? रिपोर्टर: तीन-चार बोरी चाहिए। दुकानदार: इतना क्या कीजिएगा? रिपोर्टर: खेती के लिए चाहिए। दुकानदार: 430 रु. बोरी। रिपोर्टर: सरकारी रेट तो 266 रुपए है। कुछ कम कीजिए? दुकानदार: 10 रुपए कम कर देंगे। इससे कम नहीं। 15 दिन में यही माल 600 रुपए में मिलेगा। रिपोर्टर: डीएपी का क्या रेट लगेगा? दुकानदार: 1600 रुपए प्रति बोरी। ज्यादा वसूली करने वालों पर कार्रवाई होगी धान की खेती के लिए सिर्फ रांची में तीन लाख बोरी यूरिया की खपत कृषि विभाग के मुताबिक पिछले साल रांची जिले में 1 लाख 18 हजार 750 हेक्टेयर भूमि में धान की खेती हुई थी। सबसे अधिक तमाड़ प्रखंड में 10,985 हेक्टेयर और सबसे कम खलारी प्रखंड में 1628 हेक्टेयर भूमि में धान की खेती हुई थी। इसके अनुसार सिर्फ रांची जिले में धान की खेती में 3 लाख बोरी से अधिक यूरिया की खपत होती है। ऐसे में यूरिया को अधिक दामों में बेचकर मुनाफाखोर मोटी कमाई कर रहे हैं। यूरिया को खुदरा में प्रति किलो 5.92 रुपए में बेचनी है। लेकिन 10 रुपए में बेची जा रही है। दुकान: श्वेता कृषि सेंटर, ब्रांबे सरकारी दर: 266.50 रुपए प्रति बोरी दुकान: किसान बीज केंद्र, मांडर दुकान: देहात बीज केंद्र, काठीटांड़ 266 रु. वाली 45 किलो यूरिया की बोरी 430 रु. में तो 1350 रु. वाला डीएपी 1650 रुपए में बेच रहे प्रति बोरी: 1630.41 रूपए सब्सिडी: 1363.91 रूपए बेचना है: 266.50 रूपए दुकानदारों से बातचीत का ऑडियो-वीडियो भास्कर के पास है।

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