पिकअप में ले गए शासकीय सेवक का शव:कांकेर मेडिकल कॉलेज में नहीं मिला वाहन; पंचनामा के लिए घंटों इंतजार

कांकेर जिले के मेडिकल कॉलेज में इलाज के दौरान एक शासकीय सेवक की मौत हो गई, जिसके बाद परिवार को शव को घर ले जाने के लिए पिकअप का सहारा लेना पड़ा। 30 जून को परिजन पंचनामे के लिए पुलिस का घंटों इंतजार करते रहे। मामला कोतवाली थाना क्षेत्र का है। पोस्टमार्टम के बाद शव को घर ले जाने की समस्या खड़ी हो गई। अस्पताल में शव वाहन उपलब्ध नहीं था। बाहर से निजी वाहन की व्यवस्था करने का प्रयास किया गया, लेकिन कोई सहायता नहीं मिली। अंत में परिवार को पिकअप वाहन से शव को घर ले जाना पड़ा। मृतक चिंता राम गजबीए बोरगांव के प्राथमिक शाला में प्रधान पाठक पद पर पदस्थ थे, जहां उनकी अचानक तबीयत बिगड़ी और अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। व्यवस्थाओं में कमी से परेशान होते रहे परिजन परिजनों का कहना है कि मेडिकल कॉलेज बनने से बेहतर सुविधाओं की उम्मीद थी। लेकिन यहां जिला अस्पताल जैसी बुनियादी सुविधाएं भी नहीं मिल पा रही हैं। इलाज से लेकर अन्य व्यवस्थाओं में कमी के कारण मरीज और उनके परिजन परेशान हो रहे हैं। एक शासकीय सेवक की मौत के बाद उनके शव को ले जाने के लिए सरकारी वाहन नहीं मिलना स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। बचने का प्रयास करते रहे अधिकारी कांकेर मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल के संयुक्त संचालक का कोई जवाब नहीं आया है। जब चिंता राम समेत मरीजों के साथ होने वाली घटनाओं के बारे में सीएमएचओ और सिविल सर्जन से जवाब मांगा गया तो उन्होंने डीन से जानकारी लेने की बात कही।

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