भक्त वही जो प्रभु का नाम लेते ही गद्गद हो:पंडित रामपाल शर्मा शास्त्री ने भागवत ज्ञान यज्ञ में समझाया कर्मों का महत्व

राजसमंद के महावीर नगर में श्रीमद् भागवत ज्ञान यज्ञ सप्ताह शुरू हुआ। पंडित रामपाल शर्मा शास्त्री ने भागवत कथा के महात्म को बताते हुए प्रथम अध्याय से कथा की शुरूआत की। शास्त्री ने श्रोताओं को बताया कि जिस तरह मोबाइल में बैट्री डाउन होने पर बार-बार उसे चार्ज करना पड़ता है, ठीक उसी तरह श्रीमद भागवत भी ज्ञान रूपी एक चार्जर है, जो व्यक्ति को समय-समय पर ज्ञान की वृद्धि के माध्यम से चार्ज करती है। उन्होंने कहा, व्यक्ति जब संसार से जाता है तो अपने साथ कर्मों के संस्कार लेकर जाता है और वापस जन्म लेता है तो प्रारब्ध में अपने इन्हीं संस्कार रूपी कर्मों को लेकर आता है। उन्होंने कहा, इन्हीं संस्कार रूपी कर्मों के आधार पर यह तय होता है कि जीव कहां और किस रूप में जन्म लेगा। उन्होंने कहा, भागवत की यात्रा पनघट से मरघट से पहले तक की है और यही व्यक्ति को जीते जी मुक्ति भी दिलाती है। शास्त्री ने कहा, केवल दिखावा करने और पूजा करने वाला ही भक्त नहीं हो सकता। आप अभी भागवत में बैठे हैं, लेकिन आपका मन अभी भागवत में नहीं होकर कहीं और विचरण कर रहा है, तो आप भागवत का आनंद नहीं ले सकते। आप भक्त नहीं हो सकते। भक्त वही होता है जो प्रभु का नाम लेते लेते गदगद हो जाए। इससे पूर्व प्रारंभ में कथा अनुष्ठानकर्ता जगदीश अग्रवाल एवं परिवार ने व्यास पीठ का पूजन किया। सजाई आकर्षक झांकी कथा के दौरान नारद ऋषि के साथ ही ऋषि-मुनियों की आकर्षक झांकी के माध्यम से कथा प्रसंग को समझाया गया। कथा पंडाल में क्या लेकर आया तू बंदे क्या लेकर जाएगा…, कोई पियो रे प्याला राम रस का रे… भजनों की प्रस्तुति देकर वातावरण को भागवत मय बना दिया।

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