किसानों को पेस्टीसाइड से होने वाले दुष्परिणामों के बारे में जानकारी देने तथा और फसल की गुणवत्ता व आय में इजाफा करने के लिए एमडीएच परिवार की ओर से जागृति अभियान चलाया जा रहा है। एमडीएच के सुरेश राठी ने बताया कि ‘मेरे गांव की मिट्टी’ शुद्ध उगाओ, शुद्ध खिलाओ थीम पर गांव-गांव जनजागरण किया जा रहा है। अब तक करीब 50 से अधिक गांवों में अभियान के तहत किसानों को पेस्टीसाइड का कमतर उपयोग करने के लिए जागरूक किया जा चुका है। पूरे नागौर जिले समेत देशभर में अभियान चलाया जाएगा। एमडीएच के प्रतिनिधि सुरेश राठी ने बताया कि एमडीएच उन किसानों को बाजार भाव से अतिरिक्त मूल्य देगा, जिनकी उपज विदेशी बाजार और देश के तय बाजार के मानकों के अनुसार पेस्टीसाइड का न्यूनतम उपयोग करेंगे। आईपीएम क्वालिटी का जीरा सामान्य जीरे के मुकाबले 15 फीसदी अधिक और मेथी पत्ता बाजार मूल्य के मुकाबले 20 फीसदी अधिक दर पर खरीदेंगे। आईपीएम ग्रुप के चेयरमैन राजीव गुलाटी के निर्देशन में नागौर में फसल खरीद के समय पेस्टीसाइड टेस्ट की सुविधा को ध्यान में रखते हुए पेस्टीसाइड टेस्ट लैब स्थापित करने की तैयारी चल रही है। इसके लिए राजस्थान सरकार, जिला प्रशासन और आईसीएआर से कॉर्डिनेट किया जा रहा है। फील्ड मैनेजर रूपा मेहता ने बताया कि 50 गांवों में करीब 3000 से ज्यादा किसानों को जागरुकता अभियान का हिस्सा बनाया है। अभियान के तहत किसानों के खेताें में जाकर उन्हें पेस्टीसाइड का कम से कम उपयोग करने और देशी कीटनाशक तरीकों के बारे में बताया जा रहा है। हमें विश्वास है कि जल्द ही नागौर ही नहीं पूरा राजस्थान पेस्टीसाइड मुक्त होगा। शरद राठी ने बताया कि एमडीएच पहले से ही मिनीमम पेस्टीसाइड मसालों को ही प्रोसेस करता है। पेस्टीसाइड को टेस्ट करने के लिए लैब और नई तकनीक की आवश्यकता है, जिस पर कंपनी काम कर रही है। कंपनी जल्द ही नागौर में लैब स्थापित करेगी, ताकि किसानों के उत्पाद की गुणवत्ता की जांच नागौर में ही हो सके और सही माल का बाजार भाव से ज्यादा आर्थिक लाभ मिले। अभियान पूरे देश के किसानों को पेस्टीसाइड से होने वाले दुष्परिणामों से अवगत करवा रहा है। कृषि वैज्ञानिक खेतों में पहुंच कर किसानों की समस्याएं सुन रहे हैं और उन्हें बिना पेस्टीसाइड के अच्छी गुणवत्ता वाली फसल के उत्पादन के आसान तरीके बता रहे हैं। सुरेश मनचंदा ने बताया कि 2023-24 में भारत से मसालों का कुल निर्यात 4.46 अरब डॉलर का हुआ है, सरकार और मसाला इंडस्ट्री के सहयोग से ये कारोबार 2030 तक 20 अरब डॉलर का हो सकता है। लेकिन इसके लिए भारतीय मसालों की गुणवत्ता बनाए रखने की जरूरत है, जिसमें पेस्टीसाइड न्यूनतम काम में लिया गया हो। राजस्थान में जीरा, लालमिर्च, धनिया, मेथी दाना, मेथी पत्ता की बेहतरीन फसल होती है। किसान भी चाहते हैं कि उसके उत्पाद विदेशी बाजारों में उचित कीमत पर बिकें। गौरतलब है कि 5 दिसंबर को दिल्ली में केन्द्रीय कृषि राज्यमंत्री भागीरथ चौधरी ने ‘मेरे गांव की मिट्टी’ जागरुकता अभियान की शुरुआत की थी। लगभग 20 दिन में नागौर के 50 से अधिक गांवों में अभियान के तहत किसानों को जागृत किया गया है।


