रेशमा रात 11 बजे घर लौटी थी, टोकने पर विवाद हुआ था, हत्या के बाद आरोपी शव के साथ सोए

भास्कर न्यूज़| लुधियाना हत्या के बाद हत्यारोपी घबरा गए थे। बेटे को हत्याकांड की जानकारी न मिले, इसके लिए प्लान बनाया। रात में हत्या के बाद आरोपी सास-ससुर सो गए और सुबह तड़के जल्दी उठे। इसके बाद उन्होंने शव को ठिकाने के लिए बोरी की व्यवस्था की। शव को बोरी में पैक किया और उसे बांध दिया। बुधवार सुबह अजय कुमार पुत्र मेवा (निवासी लखनऊ) को फोन कर बुलाया गया। कृष्ण और अजय ने रेशमा का शव सफेद चादर में लपेटकर बोरी में डाला था ताकि किसी को शक न हो। रेशमा का ससुर कृष्ण सिक्योरिटी गार्ड की वर्दी में था ताकि किसी को उन पर शक न हो। जैसे ही बाइक सवारों ने पुलिस नाका देखा था वे घबरा गए। उन्होंने आरती चौक के पास डिवाइडर पर बोरी फेंक दी। लोगों के विरोध करने पर कहा था कि इसमें आम के छिलके हैं। जब बोरी खोलने को कहा गया तो वह बाइक छोड़ मौके से फरार हो गए। एसएचओ अमरजीत सिंह ने बताया कि रात को ससुर कृष्ण व रेशमा के बीच विवाद हुआ। देर आने पर ससुर ने बहू रेशमा से पूछा कि वह क्यों देर से आती है, जिस पर रेशमा ने जवाब दिया कि मेरी मर्जी है और मेरी निजी लाइफ है, इसमें दखलंदाजी न करें। इसे लेकर ससुर ने रेशमा से हाथापाई की। रेशमा ने शोर मचाया तो सास दुलारी ने दरवाजा बंद कर दिया। फिर रेशमा के पैर पकड़ लिए और ससुर ने उसका गला दबा दिया। डेढ़ महीने पहले यहां आए थे, जिसके चलते उनका परिचय अजय से था। अजय उत्तर प्रदेश का रहने वाला है और उनका रिश्तेदार था। अजय को हत्या की जानकारी लग गई थी। आरोपियों ने अजय को रेशमा की हत्या की बात बता दी थी। ^सुबह सैर से लौटा तो मकान के बाहर एक बोरी पड़ी थी, जिसे देखकर लगा किराएदारों ने सामान रखा है, लेकिन जब वायरल वीडियो देखी तो मुझे शक हुआ। पुलिस को सूचना दी। जो सिक्योरिटी गार्ड बोरी फेंकने आया, वह और कोई नहीं बल्कि रेशमा का ससुर कृष्ण ही था। कृष्ण और उसकी पत्नी दुलारी ने करीब एक महीने पहले मेरे मकान में कमरा लिया था, लेकिन पुलिस वेरिफिकेशन नहीं कराया था।क्योंकि उन्होंने 10 दिन के बाद ही कमरा बदलने की बात कही थी।- मनोज कुमार, मकान मालिक, जैसा भास्कर को बताया सास हत्या के बाद सामान शिफ्ट कर रही थी, दूसरी जगह मकान किराये पर लिया: इंस्पेक्टर अमरजीत सिंह ने बताया कि रेशमा व उसके परिवार वाले लखनऊ में रहते थे। सास-ससुर व बहू एक महीने पहले ही लुधियाना आए थे और महाराज नगर गली नंबर दो में किराये पर कमरा लिया था। 9 जुलाई को एक महीना पूरा हो गया था और महीना पूरा होते ही कमरा नई जगह लेने की बात मकान मालिक से कही। देर रात हत्या के बाद वह अगले दिन सामान शिफ्ट करने में लगे थे। कमरे में सामान भी न के बराबर था। सिर्फ गैस सिलेंडर, कपड़े आदि सामान था। हत्या के बाद सास दुलारी सामान एकत्र कर दूसरी जगह कमरे में शिफ्ट कर रही थी। वह घबराई हुई थी और लगातार आ जा रही थी।

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