भास्कर न्यूज | बालोद सरकारी स्कूल में पार्टी, शिक्षिकाओं को प्रताड़ित करने सहित युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया में मनमानी का आरोप लगने के बाद बसंत बाघ को छग शासन, स्कूल शिक्षा विभाग ने बालोद बीईओ पद से हटाकर प्राचार्य बना दिया है। इस संबंध में छग के राज्यपाल के नाम से व उनके आदेशानुसार स्कूल शिक्षा विभाग के अवर सचिव रामेश्वर प्रसाद वर्मा ने आदेश जारी किया है। जारी आदेश अनुसार बसंत बाघ को बालोद विकासखंड शिक्षा अधिकारी पद से हटाकर शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय अरकार में अटैच कर प्राचार्य बनाया गया है। वहीं मोहिनी यादव को प्रभारी बीईओ पद की जिम्मेदारी दी गई है। जिलेभर में पहली बार ऐसी स्थिति बनी, जब महिला को बीईओ पद की जिम्मेदारी दी गई है। मोहिनी यादव बालोद में ही एबीईओ पद की जिम्मेदारी संभाल रहीं थीं। शासन स्तर से दोनों के नवीन पदस्थापना को लेकर प्रशासनिक दृष्टिकोण का जिक्र किया गया है। युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया के बाद बाघ दूसरे बीईओ हैं, जिसको विकासखंड शिक्षा अधिकारी पद से हटाया गया है। इसके पहले डौंडी बीईओ जयसिंह भारद्वाज को दुर्ग संभाग के आयुक्त सत्य नारायण राठौर ने छत्तीसगढ़ सिविल सेवा नियमों के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबित किया था। युक्तियुक्तकरण को लेकर बसंत बाघ की मनमानी की शिकायत शिक्षकों व संघ पदाधिकारियों ने रायपुर स्तर पर किया था। आरोप है कि जानबूझकर बदला लेने की भावना से कई शिक्षकों को युक्तियुक्तकरण में प्रभावित किया। …अनुशंसा व राज्यपाल का अनुमोदन था सीएम की अनुशंसा व राज्यपाल का अनुमोदन के बाद अवर सचिव ने बसंत बाघ का तबादला किया है। ऐसे में अब तक हाई कोर्ट के स्टे से बीईओ पद पर बैठे बाघ को प्राचार्य पद की जिम्मेदारी संभालने की नौबत आएगी। विभाग के अफसरों का कहना है कि मार्च माह में तत्कालीन कलेक्टर ने बीईओ बसंत बाघ को हटाकर गुंडरदेही के एक स्कूल में प्राचार्य पद पर अटैच किया था। जिसके बाद उन्होंने हाई कोर्ट में याचिका लगाई थी। हाई कोर्ट ने बसंत बाघ के पक्ष में फैसला सुनाया था क्योंकि कलेक्टर को पोस्टिंग करने का अधिकार नहीं है लेकिन इस बार राज्य शासन स्तर से तबादला हुआ है। इस लिहाज से हाई कोर्ट से राहत मिलने की उम्मीद कम है। शिक्षिकाओं ने प्रताड़ना की शिकायत की थी बेलमांड स्कूल में पदस्थ शिक्षकों ने बसंत बाघ के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। प्राचार्य नरेश मंडावी विशेष रूप से उन्हें जीव विज्ञान प्रायोगिक कक्ष को उपलब्ध कराते थे। स्कूल में पार्टी आयोजित की जाती थी, उपहार दिए जाते थे। इस दौरान महिला कर्मचारियों को प्रताड़ित किया जाता था। शिकायत के बाद जिला के बजाय संभागीय स्तर पर मामले की जांच हुई। शिक्षा विभाग दुर्ग संभाग के संभागीय संयुक्त संचालक ने दो सदस्यीय जांच दल गठित कर जांच कराई। जांच प्रतिवेदन में बसंत बाघ को प्रथम दृष्टया दोषी पाया गया। तत्कालीन कलेक्टर ने आदेश में स्पष्ट किया था कि शिक्षा विभाग में अनुशासनहीनता किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।


