निगम जोन ऑफिस में प्रदर्शनकारियों का हंगामा…VIDEO:पचपेड़ी नाका चौक का नाम बदलने के विरोध में जोहरा छत्तीसगढ़ पार्टी और छत्तीसगढ़ी समाज ने सौंपा ज्ञापन

रायपुर के पचपेड़ी नाका चौक का नाम बदलकर “संत गेलाराम गोदड़ी वाला चौक” करने के विरोध में नगर निगम रायपुर के प्रस्ताव का विरोध तेज हो गया है। बुधवार को जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी और छत्तीसगढ़ी समाज और छत्तीसगढ़ी क्रांति सेना ने इस प्रस्ताव को अस्मिता के खिलाफ एकपक्षीय फैसला बताते हुए नगर निगम रायपुर के जोन 10 कार्यालय का घेराव किया। इस दौरान बड़ी संख्या में छत्तीसगढ़ी क्रांति सेना के कार्यकर्ता जोन कार्यालय के बाहर पहुंचे। इस दौरान पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने जमकर नारेबाजी करते हुए जोन अध्यक्ष और नगर निगम प्रशासन के खिलाफ विरोध जताया। पचपेड़ी नाका सिर्फ नाम नहीं, अस्मिता का प्रतीक जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी और छत्तीसगढ़ी क्रांति सेना का कहना है कि “पचपेड़ी नाका चौक” रायपुर की एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान है। पार्टी नेताओं ने चौक का नाम बदलने को स्थानीय और छत्तीसगढ़ी जनभावनाओं पर हमला बताया। पार्टी के पदाधिकारियों ने कहा कि यह निर्णय स्थानीय लोगों की सहमति के बिना लिया गया, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ है। छत्तीसगढ़ी समाज ने बताया एकपक्षीय और असंवैधानिक निर्णय छत्तीसगढ़ी समाज के पदाधिकारियों ने जोन 10 कमिश्नर को ज्ञापन सौंपा और पचपेड़ी नाका का नाम बदलने के प्रस्ताव की तत्काल वापसी की मांग की। उन्होंने कहा कि नगर निगम रायपुर का पत्र (क्रमांक 277/नग.नि./जोन-10/2025-26) 2 जुलाई 2025 को चौक के नाम बदलने की सूचना दी गई है। छत्तीसगढ़ी समाज ने इस निर्णय को एकपक्षीय, असंवैधानिक और छत्तीसगढ़िया अस्मिता के विरुद्ध बताया है। समाज का कहना है कि पचपेड़ी नाका चौक एक प्राचीन और ऐतिहासिक नाम है, जो छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान, सामाजिक परंपराओं और स्थानीय इतिहास से गहराई से जुड़ा हुआ है। ऐसे नाम बदलना स्थानीय संस्कृति और अस्मिता का अपमान करना है। ​​​​​ आंदोलन की चेतावनी ज्ञापन में कहा गया कि यदि नगर निगम ने यह प्रस्ताव वापस नहीं लिया, तो छत्तीसगढ़ी समाज आने वाले दिनों बड़ा आंदोलन करेगी। वहीं, समाज के पदाधिकारियों ने नगर निगम से मांग की है कि भविष्य में ऐसे किसी भी निर्णय से पहले स्थानीय संगठनों और जनता से विचार-विमर्श जरूरी करे। इसलिए पड़ा पचपेड़ी नाका नाम पचपेड़ी नाका के नाम को लेकर दैनिक भास्कर ने वरिष्ठ इतिहासकार रामेन्द्रनाथ मिश्र से बातचीत की। उन्होंने बताया कि रायपुर शहर में आने के लिए चार नाके बनाए गए थे। जिनमें आमानाका, पुरानी बस्ती, लाखेनगर नाका, रिसाला नाका था। स्थानीय लोग पहले उस क्षेत्र को पचपेड़ी कहते थे, इसलिए उसका नाम पचपेड़ी नाका पड़ा। मिश्र ने बताया कि ऐसी संभावना वयक्त की जाती है कि उस स्थान पर पहले पांच पेड़ हुआ करते थे, इसलिए स्थानीय लोग लोकल बोलचाल में उसे पचपेड़ी कहने लगे। जैसे आमानाका क्षेत्र में पहले आम के पेड़ बड़ी संख्या में थे, इसलिए उसका नाम आमानाका पड़ा। रायपुर में अंग्रेजों के समय शहर को चारों दिशा से जोड़ने के लिए चार नाके थे, उनमें से एक पचपेड़ी नाका भी है। सन 1867 में रायपुर को नगर पालिका का दर्जा मिला था। नगर पालिका के पुराने कार्यालय के चार कोनों में चार नाके भी बनाए गए थे।

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