बाघिन टी-84 ऐरोहेड व उसके शावकों का पिछले एक सप्ताह से रणथंभौर दुर्ग में मूवमेंट बना हुआ है। जिसके चलते यहां श्रद्धालुओं के लिए प्रवेश बंद किया गया है। जिससे रणथंभौर त्रिनेत्र गणेश के जाने वाले श्रद्धालुओं को खासी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। एक सप्ताह बाद फिर से रणथंभौर में प्रवेश शुरू किया गया है। फिलहाल वन विभाग ने दुर्ग में कई टीमें तैनात की है, जो मॉनिटरिंग कर रही है। दुर्ग में श्रद्धालुओं को प्रवेश शुरू
उल्लेखनीय है कि बुधवार को रणथंभौर त्रिनेत्र गणेश मंदिर ट्रस्ट के प्रधान सेवक हिमांशु गौतम ने प्रशासन से जल्द से जल्द बाघिन को दुर्ग से जंगल में भेजने की मांग की थी। जिससे श्रद्धालुओं को फिर से नियमित त्रिनेत्र गणेश के दर्शन हो सके। जिसके बाद अब रणथंभौर दुर्ग में श्रद्धालुओं को प्रवेश शुरू किया गया है। वहीं वन विभाग की ओर से एतिहात के तौर पर लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है। आपको बता दें कि बाघिन ऐरोहेड व उसके शावक शुक्रवार शाम करीब 5 बजे रणथंभौर दुर्ग में जा पहुंचे थे। यहां पर बाघिन व उसके शावकों का मूवमेंट पद्मला तालाब, 32 खंभों की छतरी, लक्ष्मी नारायण मंदिर के आसपास बना हुआ था। वहीं वन विभाग की टीमें और बाघिन में उसके शावकों की मॉनिटरिंग कर रहा था। वन विभाग और त्रिनेत्र गणेश मंदिर ट्रस्ट ने दुर्ग में प्रवेश बंद किया था। जिसे अब फिर से शुरू किया गया है।


