कांकेर जिले में होम गार्ड्स की टीम बिना जोखिम भत्ता, बीमा या मुआवजे के लोगों की जान बचाने में जुटी है। मानसून की पहली बारिश में ही उत्तर बस्तर कांकेर की नदियां उफान पर आ गई हैं। जिले में 22 प्रशिक्षित जवानों की विशेष टीम 24 घंटे अलर्ट मोड पर रहती है। नगर सेना कमांडेंट एसके मिश्रा के मुताबिक, सूचना मिलते ही टीम तुरंत घटनास्थल पर पहुंच जाती है। टीम के पास सीमित संसाधन हैं। इनमें 32 लाइफ जैकेट, 40 लाइफ बॉय, 14 ड्रैगन टॉर्च, एक मोटर बोट और कुछ रस्से व रेनकोट शामिल हैं। हालांकि, ये संसाधन जिले के 7 ब्लॉकों में फैली दो दर्जन से अधिक नदियों और नालों के लिए पर्याप्त नहीं हैं। अधिकारियों के अनुसार इस साल कुछ नए उपकरण मिले हैं, लेकिन आवश्यकताएं अभी भी पूरी नहीं हुई हैं। जलस्तर बढ़ने पर हादसे बढ़ जाते है कई बार स्थिति ऐसी भी बनती है जिसमें चारों ओर से नदियों से घिरे इस जिले में जलस्तर बढ़ने पर लोग अक्सर फंस जाते हैं। ऐसी स्थिति में होम गार्ड्स की टीम राहत और बचाव कार्यों में तुरंत जुट जाती है। ‘पीड़ितों को बचाना हमारा काम के साथ कर्तव्य है’ बचाव दल के सदस्य गोपेश कुमार साहू ने बताया कि डर तो लगता है, लेकिन अगर कोई डूब रहा है, तो उसकी जान बचाना हमारा कर्तव्य है। हमारे पास सीमित संसाधन हैं, लेकिन हम अपनी जान की परवाह किए बिना दूसरों की जान बचाते हैं। जिले में 66 गांव ऐसे हैं जिन्हें बाढ़ संभावित क्षेत्र के रूप में चिन्हित किया गया है, इनमें से 36 गांव ऐसे हैं जहां बारिश में पहुंचना नामुमकिन हो जाता है, ये गांव टापू बन जाते हैं। ना बीमा, ना भत्ता फिर भी कर रहे है काम बता दें कि इन बहादुर जवानों को न तो जोखिम भत्ता मिलता है, न कोई बीमा सुविधा। अगर ड्यूटी के दौरान कोई हादसा हो जाए, तो उनके परिवार को कोई मदद नहीं मिलेगी। शहर का दूध नदी दिखाता है रौद्र रूप शहर की दूध नदी भी हर साल रौद्र रूप दिखाती है। नगर के कई वार्ड जैसे महादेव वार्ड, सुभाष वार्ड, और शांति नगर को बाढ़ संभावित क्षेत्र घोषित किया गया है। कलेक्टर नीलेश कुमार क्षीरसागर ने बाढ़ से निपटने की पूरी तैयारी करने के निर्देश दिए हैं। जिला कलेक्ट्रेट में कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है और तैराक दलों की सूची तैयार की गई है।


