केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 10 जुलाई को रांची में रहेंगे। वे राजधानी के होटल रेडिसन ब्लू में होने वाली 26वीं पूर्वी क्षेत्रीय परिषद की बैठक की अध्यक्षता करेंगे। इस उच्चस्तरीय बैठक को लेकर राज्य सरकार ने तैयारियां पूरी कर ली हैं। इस महत्वपूर्ण बैठक के मद्देनजर सोमवार को केंद्रीय गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव मनोज केजरीवाल ने रांची पहुंचकर तैयारियों का जायजा लिया। सुरक्षा को देखते हुए शहर में ट्रैफिक व्यवस्था में भी आंशिक बदलाव किया गया है। इस बैठक को लेकर प्रशासनिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर गहमागहमी है। बैठक में झारखंड, बिहार, ओडिशा और पश्चिम बंगाल के प्रतिनिधि शामिल होंगे। बैठक के दौरान राज्यों के बीच आपसी समन्वय, लंबित मामलों और विकास योजनाओं को लेकर विमर्श होगा। बैठक में 4 राज्य के 68 प्रतिनिधि होंगे शामिल पूर्वी क्षेत्रीय परिषद की इस बैठक में कुल 68 प्रतिनिधि शामिल होंगे। झारखंड से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर, भू-राजस्व मंत्री दीपक बिरुवा, मुख्य सचिव अलका तिवारी, गृह विभाग की प्रधान सचिव वंदना दादेल और डीजीपी अनुराग गुप्ता मौजूद रहेंगे। बिहार सरकार की ओर से मंत्री विजय चौधरी और सम्राट चौधरी हिस्सा लेंगे। ओडिशा से मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी, उपमुख्यमंत्री पार्वती परीदा और मंत्री मुकेश महालिंग शामिल होंगे। पश्चिम बंगाल की ओर से मंत्री चंद्रिका भट्टाचार्य प्रतिनिधित्व करेंगी। केंद्र से झारखंड मांगेगा बकाया राशि और अनुदान जानकारी के मुताबिक इस बैठक में झारखंड सरकार अपनी ओर से कई विषयों को रख सकती है। इनमें सबसे अहम है केंद्र से लंबित बकाया राशि की मांग। राज्य सरकार कोयला कंपनियों से 1.36 लाख करोड़ रुपए, जल जीवन मिशन के तहत 6,000 करोड़ रुपए और विधवा एवं वृद्धा पेंशन योजना के लिए 300 करोड़ रुपए की बकाया राशि की मांग करेगी। इसके अलावा, उग्रवाद प्रभावित और सुदूरवर्ती क्षेत्रों में विकास कार्यों के लिए विशेष केंद्रीय सहायता की मांग फिर से उठाई जाएगी। एसआरई फंड की बहाली और अन्य लंबित मुद्दों पर भी होगी चर्चा बताया जा रहा है कि राज्य सरकार पूर्व में उग्रवाद प्रभावित 14 जिलों में बंद कर दिए गए एसआरई फंड को पुनः शुरू करने की मांग भी बैठक में रखेगी। यह फंड सुरक्षा और विकास के लिए अत्यंत आवश्यक माना जाता है। बैठक में झारखंड-बिहार और झारखंड-पश्चिम बंगाल के बीच लंबित मामलों पर भी बातचीत होगी। बिहार के साथ परिसंपत्ति और देनदारी के बंटवारे और बंगाल के साथ जल बंटवारे को लेकर भी अहम चर्चा होनी है। इसके साथ ही, 26वीं बैठक की अब तक की प्रगति रिपोर्ट यानी एटीआर की समीक्षा भी एजेंडे में शामिल है।


