डीएपी की कमी दूर करने एनपीके-एसएसपी खाद का वितरण लक्ष्य 4.62 लाख टन बढ़ा

खरीफ मौसम में खाद पर घमासान के बीच सरकार ने साफ कर दिया है कि प्रदेश में रासायनिक उर्वरकों की कोई कमी नहीं है। उर्वरकों के 12.13 लाख टन भंडार में से 7.29 लाख टन का वितरण हुआ है। सहकारी और निजी क्षेत्र में 4.84 लाख टन खाद अभी भी उपलब्ध है। इस बीच डीएपी की कमी को पूरा करने के लिए एनपीके और एसएसपी उर्वरकों के वितरण लक्ष्य में 4.62 लाख टन की बढ़ोत्तरी कर दी गई है। एनपीके के वितरण लक्ष्य में 3.10 लाख टन और एसएसपी के वितरण लक्ष्य में 1.80 लाख टन की वृद्धि कर दी है। खरीफ सीजन में रासायनिक खाद के वितरण का लक्ष्य 14.62 लाख टन से बढ़कर 17.18 लाख टन हो गया है। किसानों को परेशान होने की जरूरत नहीं : सीएम मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि डीएपी खाद की कमी को लेकर किसानों को परेशान होने की जरूरत नहीं है। इसके विकल्प के रूप में एनपीके और एसएसपी की भरपूर व्यवस्था कर ली है। इंदिरा कृषि विश्वविद्यालय के कृषि वैज्ञानिकों और कृषि विभाग के अधिकारियों के सुझाव से किसान डीएपी के बदले दूसरे उर्वरकों का प्रयोग कर बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं। सोसायटियों से किसानों को मांग के अनुसार खाद-बीज मिले, इस पर कड़ी निगाह रखी जा रही है। किसानों की समस्याओं का समाधान हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। यूरिया और एमओपी के लक्ष्य में बदलाव नहीं डीएपी के लक्ष्य को 3.10 लाख टन से घटाकर 1.03 लाख टन किया गया है। वहीं एनपीके का लक्ष्य 1.80 लाख टन से बढ़ाकर 4.90 लाख टन जबकि एसएसपी का लक्ष्य 2 लाख टन को बढ़ाकर 3.53 लाख टन कर दिया गया है। यूरिया और एमओपी के लक्ष्य यथावत है। जैव उर्वरक या फॉस्फेट खाद का उपयोग करें कृषि विशेषज्ञों के अनुसार डीएपी की कमी को दूसरे उर्वरकों के निर्धारित मात्रा का उपयोग से पूरा किया जा सकता है। फसल को नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश सही मात्रा में मिले तो उपज में कमी नहीं आती है। किसान अन्य फॉस्फेट खादों या जैव उर्वरकों का भी उपयोग कर सकते हैं।

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