राज्य में पेट्रोल-डीजल, सीएनजी के अलावा एलपीजी से भरे टैंकर को रोकना फिलहाल संभव नहीं है, क्योंकि राज्य में तीनों तेल कंपनियों के 12 बॉटलिंग प्लांट में से केवल 5 में ही पाइपलाइन से एलपीजी की सप्लाई है। शेष 7 में सप्लाई के लिए रोजाना 157 टैंकर आ रहे हैं। बता दें कि 5 दिन पहले ही जयपुर में भांकरोटा के पास इसी तरह के एलपीजी टैंकर को एक कंटेनर ने टक्कर मार दी थी, जिससे लीक हुई गैस ने आग पकड़ ली थी। इससे 18 लोगों की जान ले ली। 10 से अधिक कंपनियों में भी टैंकरों से सप्लाई टैंकर से गैस सप्लाई तीनों कंपनियों के प्लांटों के अलावा कुछ प्राइवेट बॉटलिंग प्लांट में भी की जाती है। कोटा में एचपीसीएल एक प्राइवेट बॉटलिंग प्लांट को टैंकर से एलपीजी सप्लाई करती है। जबकि कुछ उद्योगों ने भी एलपीजी के बुलट लगा रखे हैं। इनमें चित्तौड़गढ़ में हिंदुस्तान जिंक, राजसमंद में नाथद्वारा ट्रस्ट, अलवर में होंडा व रोक्का, जयपुर में एनबीसी, जेसीबी, बोरोसिल व राजस्थान गन, कोटा में सेवी वॉटर, बीकानेर में सिरामैक्स और सिरोही में मॉडर्न इंसुलेटर में एलपीजी बुलट लगे हैं। बुलट की री-फिलिंग के लिए एलपीजी टैंकर से ही सप्लाई होती है। अजमेर-जयपुर के 5 प्लांट में पाइपलाइन से सप्लाई सभी प्लांटों पर पाइपलाइन से सप्लाई के लिए चाहिए 2800 किलोमीटर की लाइन विशेषज्ञों का कहना है कि हादसों से बचने का एक विकल्प पाइपलाइन से सप्लाई भी है। हालांकि सभी प्लांट तक पाइपलाइन डालने का काम आसान नहीं है। वर्तमान में जामनगर-लोनी पाइपलाइन से राज्य के बॉटलिंग प्लांट्स में एलपीजी की सप्लाई की जा रही है, लेकिन उन्हीं 5 प्लांट पर जो इस लाइन के रूट में हैं। अन्य के लिए अलग से पाइपलाइन डालनी होगी। यह इतना आसान नहीं। वर्तमान में गोरखपुर-कांडला पाइपलाइन का काम चल रहा है। करीब 2800 किलोमीटर लंबी लाइन पर 10 हजार करोड़ रुपए से अधिक की राशि व्यय होगी। हालांकि इस रूट पर राजस्थान का कोई भी प्लांट नहीं आता। बता दें कि जामनगर-लोनी लाइन करीब 1400 किलोमीटर लंबी है। यानी इससे करीब आधी दूरी की। राजस्थान के अन्य सभी प्लांटों पर पाइपलाइन से सप्लाई के लिए गोरखपुर-कांडला जैसी ही पाइपलाइन डालनी होगी।


