बलरामपुर में बाढ़ में बहे मां-बेटे…3 की मौत:पुल धंसने से गिरी पिकअप, सूरजपुर में नदी-नाले उफान पर, कंधे पर बाइक रख कर रहे पार

छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग में बारिश का कहर जारी है। बलरामपुर के शंकरगढ़ में कोरवा जनजाति के मां-बेटे की उफनते नाले में बहने से मौत हो गई, जबकि दूसरी तरफ गेउर नदी में मछली मारने गए एक युवक की डूबने से जान चली गई। वहीं बलरामपुर के गागर नदी में अचानक आई बाढ़ के कारण तीन पहाड़ी कोरवा बच्चे घंटों तक फंसे रहे, जिन्हें ग्रामीणों की मदद से बड़ी मुश्किल से सुरक्षित बाहर निकाला गया। इसी दौरान बचवार मार्ग पर एक पुरानी और कमजोर पुलिया तेज बहाव में ढह गई, जिससे एक लोडेड पिकअप धंस गई। हादसे के बाद से बचवार-पटना मार्ग पूरी तरह से ठप पड़ा हुआ है, जिससे स्थानीयों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वहीं सूरजपुर जिले के चांदनी बिहारपुर क्षेत्र में लोग जान जोखिम में डालकर बाइक को कंधे पर उठाकर नदी पार करने को मजबूर हैं। बारिश और बाढ़ से जुड़ी ये तस्वीरें देखिए अब सिलसिलेवार कहां कौन सी घटना हुई ? पहली घटना- बलरामपुर में बहने से मां-बेटे की मौत बलरामपुर जिले के शंकरगढ़ थाना क्षेत्र में उफनते नाले को पार कर रहे मां-बेटे बह गए। दोनों का शव मंगलवार को बरामद हुआ है। आमगांव निवासी विशुन कोरवा की पत्नी रजनी पहाड़ी कोरवा (20) अपने 2 वर्षीय बेटे आनंद के साथ मायके रकैया गांव गई थी। बताया जा रहा है कि वहां से शाम करीब 6 से 7 बजे के बीच वह बेटे को लेकर पैदल ही लौट रही थी। दोनों गांव के बीच स्थित बढ़नी झरिया नाले में कमर तक पानी भरा था। बेटे को गोद में लेकर रजनी कोरवा नाला पार कर रही थी, तभी दोनों नाले के तेज बहाव में बह गए। पुलिस ने शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा मंगलवार सुबह ग्रामीणों ने मां-बेटे का शव घटनास्थल से करीब एक किलोमीटर दूर खेत में पड़ा देखा। सूचना शंकरगढ़ पुलिस को दी। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और शवों को पंचनामा के बाद पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है। दूसरी घटना- बलरामपुर में डूबने से युवक की मौत वहीं दूसरी घटना बलरामपुर जिले की है। जारगिम निवासी में मणिशंकर पैकरा (45) सोमवार को अपने अन्य साथियों के साथ गेउर नदी पार कर मछली पकड़ने के लिए गया हुआ था। दोपहर करीब तीन बजे ग्रामीण वापस जारगिम आने के लिए निकले, तब तक नदी में बाढ़ आ चुकी थी। इस दौरान उफनती नदी को पार करने के दौरान मणिशंकर पैकरा बह गया। शाम को उसकी लाश नदी किनारे मिली है। शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है। पोस्टमॉर्टम के बाद परिजनों को शव सौंपा जाएगा। तीसरी घटना- राजपुर में बाढ़ में फंसे 3 कोरवा बच्चे राजपुर क्षेत्र में बारिश के बीच गागर नदी में मछली पकड़ने गए 3 पहाड़ी कोरवा बच्चे घंटों तक फंसे रहे। राजपुर से तीन किलोमीटर दूर उधेनुपुरा के तीन पहाड़ी कोरवा बच्चे नदी में मछली पकड़ने गए थे।
अचानक नदी का जल स्तर 3 बढ़ गया तो तीनों बच्चे बीच में ही फंस गए। इस दौरान करीब तीन घंटे बाद नदी का जलस्तर कम हुआ, तो बच्चों को ग्रामीणों की मदद से बाहर निकाला गया। सभी बच्चे सुरक्षित हैं। चौथी घटना- सूरजपुर में कंधे पर बाइक रखकर नदी पार कर रहे ग्रामीण सूरजपुर जिले में लगातार हो रही बारिश से नदी-नाले उफान पर हैं। क्षेत्र में रुक-रुक कर हो रही बारिश से नदियों का जलस्तर बढ़ गया है। नदी चांदनी बिहारपुर क्षेत्र के खोड़- छतौली मार्ग पर स्थित है। पुलिया का निर्माण अभी तक नहीं हो सका है। ऐसे में कंधे पर बाइक रखकर जान जोखिम में डालकर ग्रामीण नदी पार कर रहे हैं, जिसका वीडियो वायरल हो रहा है। 