दुर्ग के राजीव भवन में कांग्रेस की बैठक में छत्तीसगढ़ के पूर्व कृषि मंत्री रविंद्र चौबे ने केंद्र और राज्य सरकार पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि देश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गारंटी की खूब चर्चा हो रही है, लेकिन सबसे ज्यादा परेशानी किसान ही झेल रहा है। भाजपा सरकार में भी किसानों की स्थिति जस की तस बनी हुई है। पूर्व मंत्री चौबे ने यह बयान आगामी 7 जुलाई को रायपुर में आयोजित होने वाले ‘संविधान बचाओ रैली’ कार्यक्रम की तैयारियों के सिलसिले में आयोजित बैठक के दौरान दिया। चौबे ने सवाल उठाया कि किसानों को सहकारी समितियों में डीएपी खाद क्यों नहीं मिल रही है, और व्यापारी इसे अधिक दामों में क्यों बेच रहे हैं? उन्होंने कहा कि कई किसान बिना खाद के ही धान की बुवाई करने को मजबूर हैं, और गर्मी की फसल में उपजा धान भी मात्र 1400 रुपए में नहीं बिक रहा। चौबे ने सरकार की कृषि नीति को पूरी तरह “किसान विरोधी” बताते हुए कहा कि सरकार की प्राथमिकताओं में किसान हैं ही नहीं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि छत्तीसगढ़ में नकली खाद का बाजार फैल गया है और जो खाद राजस्थान से आ रहा है उसमें संगमरमर के बुरादे जैसी मिलावट की जा रही है, जिससे किसानों को कोई लाभ नहीं हो रहा। सांसद विजय बघेल ने किया पलटवार पूर्व मंत्री के इन आरोपों पर दुर्ग के भाजपा सांसद विजय बघेल ने पलटवार करते हुए कहा कि वे अपने कार्यकाल को याद करें, जब यूरिया में भारी भ्रष्टाचार होता था। बघेल ने बताया कि मोदी सरकार के कार्यकाल में नीम कोटेड यूरिया लाया गया, जिससे खाद की कालाबाजारी पर रोक लगी और अब पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार लगभग 80% सब्सिडी देकर किसानों को खाद उपलब्ध करा रही है। सांसद बघेल ने आगे कहा कि किसानों के हित में भाजपा सरकार ने 0% ब्याज दर पर ऋण योजना शुरू की थी और वर्तमान में राज्य सरकार किसानों को धान का समर्थन मूल्य 3100 रुपए प्रति क्विंटल दे रही है, साथ ही प्रति किसान 21 क्विंटल तक धान की खरीदी की जा रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार किसानों को अनेक योजनाओं और सुविधाओं के माध्यम से लाभ पहुंचा रही है। चौबे के आरोपों पर कटाक्ष करते हुए बघेल ने कहा, “हमें आईना न दिखाएं, पहले खुद आईने में अपना चेहरा देखें।”


