एमआर-10 से लगे कुमेड़ी और भांग्या में प्रदूषण दिल्ली के स्तर को छूने लगा है। 19 दिसंबर की रात हवा में पीएम-10 (धूल के बड़े कण) की मात्रा 413 थी, जबकि दिल्ली में इससे कुछ अधिक 450 रही। सामान्य स्थिति में हवा में पीएम-10 की मात्रा 100 होना चाहिए। भास्कर ने सात दिन की स्थिति जांचने के लिए लैब की मदद से वहां मशीनें लगाईं। जांच के लिए मशीनों में लगाए फिल्टर पेपर पर महज 12 घंटे में धूल, सीमेंट और राख की पर्त जमा हो गई। रात में लगाया पेपर सुबह तक काला हो गया, जबकि दिन का पेपर ग्रे हो गया। एक्सपर्ट का कहना है, फिल्टर के ये हाल हैं वहां की 10 हजार की आबादी के फेफड़ों की क्या दशा होगी। क्षेत्र की कंपनियों में मास्क पहनना पड़ रहा है सफेद कागज रात को कोयले सा काला, दिन में सीमेंट जैसा चौकसी लैब से शाम 5.30 से अगली सुबह 9.30 और सुबह 9.30 से शाम 5.30 बजे जांच कराई गई। जांच के लिए लगाया कागज रात के प्रदूषण से काला और दिन में सीमेंट जैसा ग्रे हो गया। रिपोर्ट के मुताबिक 19 दिसंबर को अधिकतम 100 तक रहने वाले पीएम-10 रात के समय 413 था, जबकि पीएम-2.5 की मात्रा 165 रही, जो 60 से अधिक नहीं होना चाहिए। 32 ईंट भट्ठों को बंद करने के नोटिस जारी किए हैं
^कुमेड़ी-भांग्या क्षेत्र में प्रदूषण की शिकायतों के चलते 32 ईंट भट्ठों को बंद करने के नोटिस दिए हैं। भांग्या में कचरा जलाने की भी शिकायत है। – एसएन द्विवेदी, क्षेत्रीय अधिकारी, मप्र प्रदूषण बोर्ड भास्कर एक्सपर्ट – सौरभ शर्मा, इन्वायरमेंट इंजीनियर 300 से अधिक एक्यूआई दिन में 15-20 सिगरेट पीने के बराबर ^300 से अधिक एक्यूआई के संपर्क में रहना प्रतिदिन 15 से 20 सिगरेट पीने के बराबर माना जाता है। कुमेड़ी की आबोहवा की रिपोर्ट के अनुसार, यहां धुएं में प्लास्टिक, रबर, कोयला, लकड़ी, मरे मवेशियों के अवशेष, गाड़ियों का धुआं और उद्योगों का प्रदूषण मिला है। निर्माण कार्यों से चलते सीमेंट से भी आबोहवा खराब हो रही है। ऐसे धुएं से फेफड़ों पर बुरा असर होता है, ब्लॉकेज की परेशानी बढ़ती है। इस पर तुरंत ध्यान देने की जरूरत है, वरना बड़ी आबादी को गंभीर स्वास्थ्यगत परेशानियां उठाना पड़ सकती है। क्षेत्रीय रहवासियों की पीड़ा लंबे समय से रात में सांस लेने में होती है परेशानी भांग्या पंचायत में किराना दुकान संचालक भोला राम ने बताया, पिछले एक साल से धुएं की परेशानी है। कचरा स्टेशन के कचरे की आग से प्रदूषण बढ़ा है। रात में सांस लेने में परेशानी होती है। बच्चों को ज्यादा दिक्कत हो रही महेश कुमार कहते हैं, धुएं से बच्चों को खांसी, गले में दर्द, सर्दी बुखार के अलावा कई बार उल्टियां होने लगती हैं। मॉर्निंग वॉक मुश्किल हुई कुमेड़ी के माणिक पंवार ने बताया, रात 11 बजे से कमरों में जलने की बदबू आने लगती है। मॉर्निंग वॉक मुश्किल हो गई है।


