बिजली के निजीकरण के खिलाफ व 765 केवीए लाइन के मुआवजे सहित अनेक मांगों को लेकर किसान सभा सीकर की ओर से किसानों ने सीकर जिला कलेक्ट्रेट के बाहर पड़ाव डाला है। सैंकड़ों की संख्या में किसान कलेक्ट्रेट के बाहर धरने पर बैठे हैं। किसानों द्वारा विरोध-प्रदर्शन किया जाएगा। इसके लिए पुलिस जाब्ता तैनात किया गया है। बोले- बिजली का निजीकरण किया जा रहा सांसद अमराराम ने ने बताया- केंद्र व राज्य सरकार की किसान विरोधी नीतियों को चलते प्रदेशभर में बिजली निगम का निजीकरण किया जा रहा है। जिसके चलते 765 केवीए की बिजली की लाइन खड़ी की जा रही है। लाइनों के टॉवर किसानों के खेतों में लगाए जा रहे हैं लेकिन किसानों को मुआवजा नहीं दिया जा रहा। टॉवर की वजह से किसानों की काफी भूमि एक्वायर हुई है जिससे उन्हें नुकसान हुआ है। अनशन पर बैठे किसानों की तबीयत बिगड़ी वहीं किसानों को वर्ष 2023 का फसल बीमा क्लेम (खरीफ) नहीं दिया। किसानों के खातों में क्लेम की राशि अभी तक नहीं आई। न ही किसानों को अभी तक आदान अनुदान का मुआवजा मिला। समर्थन मूल्य पर किसानों से फसलों के खरीद भी नहीं की जा रही और दूध के भाव भी नहीं मिल रहे। पिछले काफी लंबे समय से सीकर में समर्थन मूल्य पर होने वाली मूंगफली की खरीद भी बंद पड़ी है। किसान नेताओं ने संबोधित करते हुए कहा- पंजाब बॉर्डर पर भी किसान आंदोलन कर रहें हैं। अनशन पर बैठे किसानों की तबीयत बिगड़ रही है लेकिन सरकार को कोई चिंता नहीं। केंद्र सरकार उनकी भी कोई सुनवाई नहीं कर रही। केंद्र सरकार किसानों के प्रति तानाशाही रवैया अपना रही है। उन्होंने कहा- सरकार की नीतियों के खिलाफ एक बार फिर से बड़ा किसान आंदोलन शुरू होगा। अमराराम ने कहा- केंद्र सरकार ने सौर ऊर्जा के नाम से राजस्थान की जमीन अंबानी-अडानी को दे दी। जमीन से करोड़ों पेड़ों को बिना इजाजत के काट दिया गया। अंबानी-अडानी ने किसानों को बिना मुआवजा दिए गैस की पाइपलाइन व बिजली के टॉवर किसानों के खेतों में खड़े कर दिए। हमारी मांग है कि कानून के अनुसार पहले किसानों को मुआवजा दिया जाए फिर काम शुरू करें। सांसद ने कहा- किसान नेता जगजीत डल्लेवाल को अनशन पर बैठे हुए 30 दिन हो गए हैं। केंद्र सरकार किसानों को ट्रैक्टर से दिल्ली नहीं आने दे रही। लेकिन किसान, सरकार से डरने वाले नहीं हैं। किसान केंद्र सरकार की किसान विरोधी नीतियों का डटकर विरोध करेंगे।