33 जिलों में अलर्ट इस बीच मौसम विभाग ने आज पूरे छत्तीसगढ़ में बारिश का अलर्ट जारी किया है। बिलासपुर-कोरबा समेत 18 जिलों में गरज चमक के साथ पानी बरसेगा। वहीं रायपुर-धमतरी समेत 15 जिलों में बिजली गिर सकती है। अगले पांच दिनों तक प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में आंधी-बारिश की स्थिति बनी रहेगी। सोमवार को प्रदेश के 100 से अधिक जगहों पर पानी बरसा। औसतन बारिश 29.42 मिमी रिकॉर्ड किया गया है। वहीं तापमान की बात करें तो 31.0°C के साथ बिलासपुर सबसे गर्म रहा और 19.0°C डिग्री न्यूनतम तापमान के साथ राजनांदगांव सबसे ठंडा रहा। जून में 22% कम बरसा पानी, बलरामपुर में सबसे ज्यादा 1 जून से 30 जून तक प्रदेश में 151.2 MM बारिश हो चुकी है। जबकि पूरे जून में नॉर्मली 193.5 MM बारिश रिकॉर्ड की जाती है। इस लिहाज से अब तक बारिश लगभग 22% कम हुई है। सबसे ज्यादा बारिश बलरामपुर में हुई है। यहां सामान्य से लगभग 112% प्रतिशत ज्यादा पानी बरसा है। जिले में जून में अब तक 293.7 MM पानी बरस चुका है। जबकि सामान्य तौर पर 138 MM पानी ही गिरता है। बारिश की तस्वीर देखिए- राजनांदगांव में कम बरसा पानी वहीं सबसे कम बारिश राजनांदगांव और बेमेतरा में हुई है। राजनांदगांव में सामान्य से लगभग 66% कम पानी गिरा है। जिले में जून में 64.2 MM पानी बरसा है। जबकि बीते महीने में सामान्य तौर पर 189.3 मिमी पानी बरस जाना चाहिए था। वहीं बेमेतरा में लगभग 62% कम बारिश हुई है। जिले में 67.4 MM पानी बरसा है। जबकि बीते महीने में सामान्य तौर पर 175.8 मिमी पानी बरस जाना चाहिए था। प्रदेश के आंकड़ों पर ओवरऑल बात करें तो एक जिले में सामान्य से बहुत अधिक पानी गिरा है। एक जिले में सामान्य से अधिक पानी गिरा है। नौ जिलों में सामान्य पानी बरसा है। 20 जिलों में नॉर्मल से कम पानी गिरा है। दो जिलों में सामान्य से बहुत कम बारिश हुई है। मई में 374 फीसदी ज्यादा बारिश हुई थी पिछले माह लगातार बने सिस्टम और करीब 14 दिन पहले आए मानसून ने पूरे छत्तीसगढ़ में मई महीने में जमकर बारिश कराई। इस दौरान औसत से 373 फीसदी ज्यादा पानी गिर गया। इसके बाद से मानसून पिछले करीब 12 दिनों से ठहरा है। यह आगे ही नहीं बढ़ रहा है। छत्तीसगढ़ में 22 मई से 28 मई के बीच 53.51 मिलीमीटर औसत बारिश हो चुकी है। प्रदेश में मानसून में औसतन 1200 मिलीमीटर पानी बरसता है। पिछले साल 1276.3 MM पानी गिरा था। पिछले साल के मुकाबले तापमान कम हालांकि इस बार की स्थित पिछले साल के मुकाबले बेहतर है। साल 2024 में जून का अधिकतम तापमान 45.7°C था, जो 1 जून को दर्ज किया गया था। जबकि इस साल अधिकतम तापमान अब तक 42 से 43°C के आस-पास ही रहा है। वहीं सबसे कम न्यूनतम तापमान 23.5°C 19 जून को रिकॉर्ड किया गया था। पिछले साल जून में पूरे महीने के औसत तापमान की बात करें तो 38.6°C रहा था। वहीं न्यूनतम औसतन तापमान 27.7°C दर्ज किया गया था। लंबा रह सकता है मानसून मानसून के केरल पहुंचने की सामान्य तारीख 1 जून है। इस साल 8 दिन पहले यानी 24 मई को ही केरल पहुंच गया था। मानसून के लौटने की सामान्य तारीख 15 अक्टूबर है। अगर इस साल अपने नियमित समय पर ही लौटता है तो मानसून की अवधि 145 दिन रहेगी। इस बीच मानसून ब्रेक की स्थिति ना हो तो जल्दी आने का फायदा मिलता सकता है। इसलिए बिजली गिरती है दरअसल, आसमान में विपरीत एनर्जी के बादल हवा से उमड़ते-घुमड़ते रहते हैं। ये विपरीत दिशा में जाते हुए आपस में टकराते हैं। इससे होने वाले घर्षण से बिजली पैदा होती है और वह धरती पर गिरती है। आकाशीय बिजली पृथ्वी पर पहुंचने के बाद ऐसे माध्यम को तलाशती है जहां से वह गुजर सके। अगर यह आकाशीय बिजली, बिजली के खंभों के संपर्क में आती है तो वह उसके लिए कंडक्टर (संचालक) का काम करता है, लेकिन उस समय कोई व्यक्ति इसकी परिधि में आ जाता है तो वह उस चार्ज के लिए सबसे बढ़िया कंडक्टर का काम करता है। जयपुर में आमेर महल के वॉच टावर पर हुए हादसे में भी कुछ ऐसा ही हुआ। आकाशीय बिजली से जुड़े कुछ तथ्य जो आपके लिए जानना जरूरी आकाशीय बिजली से जुड़े मिथ

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *