ट्रेन की एसी कोचों में हमारी सुविधा के लिए ही रेलवे दो चादर, कंबल, टावेल, तकिया और कवर देता है, लेकिन आश्चर्य है कि बहुत सारे यात्री इसे चोरी कर घर ले जा रहे हैं। बाद में इसकी कीमत कोच अटेंडेंट को अपनी सैलरी से चुकानी पड़ती है। रायपुर मंडल से चलने वाली ट्रेनों में हर महीने तीन लाख के सामान की चोरी हो रही है। पिछले तीन सालों में 72 लाख 89 हजार 672 रुपए के सामान की चोरी हुई है। ठेका एजेंसी गाड़ी छूटने से पहले कंबल, चादर, पिलो कवर और फेस टॉवल गिनती करके देता है और वापस लौटने पर पुन: गिनकर जमा करना पड़ता है। यदि सामान कम मिले तो रेलवे उसका रिकॉर्ड रखता है और ठेका एजेंसी पर पेनाल्टी लगाता है। रेलवे हर महीने ठेका एजेंसी पर औसतन तीन लाख की पेनाल्टी लगा रहा है। ठेका एजेंसी अटेंडरों की सैलरी से काटकर पेनाल्टी को पूरा कर रही है। इससे अटेंडरों की मुसीबत बढ़ गई है। यही कारण है कि अटेंडरों ने परेशान होकर यात्रियों को फेस टॉवेल देना बंद कर दिया है। अटेंडरों ने बताया कि नियम में है देना लेकिन चोरी के डर से नहीं देते हैं। यदि कोई यात्री मांगता है तो उसे दिया जाता है। रायपुर मंडल से लंबी दूरी की कुल 14 ट्रेनें चलती हैं। इन ट्रेनों में साल 2023 में 39 लाख और 2024 में 30 लाख रुपए के कंबल, बेडशीट आदि चोरी हुई है। शिकायत होने पर अटेंडेंट को देना पड़ता है 2000 रुपए फाइन रायपुर रेलवे स्टेशन.. गुरुवार दोपहर 4.20 बजे… प्लेटफार्म क्रमांक 4 पर रायपुर-सिकंदराबाद एक्सप्रेस खड़ी है। यात्री चढ़-उतर रहे हैं। एसी कोच के बाहर अटेंडेंट विकास जायसवाल खड़े हैं। मैंने जब बेडशीट-कंबल चोरी के बारे में पूछा तो उनके मन की पीड़ा छलक कर बाहर आने लगी। बताने लगे, ‘ट्रेन के जाने-आने में अब तक 40 बेडशीट, 25 पिलो और 26 फेस टॉवल गायब हो चुके हैं। इस ट्रेन में 8 कोच हैं, लेकिन अटेंडेंट 4 ही हैं। हमारी सैलरी 20 हजार है। ठेकेदार एक बेड सीट का 120, फेस टावल का 45 और पिलो कवर पर 35 रुपए महीने के अंत में काट लेती है। मुश्किल से 10-12 हजार हाथ में आता है। अटेंडेंट आकाश कुमार ने बताया कि यदि यात्री ने रेलवे में शिकायत कर दी कि सामान नहीं मिल रहा है तो दो हजार रुपए फाइन लगता है। साथ में एक सप्ताह के लिए बैठा दिया जाता है। इसकी सैलरी नहीं मिलती। ट्रेन में जाने वाले कर्मचारियों को यात्री को उसके स्टेशन पहुंचने से 15 मिनट पहले समानों को इकट्ठा करने का निर्देश दिया गया है। इसके बाद पूरा लेखा-जोखा करके ट्रेन में ही उसे व्यवस्थित करके रखें। इससे सामान के गायब होने की घटना पर रोक लगाया जा सकता है।
-अवधेश कुमार त्रिवेदी, सीनियर डीसीएम रायपुर मंडल


