केजरीवाल बोले-मोदी की गारंटी झूठी और नकली:कहा था- जहां झुग्गी-वहां मकान, उनका मतलब था, जहां झुग्गी-वहां मैदान; झुग्गियां तोड़ने के विरोध में प्रदर्शन

आम आदमी पार्टी ने रविवार को दिल्ली में झुग्गियों के खिलाफ चल रही कार्रवाई के विरोध में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया। इस दौरान पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा- मोदी की गारंटी झूठी, फर्जी और नकली है। आगे कभी जिंदगी में मोदी की गारंटी पर भरोसा मत करना। केजरीवाल ने कहा- चुनाव के समय मोदी जी ने आपको गारंटी दी थी- ‘जहां झुग्गी-वहां मकान।’ उनका मतलब था- ‘जहां झुग्गी-वहां मैदान।’ वो ये कहना चाहते थे मुझे वोट दे दो, मैं सारी झुग्गियां तोड़ दूंगा और मैदान बना दूंगा। केजरीवाल के भाषण की 4 बड़ी बातें… AAP के घर-रोजगार बचाओ आंदोलन की तस्वीरें… आतिशी ने कहा- भाजपा चुनाव जीतकर झुग्गियां तोड़ रही
AAP नेता आतिशी ने कहा- केजरीवाल जी ने चेताया था कि ये आपकी झुग्गियां तोड़ देंगे, अब चुनाव जीतने के बाद भाजपा सरकार आपकी झुग्गियां तोड़ रही है। केजरीवाल जी कहते हैं कि गरीबी हटाओं, भाजपा कहती है कि गरीबों को ही हटाओ। ये आपकी झुग्गियां तोड़कर जमीन अपने पूंजीपति मित्रों को देना चाहते हैं लेकिन जब तक AAP नेताओं और कार्यकर्ताओं में खून का एक भी कतरा बाकी है। हम आपकी झुग्गियों को बचाने के लिए सड़क, कोर्ट, विधानसभा से लेकर संसद तक लड़ाई लड़ेंगे। झुग्गियां तोड़ने का विरोध करने पर आतिशी को हिरासत में लिया था दिल्ली पुलिस ने 10 जून को पूर्व सीएम आतिशी को हिरासत में ले लिया था। वे कालकाजी के भूमिहीन कैंप में झुग्गियां को तोड़े जाने का विरोध कर रही थीं। पूर्व सीएम ने कहा, ‘बीजेपी इन झुग्गियां को तोड़ने वाली है। आज मुझे जेल लेकर जा रही है, क्योंकि मैं इन झुग्गी वालों की आवाज उठा रही हूं। बीजेपी, सीएम रेखा गुप्ता जी आप लोगों को झुग्गी वालों की हाय लगेगी। बीजेपी कभी वापस नहीं आएगी, इन गरीबों की हाय लगेगी।’ DDA ने पहले ही दे दिया था नोटिस
दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने दक्षिण दिल्ली के कालकाजी एक्सटेंशन में भूमिहीन कैंप के सभी निवासियों को एक आधिकारिक नोटिस जारी किया था। हाईकोर्ट के आदेश के बाद जारी इस नोटिस में अवैध झोपड़ियों के खिलाफ बुलडोजर एक्शन के चलते परिसर खाली करने का निर्देश दिया गया था। हाईकोर्ट के आदेश पर हो रही है कार्रवाई हाईकोर्ट ने 7 मई को 1,355 निवासियों की पुनर्वास याचिका खारिज कर दी थी। जस्टिस धर्मेश शर्मा की ग्रीष्मकालीन बेंच ने दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) को कहा है कि वह भूमिहीन कैंप को तोड़ने के लिए स्वतंत्र है। याचिकाकर्ताओं की दलील थी कि वे 1990 से यहां रह रहे हैं। ऐसे में सरकार को पुर्नस्थापित करने के निर्देश दिए जाएं। बेंच ने आदेश में स्पष्ट किया कि संबंधित विभाग द्वारा निर्धारित शर्तों को पूरा करने वाले परिवार ही पुनर्वास नीति का लाभ पाने के हकदार हैं। 2015 और 2019 में हुआ था सर्वे झुग्गी-झोपड़ी को राजधानी से हटाने व उनके पुनर्वास के लिए वर्ष 2015 में एक नीति तैयार की गई थी। इसके चलते वर्ष 2015 और 2019 में भूमिहीन कैंप का संयुक्त निरीक्षण किया गया था। इस निरीक्षण के तहत पुनर्वास नीति के तहत तय मानकों को पूरा करने वाले यहां के निवासियों की पुनर्वास सूची तैयार की गई थी।

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