राजधानी के बीरगांव इलाके में रहने वाली दामिनी सेन जन्म से ही दिव्यांग हैं। उनके दोनों हाथ नहीं हैं। लेकिन ऐसा कोई काम नहीं जो दामिनी नहीं कर सकती। 27 साल की दामिनी ने बिना हाथों के ही स्कूलिंग, ग्रेजुएशन, पोस्ट ग्रेजुएशन और अब नेट क्वालिफाई कर लिया है। लिखना-पढ़ना घर का बाकी काम, खाना बनाना जो भी काम हो दामिनी पैरों से ही करती है। वो कहती है जो मेरे पास नहीं उसका गम नहीं, जो है उसी को ताकत बनाकर जिंदगी जी रही हूं। दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करती हूं। दामिनी की जुबानी… सब-कुछ खोकर भी, सब-कुछ पाया दामिनी… कभी खुद को अपाहिज नहीं मानती। जो लोग मुझे अपाहिज समझते हैं मैं उनकी सोच को अपाहिज मानती हूं। वो कहते हैं न पहली गुरु मां होती है, उसी तरह मेरी भी गुरु मेरी मां ही है। बचपन से ही मेरी मां (माधुरी सेन) ने भी मुझे आत्मनिर्भर बनना सिखाया है। उन्होंने ही मुझे पैरों से लिखना सिखाया। इसके बाद धीरे धीरे मैंने पैरों से ही सब काम करना शुरू कर दिया। जब मैं पहली बार स्कूल गई तो क्लास के बच्चे मुझसे बात नहीं करते थे, मुझे पत्थर फेंककर मारते थे। पैरों से पुस्तक निकालना, लिखना यह देख बाकी बच्चे कहते थे तुझे पाप पड़ेगा। लेकिन मैं रुकी नहीं। आज मैं इसी पैर से अपने भगवान की पूजा करती हूं। स्कूल में मेरी बहन वंदना मेरी मदद करती थी। घर में भाई, मां और पिताजी भी मदद करते थे। मैं आज अपना हर काम खुद करती हूं। म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट्स बजाना, पढ़ना, पेंटिंग, मोबाइल-लैपटॉप में काम करना सभी मैं पैरों से ही करती हूं। पैरों के सहारे ही मैंने नेट एग्जाम क्लियर किया है। मैं अब यूपीएससी क्लियर करना चाहती हूं। इन सबका पहला श्रेय मेरी मां को ही जाता है। उसके बाद मेरे परिवार को जिन्होंने मुझे कभी कमजोर नहीं समझा। प्रधानमंत्री ने कहा था, तुम्हारी राइटिंग मुझसे भी बेहतर है दामिनी को पढ़ाई के साथ म्यूजिक और पेंटिंग का भी शौक है। दामिनी ने अपने पैरों से एक घंटे में 38 पेंटिंग बनाकर वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया है। दामिनी ने बताया कि उस प्रतियोगिता में एक घंटे में 30 पेंटिंग बनाने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन दामिनी ने एक घंटे में 38 पेंटिंग बनाई। उन्होंने बताया कि वह पैर के अंगूठे और अंगुली के बीच स्केच पेन फंसाकर पेंटिंग बनाती हैं। दामिनी को अमेजिंग इंडिया फॉर यंग इंडियंस बिग अचीवमेंट से 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सम्मानित भी किया। उन्होंने दामनी से कहा था कि तुम्हारी हैंडराइटिंग मेरी हैंडराइटिंग से भी अच्छी है। बेटी हुई तो सबने कहा-अशुभ है, माता-पिता नहीं माने दामिनी की मां माधुरी और पिता प्रेमदास ने बताया कि उनके घर में जब बेटी पैदा हुई तो लोग कहने लगे अशुभ है, उसके दोनों हाथ नहीं हैं। प्रेमदास चपरासी की नौकरी करते थे। घर की आर्थिक स्थिति भी अच्छी नहीं थी। लेकिन हमने खुद को संभाला। हमारी बेटी स्कूल में काफी होशियार रही। 10वीं में उसने 80 फीसदी अंक लाकर सभी को हैरान कर दिया था। ग्रेजुएशन के बाद पोस्ट ग्रेजुएशन और फिर 2023 में उसने नेट भी क्वालिफाई कर लिया


