10 दिनों तक चलने वाले रथयात्रा मेले का शुभारंभ शुक्रवार को हो गया। रथयात्रा के पहले दिन प्रभु जगन्नाथ के दर्शन के लिए हजारों की संख्या में लोग जगन्नाथपुर पहुंचे। इस दौरान 41.2 एकड़ में लगाए गए मेले का भी लोगों ने लुत्फ उठाया। इस बार मेले में 3000 से ज्यादा दुकानें लगाई गई हैं। इनमें फाइबर क्रॉकरी, रूम डेकोर के सामान, किचन आइटम, हर्बल दवाइयां, पूजा सामग्री, चूड़ी, कपड़े, पर्दा जैसे सामान के स्टॉल पर लोगों की खूब भीड़ जुटी। लोगों ने प्रभु के दर्शन के बाद खाने-पीने के स्टॉल पर तरह-तरह के फास्ट फूड चखे। मेले में छोटे-बड़े कई झूले लगाए गए हैं। मेले में अपने परिवार और दोस्तों के साथ पहुंचे लोगों ने झूले का भी लुत्फ उठाया। मेले में मिठाई की दुकानें भी सजी हैं। जिसमें गाजा, बर्फी, लड्डू, अनरसा, बालूशाही, निमकी, शकरपारा और मुरब्बा बिक रहे थे। इनकी कीमत 100 रुपए से 200 रुपए किलो तक है। मेले में बनहोरा के नगाड़ा और बंगाल के ढोल किए जा रहे पसंद मेले में पारंपरिक वाद्य यंत्रों की भरमार है। बोकारो, सिसई से हजारों की संख्या में मांदर लाए गए हैं। इसमें मिट्टी के मांदर की कीमत 3000 से 5000 रुपए और चदरा से बने मांदर की कीमत 6000 से 8000 रुपए तक है। बनहोरा के नगाड़ा 3000 रुपए, बंगाल के ढोल 3500 रुपए और ढाक 6500 रुपए तक बिक रहे हैं। कारीगरों ने बताया कि साल भर हमलोग जगन्नाथपुर मेले का इंतजार करते हैं, ताकि इन वाद्य यंत्रों की बिक्री कर सकें। चांडिल से तरह-तरह के तीर-कमान मेले में बिक्री के लिए लाए गए हैं। इनकी कीमत 350 रुपए से 800 रुपए तक है। लोगों ने तीर-धनुष की भी खूब खरीदारी की। मेले में 30 से 100 रुपए तक टिकट वाला झूला मेले में तरह-तरह के छोटे-बड़े सैकड़ों झूले लगाए गए हैं। इसमें 12 सीटर ब्रेक डांस झूले में बैठने के लिए प्रति व्यक्ति टिकट 70 रुपए है। मिक्की माउस जंपिंग बैग में एक बार में 20-25 बच्चे जंप कर सकते हैं, कीमत 50 रुपए है। टोरा-टोरा झूले में एक बार में 40 लोग झूल सकते हैं, कीमत 50 रुपए है। चक्री झूला 30 रुपए, टावर झूले में एक बार में 140 लोग बैठ सकते हैं। 6 राउंड के लिए टिकट 100 रुपए का है। मौत का कुआं के लिए टिकट 50 रुपए प्रति व्यक्ति है। मछली फंसाने के लिए कुमनी और जाल की खूब बिक्री हुई : मेले में मानसून के समय में मछली फंसाने के लिए कुमनी और जाल की खूब बिक्री हुई। खूंटी, तोरपा से लाई कुमनी को लोगों ने खूब पसंद किया। छोटी कुमनी की कीमत 200 और बड़ी की कीमत 1000 रुपए तक थी। मेले में खुब बिकीं मिठाइयां। मेले में एल्युमिनियम से बना पुराने जमाने का हुक्का आकर्षण का केंद्र रहा। मेला घूमने पहुंचे लोग रुक-रुक कर दुकान पर रखे सामान को देख रहे थे। मांडर की राजपति देवी ने बताया कि ये सारे सामान एल्युमिनियम से बनाए गए हैं। जिनमें मोर की आकृति वाला दीया, साथ ही अलग-अलग नाप का पइला (धान-चावल नापने की इकाई) एल्युमिनियम और कांसा का है। राजपति देवी ने बताया कि इनके पूर्वज भी यही काम करते थे और अब वह इस काम को आगे बढ़ा रही हैं। एल्युमिनियम से बना पुराने जमाने का हुक्का आकर्षण का केंद्र रहा


