‘एक साल से विपिन घर नहीं आया…जब घर आता था, तब भी हमारा कोई मतलब नहीं था। उसका कमरा अलग है, जिसमें एक साल से ताला लगा है। वह अपने परिवार को लेकर गया, तब से वापस नहीं आया। अखबार और मोबाइल से घटना के बारे में पता चला।’ ‘इससे पहले भी वह ऐसे ही मामले में जेल गया था। यहां था तब शराब पीकर आसपास के लोगों के विवाद करता था। यहां से गया तो हमने सोचा कि वो बदल जाएगा, लेकिन कुछ नहीं बदला।’ ये शब्द हैं लखनऊ में इंडियन ओवरसीज बैंक के 42 लॉकर चोरी करने वाले मास्टरमाइंड विपिन के भाई प्रदीप के। दैनिक भास्कर की टीम विपिन के घर पहुंची तो मकान में ताला लगा था। भाई का परिवार गांव में रहता है। पहले जानें कौन है मास्टरमाइंड विपिन
सीतापुर का रहने वाला विपिन बचपन से ही चिड़चिड़े स्वभाव का है। इसका कारण यह है, कि जब वह मां के पेट में था, तभी पिता की मौत हो गई। पैदा होने के बाद मां भी उसे छोड़कर दूसरी शादी करके चली गई। चाचा-चाची ने विपिन की परवरिश की। लोगों के ताने सुनकर बड़ा हो रहा विपिन नशे की चंगुल में फंस गया। बड़ा हुआ तो घरवालों ने विपिन की शादी की। वह पत्नी राधा को लेकर जालंधर चला गया। वहां चोरी के आरोप में उसे जेल जाना पड़ा। इसके बाद पत्नी ने भी विपिन को छोड़ दिया। 3 साल के बेटे को लेकर चली गई और दूसरी शादी कर ली। विपिन की सास और साले ने उसे बेइज्जत करके घर से भगा दिया। इन सबसे परेशान विपिन ने लखनऊ के तकरोही में अपना नया ठिकाना बनाया। यहां काजल नाम की लड़की से शादी की। जल्द अमीर बनने का चक्कर और ज्यादा पैसों की लालच में उसने जेल में मिले दोस्त के साथ इतनी बड़ी चोरी की साजिश रच डाली। अब वह सलाखों के पीछे है। अब पढ़िए दैनिक भास्कर की टीम को विपिन के भाई-भाभी और गांव वालों ने क्या बताया? मास्टरमाइंड के घर से रिपोर्ट… परिवार नहीं जोड़ना चाहता उसका नाम
लखनऊ से 103 किलोमीटर दूर सीतापुर जिले के सेमरी चौराहा के पास पिपापुरवा गांव है। इसी गांव में मास्टरमाइंड विपिन का परिवार रहता है। विपिन ने अपने कमरे को पक्का बनवा रखा है। हालांकि जब से वह गया है, वहां ताला ही लगा हुआ है। घर में भाभी निर्मला देवी मिलीं। निर्मला ने बताया- करीब एक साल से विपिन घर नहीं आया। अपने कमरे में ताला लगाकर गया है। विपिन आता है, तो कमरा खुलता है। फिलहाल हम लोगों से कोई मतलब नहीं है। विपिन के भाई प्रदीप ने बताया कि हम लोग अब उसको पहचानना भी नहीं चाहते हैं। उसके साथ अगर हमारा नाम भी जुड़ता है, तो हम डर जाते हैं। उसके नाम से हमारा परिवार बर्बाद हो जाएगा। जालंधर में पेंटिंग करने गया था
निर्मला देवी ने बताया- विपिन पहले सीतापुर में पेंटिंग का काम करता था। इसके बाद पेंटिंग का काम करने जालंधर चला गया। अपने परिवार को भी जालंधर में शिफ्ट कर दिया। शुरू में तो कुछ बातचीत होती थी। पहली बार जेल जाने के बाद वो भी बंद हो गई। विपिन के बारे में ज्यादा जानकारी इसलिए नहीं हैं, क्योंकि शादी के बाद हम अपने पति प्रदीप के साथ दिल्ली में रहते थे। वहां पर कुछ समय रहने के बाद सीतापुर आ गए। जब हम लोग यहां आए, उसके पहले विपिन अपनी पत्नी व बेटे के साथ यहां से जा चुका था। शराब पीकर झगड़ा किया लेकिन चोरी कभी नहीं की
