भोपाल में नगर निगम के 250 करोड़ के हाउसिंग और कमर्शियल कॉम्प्लेक्स प्रोजेक्ट अटक गए हैं। इनमें से ज्यादातर प्रोजेक्ट बिना बिल्डिंग परमिशन के बन रहे हैं। यही नहीं, जहां बिल्डिंग परमिशन ली गई, वह भी नियमविरुद्ध है। आवासीय लैंड यूज में बिना बदलाव किए यहां कमर्शियल कॉम्प्लेक्स बना दिए गए हैं। हैरानी यह है कि 250 करोड़ के प्रोजेक्ट जिस प्रॉपर्टी पर डेवलप किए जा रहे हैं, उसका मालिकाना हक नगर निगम के पास है ही नहीं। बल्कि ये दूसरे विभागों के नाम पर हैं। भास्कर के पास इन सभी की सूची मौजूद है। अब मालिकाना हक पाने के लिए नगर निगम के इंजीनियर शासन, जिला प्रशासन, बिल्डिंग परमिशन शाखा और रेरा में रजिस्ट्रेशन के लिए चक्कर लगा रहे हैं। कई मामलों में तो निगम के ही बिल्डिंग परमिशन शाखा ने बने हुए स्ट्रक्चर पर बिल्डिंग परमिशन देने से इनकार कर दिया है। 38 इंजीनियर्स की लापरवाही : इस गड़बड़ी के पीछे 21 जोनों (तत्कालीन 19 जोन) में काम करने वाले इंजीनियर्स हैं। 38 इंजीनियर्स ने प्रोजेक्ट शुरू करते समय ध्यान नहीं रखा कि प्रोजेक्ट शुरू करने के लिए भू-स्वामित्व नगर निगम के नाम पर होना जरूरी है। इन अफसरों में सब इंजीनियर, एई व ईई भी हैं। अब सभी प्रोजेक्ट अटके, निगम की परमिशन शाखा का बिल्डिंग परमिशन देने से इनकार बड़े तालाब के कैचमेंट क्षेत्र में ही बना दी दुकानें लागत : 28.75 करोड़, संत हिरदाराम नगर में निर्माण… भोपाल ब्लॉक-ए, बी और सी में दुकान व उच्च स्तरीय आवासीय परिसर का निर्माण कराया गया है। बिल्डिंग परमिशन नहीं होने के बाद भी कमर्शियल कॉम्प्लेक्स बनाया। दुकानें बेच दीं, पर यहां बने घर अभी तक नहीं बिक पाए हैं। जिम्मेदार: शुभम वर्मा (सहायक यंत्री) दोनों प्रोजेक्ट इन्हीं के मालिकाना हक पीएचई के पास… वार्ड नंबर 3 के पास दुकानें बनाईं। जमीन बड़े तालाब के कैचमेंट एरिया (बेहटा गांव व बैरागढ़ कला गांव) में आती है। जमीन का मालिकाना हक राजधानी परियोजना प्रशासन व पीएचई विभाग के पास है। बिल्डिंग परमिशन शाखा निर्माण को मंजूरी नहीं दे रहा। जिस प्रोजेक्ट के बारे में आप बात कर रहे हैं, वहां अभी पदस्थ नहीं हूं। प्रोजेक्ट किस कारण अटका हुआ है, जानकारी नहीं है। जहां वर्तमान में पदस्थ हूं, उसकी मंजूरी की प्रक्रिया चल रही है। (शुभम वर्मा एई) लागत : 12.99 करोड़, कृषि भूमि पर कॉम्प्लेक्स
जिम्मेदार अफसर: प्रदीप बिंडैया (सहायक यंत्री) {स्थान : दशहरा मैदान, नीलबड़नगर निगम ने
कृषि भूमि पर कमर्शियल कॉम्प्लेक्स बनाया है। भू-स्वामित्व भी उलझा हुआ है, क्योंकि जमीन सीधे नगर निगम के नाम पर दर्ज नहीं है। लैंड यूज में बदलाव नहीं किया गया। बिल्डिंग परमिशन भी नहीं है। पहले नीलबड़ मेरे क्षेत्र में था, अब नहीं है। उस समय मंजूरी हुई थी या नहीं, याद नहीं है। (जोन-3 के तत्कालीन एई) लागत : 2.33 करोड़, लैंड यूज में बदलाव नहीं कराया
जिम्मेदार अफसर: संजय बराड़िया (सहायक यंत्री) {स्थान : जोन-13, होशंगाबाद रोड
सुरेंद्र पैलेस में आवासीय भूमि पर कमर्शियल कॉम्प्लेक्स बनाकर दुकानें बेची। जमीन शासन की अतिशेष भूमि के नाम पर दर्ज है। इसके लिए टीएंडसीपी से लैंड यूज में बदलाव नहीं कराया गया है। बहुत समय पहले उस क्षेत्र को देखता था। अभी वहां पर नहीं हूं। इसलिए उस प्रोजेक्ट के बारे में कुछ याद नहीं है। लागत : 5.14 करोड़, कमर्शियल कॉम्प्लेक्स अटका
जिम्मेदार अफसर: सोहेल जफर (सेवानिवृत्त) {स्थान : करोंद रोड
रुसल्ली में हाउसिंग बोर्ड की जमीन पर कमर्शियल कॉम्प्लेक्स बन रहा है। जमीन का लैंड यूज आवासीय है। इसमें भी लैंड यूस के बदलाव के लिए टीएंडसीपी से कोई अनुमति नहीं ली गई है। प्रोजेक्ट का ले-आउट मैंने ही दिया था। प्रोजेक्ट क्यों अटका, जानकारी नहीं है। 3 साल पहले एई बनकर रिटायर हो गया हूं। अफसरों की लापरवाही से ये स्थिति पहले तो नगर निगम के अफसरों ने ध्यान नहीं दिया और दूसरे विभागों की जमीनों पर प्रोजेक्ट लांच कर दिए। इनकी अनुमति कराए बिना ही प्रोजेक्ट खड़े कर दिए हैं। ये सबसे बड़ी गलती है। हम कोशिश कर रहे हैं कि कैसे भी इन प्रोजेक्ट को पूरा किया जाए। -मालती राय, महापौर, नगर निगम एक्सपर्ट – समाधान क्या है? अब पहले मालिकाना हक लेना होगा, फिर बिल्डिंग परमिशन भू-स्वामित्व का आवंटन : संबंधित जमीनों का मालिकाना हक नगर निगम के नाम पर आवंटित कराना होगा। कलेक्टर के यहां पर आवेदन करना होगा। कलेक्टर सारे दस्तावेजों के परीक्षण के बाद शासन के पास जमीन आवंटन की फाइल को भेजेंगे। यहां से जमीन को आरक्षित और फिर आवंटित करने की कार्रवाई पूरी की जाएगी।
लैंड यूज परिवर्तन : टीएंडसीपी से मास्टर प्लान के आधार पर लैंड यूज में बदलाव की प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
बिल्डिंग परमिशन : निगम की बिल्डिंग परमिशन शाखा से अनुमति लेनी होगी। हालांकि, सवाल यह है कि बड़ा नगर निगम बने हुए स्ट्रक्चर पर बिल्डिंग परमिशन कैसे देगा? नियम का कैसे उल्लंघन करेगा?
रेरा रजिस्ट्रेशन : यदि परमिशन शाखा से अनुमति मिल गई तो रेरा में प्रोजेक्ट का रजिस्ट्रेशन होगा। रेरा नंबर मिलने के बाद ही प्रोजेक्ट्स बेचे जा सकेंगे।


