‘जब उसे पहली बार देखा तो पेट में गुदगुदी सी हुई। बेचैन सा हो गया था। रात में नींद नहीं आती थी। मुझे एक तरफा प्यार हो गया था। वैसे तो मैं बहुत हिम्मत वाला हूं, लेकिन जब प्यार का इजहार करने की बारी आई तो डर क्या होता है उस दिन पता चला। फिर भी हिम्मत जुटा कर उसे प्रपोज कर दिया। वो नाराज हुई। उस समय जवाब नहीं दी। 2 महीने बाद उसका जवाब आया और कहा- ओके…ये रिश्ता मुझे मंजूर है। फिर हम दोनों के बीच आंखों ही आंखों से इशारा शुरू होने लगा। साथी नक्सली छेड़ने लगे। बात संगठन के लीडरों तक पहुंची। हमने शादी करने की बात रखी। मेरी नसबंदी करवाई, फिर 2019 में हमारी शादी कर दी।’ हंसते-हंसते अपने प्यार के बारे में बताता ये शख्स नक्सली अमित बारसा (26) है। नक्सलियों के पोलित ब्यूरो मेंबर और डेढ़ करोड़ रुपए के इनामी वेणुगोपाल का ये सुरक्षा गार्ड था। लेकिन, बुधवार 9 जुलाई 2025 को पत्नी अरुणा लेकाम (26) (नक्सली) के साथ इसने सरेंडर कर दिया। अब कहता है, मोहब्बत जिंदगी जीने के लिए की थी। वहां जंगल में सिर्फ मौत है। दोनों ने एक साथ छोड़ा हिंसा का रास्ता जिंदगी जीने और परिवार बढ़ाने के लिए दोनों ने हिंसा का रास्ता छोड़ दिया। काली वर्दी उतार दी, हथियार छोड़ दिए। अब खेती-किसानी कर गुजर-बसर करेंगे। दरअसल, सरेंडर नक्सली अमित सुकमा जिले के जगरगुंडा इलाके का रहने वाला है। इसकी पत्नी अरुणा लेकाम बीजापुर जिले के एक गांव की रहने वाली है। अमित नक्सल संगठन में DVCM कैडर का था। इस पर 8 लाख रुपए का इनाम घोषित था। जबकि इसकी पत्नी ACM कैडर की थी। ये 5 लाख रुपए की इनामी नक्सली थी। अमित कहता है- मेरी मां अकेली है। पिता, भाई, बहन कोई नहीं हैं। जब 12-13 साल का था तो ACM लिंगे नक्सल संगठन में भर्ती करने मुझे ले गई। वहीं हथियार चलाने की ट्रेनिंग दी। जिसके बाद पहले बस्तर के अलग लोकेशन में मुझे भेजा गया। फिर अबूझमाड़ और महाराष्ट्र के गढ़चिरौली भेजा। मेरा प्रमोशन किया गया और नक्सली लीडर वेणुगोपाल के सुरक्षा गार्ड में शामिल किया गया। ज्यादातर अबूझमाड़ और गढ़चिरौली बॉर्डर पर ही थे। इसी बीच साल 2019 से पहले गढ़चिरौली में एक पार्टी मीटिंग के दौरान अरुणा से मुलाकात हुई। हिम्मत जुटाकर किया प्रपोज अमित ने बताया कि, पहली नजर में ही वो मुझे पसंद आ गई। वो नक्सल संगठन की मीटिंग के दौरान खाने का बंदोबस्त करना, गांव-गांव से सामान लाने का काम करती थी। मैं किसी न किसी तरह से उससे बात करने की कोशिश करता था। वहीं जब भी उस तरफ जाना होता था तो अरुणा से जरूर मिलता था। हालांकि, तब तक उसे नहीं पता था कि मेरे मन में उसके लिए फीलिंग्स है। दोनों पैरेंट्स बनना चाहते थे, लेकिन नसबंदी करवा दी गई वहीं एक दिन बहुत हिम्मत जुटाया और उसे प्रपोज कर दिया। वो हैरान रह गई। कुछ दिनों तक बात भी नहीं की।लेकिन दो महीने के बाद उसने रिश्ता कबूल कर लिया। यदि पति-पत्नी दोनों नक्सली हैं तो नक्सल संगठन में पैरेंट्स बनने की इजाजत नहीं है। साल 2019 में मेरी नसबंदी करवाई गई। फिर दोनों ने शादी कर ली। हालांकि, दोनों पैरेंट्स बनना चाहते थे। वहीं पिछले 2 साल से लगातार पुलिस का एक्शन बढ़ रहा है। जिससे नक्सली काफी दबाव में हैं। लगातार एनकाउंटर हो रहे हैं। वे मरना नहीं चाहते थे इसलिए हथियार डालने का मन बनाया। फिर दोनों ने किसी तरह जंगल से भागने का प्लान किया। जिसमें कामयाब भी हुए। 9 जुलाई को दंतेवाड़ा पुलिस के सामने हथियार डाल दिए। अमित ने बताया कि वो AK-47 हथियार रखता था। उसकी पत्नी भी इंसास, SLR जैसे हथियार चलाती थी। ‘परिवार बढ़ाने के लिए नसबंदी खुलवाउंगा’ अमित ने कहा कि, सरेंडर तो कर दिया हूं। अब परिवार बढ़ाने के लिए, बच्चे के लिए मैं अपनी नसबंदी खुलवाऊंगा। मैं DRG में नहीं जाना चाहता। बस पत्नी के साथ गांव में रहकर खेती-किसानी करना चाहता हूं। खुशहाल जीवन चाहता हूं। अमित ने बताया कि वो और उसकी पत्नी किसी भी मुठभेड़ में शामिल नहीं रहे हैं। कौन है नक्सली वेणुगोपाल दरअसल, वेणुगोपाल तेलंगाना का रहने वाला है। वर्तमान में यह नक्सलियों के पोलित ब्यूरो मेंबर के पद पर है। इसकी उम्र करीब 65 से 70 के बीच है। बसवा राजू के एनकाउंटर के बाद उसकी जगह महासचिव पद के लिए वेणुगोपाल का नाम सुर्खियों में है। अमित करीब 10 साल तक वेणुगोपाल का ही सुरक्षा गार्ड था। …………………….. इससे जुड़ी खबर भी पढ़ें… चांदामेटा, जहां मर्द घर से निकले तो नक्सली मार देते:बच्चों को बंदूक-बम की ट्रेनिंग, जानिए कैसा था नक्सलियों का सबसे बड़ा ट्रेनिंग सेंटर ‘गांव में 10-15 नक्सली हमेशा घूमते रहते थे। वे हथियार लेकर चलते थे। हमें बाजार भी जाना होता था, तो उनसे पूछकर जाते थे। अगर कोई उन्हें बिना बताए गांव से बाहर चला जाता, तो उसे पुलिस का मुखबिर बताकर पीटते थे। पढ़ें पूरी खबर…


