रांची यूनिवर्सिटी समेत राज्य के विभिन्न विभिन्न विश्वविद्यालयों के अंतर्गत संचालित डिग्री कॉलेजों में इंटरमीडिएट (प्लस टू) की पढ़ाई और एडमिशन पर राज्यपाल द्वारा रोक लगा दी गई है। इसके बाद भी विभिन्न एफिलिएटेड डिग्री कॉलेजों में एडमिशन लेने का मामला प्रकाश में आया है। जेएम कॉलेज भुरकुंडा रामगढ़, जुबली कॉलेज रामगढ़, आनंदा कॉलेज हजारीबाग, निर्मला कॉलेज रांची, गोस्सनर कॉलेज रांची, संजय गांधी कॉलेज रांची समेत अन्य एफिलिएटेड कॉलेजों में एडमिशन लिया जा रहा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के सिलेबस के अनुसार राज्य के सभी विश्वविद्यालयों में 4 वर्षीय स्नातक स्तरीय कोर्सों की पढ़ाई हो रही है। इस नीति के तहत यह स्पष्ट किया गया था कि राज्य के सभी अंगीभूत और संबद्ध कॉलेजों में इंटरमीडिएट (कक्षा 11वीं और 12वीं) की पढ़ाई नहीं होगी। इसका उद्देश्य स्कूली शिक्षा और उच्च शिक्षा के बीच स्पष्ट अलगाव स्थापित करना था। हालांकि राज्यपाल के इस निर्देश के बावजूद राज्य के कई एफिलिएटेड कॉलेजों द्वारा इंटर की पढ़ाई के लिए एडमिशन शुरू कर दिए हैं। बताते चलें कि एनईपी के तहत इंटर कला, विज्ञान और वाणिज्य स्ट्रीम में एडमिशन और पढ़ाई प्लस टू हाईस्कूलों और इंटर कॉलेजों में ही हो सकती है। राजभवन ने सात दिन में मांगा जवाब राजभवन के पत्र के आलोक में विनोबा भावे विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. चंद्र भूषण शर्मा ने राज्य के सभी अंगीभूत और एफिलिएटेड कॉलेजों से तीन दिनों में रिपोर्ट मांगी है। इसमें कहा है कि एनईपी में डिग्री कॉलेजों में इंटर की पढ़ाई पर रोक है। इस नीति के प्रावधानों के प्रतिकूल एडमिशन लिया जा रहा है। एफिलिएटेड कॉलेजों में एडमिशन लिए जाने के विरोध में हाईकोर्ट में याचिका लगाने की तैयारी चल रही है। वित्त रहित संघर्ष मोर्चा के रघुनाथ सिंह, मनीष कुमार समेत अन्य ने कहा है कि डिग्री कॉलेजों में इंटर में एडमिशन पर रोक है। इसके विरोध में शीघ्र ही याचिका दायर करेंगे। एनईपी के तहत इंटरमीडिएट में रोक के बाद भी एडमिशन लिए लिए जाने की कई वजह हैं। एफिलिएटेड कॉलेज राजभवन के निर्देश के आलोक में विवि प्रशासन द्वारा जारी निर्देश को गंभीरता नहीं लेते हैं। दूसरा कारण राजस्व का हो सकता है। इंटरमीडिएट के छात्रों से मिलने वाली फीस कई कॉलेजों के लिए आय का एक महत्वपूर्ण स्रोत है। एनईपी 2020 के प्रावधानों की अनदेखी कर डिग्री कॉलेजों में एडमिशन लिए जाने पर राजभवन गंभीर है। संयुक्त सचिव अर्चना मेहता ने राज्य के चार विवि को पत्र लिखकर एक सप्ताह में जवाब मांगा है। इसमें विनोबा भावे विश्वविद्यालय हजारीबाग, कोल्हान विश्वविद्यालय चाइबासा, सिद्धो-कान्हू मुर्मू विवि दुमका और निलंबर-पिताबंर विवि मेदिनीनगर शामिल हैं।


