911 वार्डों के ताले नहीं खुले:तीन वेव गुजर जाने के बाद बनाए गए कोरोना से निपटने के लिए वार्ड

प्रदेश के 911 प्राथमिक (पीएचसी) और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) में कोरोना संक्रमितों के ट्रीटमेंट के लिए 139.03 करोड़ रुपए की लागत से बने अतिरिक्त वार्डों का उपयोग नहीं हो रहा है। इन एडीशनल वार्ड के कंट्रक्शन का काम कोविड संक्रमण खत्म होने के बाद वर्ष 2023 में शुरू हुआ। जो कुछ महीने पहले ही खत्म हुआ है। अस्पतालों में बने इन वार्डों के ताले निर्माण कार्य पूरा होने के बाद भी नहीं खुल सके हैं। दरअसल, ऐसा संबंधित अस्पतालों में पर्याप्त डॉक्टर, नर्सिंग और पैरामेडिकल स्टाफ नहीं होने के कारण हो रहा है। यह खुलासा इमरजेंसी कोविड रिस्पोंस एंड हेल्थ सिस्टम प्रिपर्यडनेस पैकेज (ईसीआरपी) के तहत मिले फंड के यूटीलाइजेशन स्टेटस की पड़ताल में हुआ है। केंद्र ने कोरोना महामारी के बाद छत्तीसगढ़ सरकार को प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में ज्यादा मरीजों को भर्ती करने के लिए नए वार्ड बनाने को कहा था। इस प्रोजेक्ट के तहत संबंधित श्रेणी के 1469 अस्पतालों में 6, 10 और 20 बिस्तर की क्षमता वाले एडीशनल वार्ड बनाए जाने थे। इसके लिए केंद्र ने दो राउंड में ईसीआरपी पैकेज के लिए फंड दिया था। नए वार्ड के लिए 270 प्रोजेक्ट NHM को रिटर्न: कोरोना के ट्रीटमेंट के लिए ईसीआरपी पैकेज के तहत पीएचसी, सीएचसी में एडीशनल वार्ड बनाने के 270 प्रोजेक्ट निर्माण एजेंसी सीजीएमएससी ने एनएचएम को लौटा दिए हैं। एजेंसी ने ऐसा बनाए नए वार्डों का इस्तेमाल न हो पाने से किया है। सीजीएमएससी और नाबार्ड को बनाने थे वार्ड, पूरे बन ही नहीं सके 6, 10 और 20 बिस्तर के वार्ड बनने थे प्रोजेक्ट के तहत: ईसीआरपी पैकेज 1-2 के तहत छत्तीसगढ़ को केंद्र सरकार ने फंड साल 2021 व 2022 में जारी किया था। लेकिन, प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में 6, 10 और 20 बिस्तर के एडीशनल वार्ड के कंट्रक्शन का काम कोविड संक्रमण खत्म होने के बाद वर्ष 2023 में शुरू हुआ। जो कुछ महीने पहले ही खत्म हुआ है। सीजीएमएससी और नाबार्ड की ओर से बनाए गए हैं वार्ड: स्वास्थ्य संचालनालय के अफसरों ने बताया कि पीएचसी और सीएचसी में एडीशनल वार्ड बनाने का जिम्मा छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विस कार्पोरेशन लिमिटेड (सीजीएमएससी ) और नाबार्ड को सौंपा गया था। ईसीआरपी पैकेज वर्क अलॉटमेंट रिपोर्ट के मुताबिक सीजीएमएससी को 1318 और नाबार्ड को 151 वार्ड बनाने थे। सीएमएससी 1318 हॉस्पिल्स में से 760 भवन ही बना सका तीन साल में: पिछले तीन साल के दौरान सीजीएमसी और नाबार्ड ने कुल 911 हॉस्पिटल में एडीशनल बिल्डिंग ब्लॉक का निर्माण किया है। सीएमएससी 1318 हॉस्पिल्स में से 760 में ही नए वार्ड बनाने का काम पूरा कर पाया है। जबकि नाबार्ड ने सभी 151 हॉस्पिटल्स की बिल्डिंग ब्लॉक के कंस्ट्रक्शन का काम पूरा कर दिया है। यानी सीजीएमएससी पीछे रह गया। पीएचसी, सीएचसी में सबसे ज्यादा भवन बस्तर में और सबसे कम सरगुजा, सूरजपुर में बने अतिरिक्त कमरों का क्या उपयोग किया जा सकता है। इसका परीक्षण किया जा रहा है। इसके लिए हमने सभी जिलों से सूची मंगवाई है।
– डॉ. प्रियंका शुक्ला, एमडी, एनएचएम छत्तीसगढ़ फंड का उपयोग युक्तिसंगत तरीके से हो इसके लिए हम नए सिविल प्रस्तावों की मंजूरी उपयोगिता के आधार पर दे रहे हैं। एनएचएम को 270 प्रोजेक्ट हमने इसलिए भी लौटा दिए।
– पद्ममिनी भोई साहू, एमडी, सीजीएमएससी मरीजों के लिए 20 लाख में दो मंजिला बिल्डिंग बनवाई, गेट पर ताला
बिलासपुर जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (रतनपुर) में 32 लाख की लागत से 20 बिस्तरों की क्षमता वाली नई बिल्डिंग बनाई है। लेकिन, बिल्डिंग में बने वार्ड का उपयोग नहीं हो रहा है। गेट पर लंबे समय से ताला लगा हुआ है। इसकी वजह हॉस्पिटल में मरीजों के इलाज के लिए पर्याप्त स्टाफ का नहीं होना है। रतनपुर के स्थानीय रहवासियों के मुताबिक अस्पताल में गर्भवती महिलाओं को छोड़कर अन्य मरीजों को इलाज के लिए भर्ती नहीं किया जाता। जबकि हॉस्पिटल में रोजाना 150 से 200 मरीज अलग-अलग बीमारियों का इलाज कराने पहुंचते हैं। हॉस्पिटल में डॉक्टर, नर्स और पेरोमेडिक्स और सपोर्टिंग स्टाफ के 39 पद स्वीकृत हैं। इन पदों में से 11 खाली हैं। एक्सपर्ट व्यू – डॉ. सुभाष मिश्रा, पूर्व महामारी नियंत्रक भवनों के यथोचित प्रयोग के निर्देश थे
महामारी से लड़ने के लिए जिलों को ईसीआरपी आदि मदों से फंड दिए गए थे। 3न लहर के बाद स्वास्थ्य विभाग ने जिलों को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि वो अपने यहां कोरोना के लिए बनाए गए आइसोलेशन वार्ड का उपयोग जरूरत के मुताबिक अन्य कार्यों में कर सकते हैं। ये भी कहा गया था कि इसका निर्णय स्थानीय स्तर लेकर सूचना विभाग तक पहुंचानी है। इस निर्देश के बावजूद यदि ताले लगे हैं तो ये समझ से परे है।

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