भाई प्रदीप बताते हैं कि विपिन की शादी सीतापुर के हरैरी की रहने वाली राधा से हुई थी। शादी के बाद से उसका अपनी ससुराल की तरफ ज्यादा झुकाव था। कुछ समय काम के सिलसिले में लखनऊ रहा। इसके बाद ससुरालवालों के बुलाने पर जालंधर चला गया। तीन साल पहले बैंक से जुड़े एक मामले में जालंधर में जेल गया। करीब डेढ़ साल बाद वहां से छूटा। उस समय लगा कि शायद किसी के साथ रहकर ऐसा कर दिया हो और उसमें फंस गया। हालांकि उसके बाद हम लोगों ने जानने का प्रयास भी नहीं किया कि क्या और कैसे हुआ? जब तक सीतापुर में था, तब कभी ऐसी घटना नहीं की। हां शराब पीकर कभी-कभी लड़ाई झगड़ा कर लेता था। बचपन में मां छोड़कर गई, बड़े होने पर पत्नी ने छोड़ा साथ
चाची सुमन देवी बताती हैं कि उसने बचपन से काफी दुख देखा है। जन्म से पहले पिता का निधन हो गया। पैदा होने के बाद मां छोड़कर दूसरे आदमी के साथ चली गई। इसके बाद चाचा ने पाल पोसकर बड़ा किया। विपिन की शादी राधा से हुई। एक तीन साल का बेटा भी है। चाची सुमन देवी ने बताया, राधा के साथ जालंधर जाने के बाद विपिन बदल गया। विपिन गलत लोगों के साथ था। राधा के मामा के साथ मिलकर जालंधर के बैंक में पहली बार चोरी की थी। पुलिस ने पकड़ लिया और जेल हो गई। इस बीच राधा छोड़कर चली गई। उसने दूसरी शादी कर ली। बेटे को भी अपने साथ ले गई। इसके बाद विपिन अकेला हो गया। पिछले दशहरे में सीतापुर आया था
चाची ने बताया कि वह कहां रहता था, क्या करता था किसी को कुछ नहीं पता चलता था। इस दौरान बीच में पता चला कि उसने गोरखपुर की रहने वाली काजल नाम की लड़की से शादी कर ली है। काम के बारे में जब पूछा गया तो कुछ खास नहीं बताया था। करीब डेढ़ साल जेल में बंद था। वहां से छूटने के बाद पिछले दशहरे में सीतापुर आया था। फिर पंजाब चला गया, इसके बाद नहीं लौटा। विपिन के बारे में पूरा गांव जानता है। आज तक किसी के खेत का गन्ना नहीं चुराया। जिनके घर पर काम करता था, वहां सारे पैसे की जिम्मेदारी उसके पास थी। आज तक चोरी का इल्जाम नहीं लगा। बाकी शराब की आदत लग चुकी थी। जिसकी वजह से लड़ाई झगड़े कर लेता था। दारू पीने के बाद होश में नहीं रहता था। अब बताते हैं पूरी घटना के बारे में…
21 दिसंबर (शनिवार) की रात 12 बजे लखनऊ के चिनहट में इंडियन ओवरसीज बैंक में 42 लॉकर तोड़कर करोड़ों के गहने चोरी हो गए। रविवार दोपहर घटना के बारे में जानकारी हुई। पुलिस बैंक पहुंची और जांच पड़ताल की। सोमवार को चेकिंग के दौरान विपिन के तीन साथी लखनऊ में पकड़ लिए गए। जबकि चार आरोपी भाग गए। सख्ती करने पर आरोपियों ने बताया कि 7 लोगों के साथ बैंक में चोरी की थी। इस बीच पहला एनकाउंटर लखनऊ में सोमवार रात साढ़े 12 बजे हुआ। दूसरा एनकाउंटर भी लखनऊ में हुआ। तीसरी मुठभेड़ लखनऊ 350 किमी दूर गाजीपुर के गहमर में मंगलवार तड़के साढ़े 4 बजे हुआ। बैंक लूट में फरार सोबिंद कुमार को लखनऊ में, जबकि सन्नी दयाल को गाजीपुर में पुलिस ने मार गिराया। सन्नी दयाल के साथ ही विपिन भी था, लेकिन मौके का फायदा उठाकर भाग निकला। पुलिस लगातार चेकिंग कर रही थी। बुधवार को गाजीपुर में विपिन को मदनपुरा मोड़ के पास पकड़ लिया गया। विपिन के पास से 315 बोर का तमंचा, एक जिंदा कारतूस और 6,830 रुपए नकद बरामद हुए हैं। पुलिस ने इस मामले में अब तक 4 को गिरफ्तार किया है। जबकि सोबिंद और सन्नी दयाल पुलिस मुठभेड़ में मारे गए। अब सिर्फ एक आरोपी मिथुन की तलाश की जा रही है। ………………………… इस खबर को भी पढ़ें…. लखनऊ में बैंक लॉकर काटने वाला मास्टरमाइंड गिरफ्तार:गाजीपुर में साथी का एनकाउंटर देख भाग निकला था, 25 हजार का इनाम था लखनऊ में 22 दिसंबर की रात इंडियन ओवरसीज बैंक के 42 लॉकर काटने वाले मास्टरमाइंड को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। मास्टरमाइंड विपिन वर्मा को पुलिस ने गाजीपुर के जमानियां से पकड़ा है। पढ़ें पूरी खबर…


