मप्र में पर्यटन की बढ़ती संभावनाओं और पर्यटकों की बढ़ती संख्या के बीच अब पर्यटन विकास निगम कमाई बढ़ाने और बड़ी होटल ब्रांड्स के साथ साझेदारी की योजना पर काम कर रहा है। अब तक पर्यटन निगम एकमुश्त प्रीमियम के आधार पर ही संपत्तियों को लीज पर देता रहा है। वर्तमान में पर्यटन निगम की कुल 18 संपत्तियां लीज पर हैं। हालांकि अब लीज नीति में बड़े बदलाव की तैयारी है। अब तक निगम अपनी संपत्ति लीज पर लेने वाले समूह से एकमुश्त प्रीमियम लेता है और इस राशि का 1% सालाना लीजरेंट होता है। अब निगम दो नए मॉडल लाने पर विचार कर रहा है। पहले में संपत्ति को किसी निजी समूह को देने पर लीजरेंट की जगह रेवन्यू शेयरिंग का समझौता होगा। इससे हर साल कहीं अधिक राशि निगम के खाते में आएगी। पर्यटन निगम के बोर्ड से जुड़ी कंसल्टेंसी फर्म सीबीआरई स्टडी करके संपत्तियों के बारे में विकल्प सुझाएगी। संपत्तियों को 30 की बजाय 60 और 90 साल तक के लिए लीज पर देने का निर्णय पहले ही हो चुका है। जनवरी से नवंबर तक मध्यप्रदेश में आए रिकॉर्ड 10 करोड़ से ज्यादा पर्यटक बीते सालों में मप्र में पर्यटकों की संख्या में रिकॉर्ड बढ़ोत्तरी हुई है। इस साल जनवरी से नवंबर तक 10.66 करोड़ पर्यटक पहुंचे। सिर्फ महाकाल में ही 6.5 करोड़ पर्यटक आए। महाकाल विस्तार के बाद रोज उज्जैन आने वाले पर्यटकों की संख्या 15000-20000 से बढ़कर 2 से 2.5 लाख हो चुकी है। वहीं सरसी आइलैंड के रूप में नया प्रोजेक्ट शुरू हुआ है, साथ ही रातापानी को टाइगर रिजर्व का दर्जा मिलने के साथ ही बड़ी संभावनाएं बनी हैं। साथ ही श्योपुर में चीता प्रोजेक्ट देशी-विदेशी पर्यटकों का आकर्षण बन गया है। मैनेजमेंट कॉन्ट्रैक्ट से होगी प्रतिष्ठित ब्रांड्स से साझेदारी निगम रेवेन्यू शेयरिंग मॉडल के अलावा बड़े ब्रांड्स से मैनेजमेंट कॉन्ट्रैक्ट भी करेगा। इस तरह के कॉन्ट्रैक्ट में संपत्ति निगम के पास ही रहेगी , पर बड़े होटल ब्रांड्स इसका प्रबंधन अपने नियमों और स्टाफ के माध्यम से करेंगे। सबसे बड़ी बात ये कि सरकारी होटलों को बड़े समूहों का ब्रांड नाम मिलेगा। पर्यटकों को विश्व-स्तरीय सुविधाएं मिलेंगी। ताज जैसे ब्रांड इसी मॉडल पर चलते हैं। ^ रेवेन्यू शेयरिंग और मैनेजमेंट कॉन्ट्रैक्ट मॉडलों पर विचार हो रहा है। निगम की कमाई कई गुना बढ़ पाएगी और साथ ही निगम की संपत्तियों को जाने माने ब्रांड्स की साझेदारी मिलेगी।
– इलैया राजा टी, एमडी-मप्र राज्य पर्यटन विकास निगम


