बीरगांव का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में हर माह औसतन 100 से ज्यादा डिलिवरी हो रही है। इनमें औसतन 40 डिलिवरी तो ऑपरेशन से की जाती है। अस्पताल में हालांकि दो स्त्रीरोग विशेषज्ञ हैं लेकिन ज्यादातर ऑपरेशन डा. अंजना कुमार ही करती हैं। वे इतनी ज्यादा डिलिवरी और ऑपरेशन करती हैं कि उन्हें औसतन हर साल 10 लाख और कई बार इससे ज्यादा इंसेंटिव मिलता है। साक्षी निषाद का ऑपरेशन भी डॉ. अंजना ने ही किया था। साक्षी की मौत के बाद भास्कर की पड़ताल में बीरगांव अस्पताल के इंसेंटिव का चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आया है। बीरगांव अस्पताल की सबसे सीनियर होने के कारण प्रभारी भी डॉ. अंजना ही हैं। इस वजह से अस्पताल से संबंधित सारे फैसले भी वही लेती हैं। अस्पताल में सर्दी-जुकाम और बुखार के अलावा सबसे ज्यादा डिलवरी के केस आते हैं। इमरजेंसी में कभी नहीं होते हैं डॉक्टर बीरगांव अस्पताल में तीन विशेषज्ञ और 2 सामान्य डॉक्टर पदस्थ हैं। दो पद खाली हैं। इनमें एक संविदा का है। पांच डाक्टर केवल ओपीडी में रहते हैं। दोपहर बाद डाक्टर केवल ऑन कॉल रहते हैं यानी इमरजेंसी होने पर ही बुलाया जाता है। इसके बावजूद यहां रोज औसतन एक से दो डिलिवरी ऑपरेशन से की जाती है। पता चला है कि िपछले चार-पांच साल से डिलिवरी और ऑपरेशन केस बढ़े हैं। इसे लेकर स्वास्थ्य विभाग में ही चर्चा है कि इंसेंटिव के चक्कर में गंभीर केस की भी सर्जरी की जा रही है। साक्षी का केस भी गंभीर था। उसके बाद भी ऑपरेशन के बाद डा. अंजना ने एक बार भी अस्पताल फोन कर उसकी स्थिति की जानकारी नहीं ली। जबकि विशेषज्ञों का कहना है कि ऑपरेशन वाले मरीज की हर चार घंटे में मॉनीटरिंग होनी चाहिए। डाक्टर को खुद पता लगाना चाहिए कि उसे किसी तरह की दिक्कत तो नहीं हो रही है। जांच रिपोर्ट में खुलासा एक्सपर्ट व्यू- डा. ज्योति जायसवाल, स्त्री रोग विशेषज्ञ ऑपरेशन के बाद हर 4 घंटे में देखना चाहिए डिलवरी के ऑपरेशन चाहे कैसे भी हों। मरीज की हर चार घंटे में निगरानी होनी चाहिए। ये मॉनीटिरंग कोई जरूरी नहीं कि स्पेशलिस्ट या स्त्रीरोग विशेषज्ञ ही करे। ट्रेंड नर्सिंग स्टाफ भी देख सकता है। लगातार मॉनीटरिंग के दौरान अगर मरीज को किसी तरह की दिक्कत या तकलीफ नजर आए तो तुरंत सीनियर डाक्टरों को सूचना देना चाहिए।


