मैनपाट में आयोजित भाजपा के तीन दिवसीय प्रशिक्षण शिविर को लेकर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने भाजपा सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने इस आयोजन को सरकारी खर्च पर पिकनिक बताया । साथ ही उन्होंने राज्य में किसानों की बदहाली, बारिश से जलमग्न बस्तियों और शिक्षा व्यवस्था पर सरकार को घेरा है। दीपक बैज ने कहा कि भाजपा के तीन दिवसीय प्रशिक्षण सत्र में डेढ़ साल के भ्रष्टाचार पर ही चर्चा करनी पड़ी। खुद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और अन्य नेताओं ने राज्य सरकार को नसीहत दी। यह प्रशिक्षण शिविर नहीं बल्कि मस्ती की पाठशाला” थी, जहां पूरी सरकार मौज-मस्ती में लिप्त रही। उन्होंने कहा, जिस सरगुजा संभाग में शिविर हुआ, वहीं खदानों के लिए सरकार जंगल कटवा रही है लेकिन इस पर कोई चर्चा नहीं हुई। किसान परेशान, सरकार बेफिक्र” बैज ने कहा कि मानसून सक्रिय है, लेकिन सोसायटियों में अब तक खाद-बीज नहीं पहुंचा है। किसानों को खातू और उर्वरक की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है, जिससे खरीफ फसलों की बुआई प्रभावित हो रही है। बैज ने आरोप लगाया कि सरकार जानबूझकर खाद की किल्लत पैदा कर रही है ताकि उत्पादन घटे और उसे समर्थन मूल्य पर कम धान खरीदना पड़े। 30 लाख मीट्रिक टन धान खुले में भीग गया प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि सरकार अभी तक पिछले साल खरीदे गए धान का सही तरीके से भंडारण और निराकरण नहीं कर पाई है।30 लाख मीट्रिक टन से अधिक धान प्रदेश के संग्रहण केंद्रों में खुले में पड़ा है, जो मानसून की बारिश में भीग चुका है। उन्होंने कहा “ये राज्य की जनता के टैक्स से खरीदा गया धान है, जिसे सरकार की लापरवाही बर्बाद कर रही है।” निचली बस्तियों में जलभराव, राहत कार्य नदारद” प्रदेश में लगातार हो रही भारी बारिश से प्रदेश के कई शहरों की निचली बस्तियां जलमग्न हो चुकी हैं। दीपक बैज ने कहा कि सरकार पूरी तरह मैनपाट में व्यस्त थी, जबकि जनता बारिश का कहर झेल रही थी। कांग्रेस की मांग है कि तत्काल राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया जाए और प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जाए। शिक्षा विभाग में भारी अव्यवस्था, शिक्षक नहीं किताब नहीं दीपक बैज ने प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था पर भी बैज ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि युक्तियुक्तकरण के चलते एक-एक शिक्षक को पांच-पांच कक्षाएं पढ़ानी पड़ रही हैं। नया शिक्षा सत्र शुरू हुए एक महीना हो गया, लेकिन बच्चों को अब तक पाठ्यपुस्तकें नहीं मिली हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा—”जब शिक्षा विभाग मुख्यमंत्री के पास है, तब ऐसी दुर्दशा बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।”


