छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के निर्देश पर सूरजपुर जिले में एक विशेष सर्वेक्षण किया गया। यह सर्वेक्षण सड़क और सड़क जैसी परिस्थितियों में रहने वाले बच्चों की स्थिति जानने के लिए था। जिला कलेक्टर एस. जयवर्धन के आदेश पर यह अभियान चलाया गया। महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी रमेश साहू के मार्गदर्शन में कार्य हुआ। जिला बाल संरक्षण अधिकारी मनोज जायसवाल के नेतृत्व में टीम ने जिले के 8 हॉटस्पॉट में सर्वेक्षण किया। अलग-अलग जगहों में कार्रवाई टीम ने किराना दुकान, होटल, गैरेज, ईंट भट्टा और कारखानों का निरीक्षण किया। भिक्षावृत्ति में लगे, बाल श्रमिक, घुमंतू और स्कूल छोड़ चुके बच्चों से पूछताछ की गई। सर्वेक्षण सूरजपुर, विश्रामपुर, प्रेमनगर, रामानुजनगर, भैयाथान, भटगांव और जरही में किया गया। यह कार्यक्रम 12 से 30 जून तक चला। इसमें महिला एवं बाल विकास विभाग, जिला बाल संरक्षण इकाई, श्रम विभाग, पुलिस विभाग और चाइल्ड लाइन की टीमें शामिल थीं। सर्वेक्षण में अंजनी साहू, पवन धीवर, जनार्दन यादव, दिनेश यादव, रमेश साहू, प्रकाश राजवाड़े, एम पी कादरी, पी एस एक्का, डोलामणि मांझी, विवेक गुप्ता, ललित दुबे और हरी शंकर सिंह सहित कई अधिकारी मौजूद रहे। जिले में बाल विवाह के खिलाफ कार्रवाई वहीं, सूरजपुर जिले में बाल विवाह रोकने में प्रशासन को बड़ी सफलता मिली है। कलेक्टर एस. जयवर्धन के निर्देश पर चल रहे अभियान के तहत एक 17 साल की नाबालिग लड़की की शादी को रोका गया। ग्रामीणों से मिली सूचना के अनुसार, लड़की के रिश्तेदार उसे बुआ के घर ले जाकर शादी कराने की योजना बना रहे थे। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और पर्यवेक्षक ने इस सूचना की पुष्टि की।जिला कार्यक्रम अधिकारी रमेश साहू के निर्देशन में एक टीम का गठन किया गया। इस टीम में जिला बाल संरक्षण इकाई, चाइल्ड लाइन, महिला एवं बाल विकास विभाग और पुलिस के अधिकारी शामिल थे। जिला बाल संरक्षण अधिकारी मनोज जायसवाल के नेतृत्व में टीम बालिका के बुआ के घर पहुंची।अधिकारियों ने लड़की और उसके परिवार को समझाया कि इतनी कम उम्र में शादी करना गैरकानूनी है। लड़की ने अभी 8वीं तक की पढ़ाई की है और उसे आगे भी पढ़ाई जारी रखनी चाहिए। टीम की कार्रवाई से एक और बाल विवाह रुकने में सफलता मिली।


