कार और बाइक के मनचाहे नंबर वालों के लिए अच्छी खबर है। अगर उनकी मनचाहे या फैंसी नंबर वाली बाइक-कार कंडम या पुरानी हो चुकी है। उसका रजिस्ट्रेशन खत्म हो गया है और अगर वाहन चालक वही नंबर नई गाड़ी में लेना चाहते हैं तो ये सुविधा अब मिल सकेगी। इसके लिए वाहन मालिकों को कंडम वाहन को नष्टीकरण के दस्तावेज परिवहन विभाग को उपलब्ध कराने होंगे। उसके बाद निर्धारित शुल्क अदा कर वे पुरानी गाड़ी के नंबर अपने नए वाहन में ले सकेंगे। अभी तक ज्यादा पैसे देकर च्वाइस नंबर लेने वालों की गाड़ी जब पुरानी होती थी तो उन्हें नए नंबर के लिए फिर वही प्रक्रिया करनी पड़ती थी। कई बार निर्धारित शुल्क अदा करने के बाद भी उन्हें वही नंबर नहीं मिल पाता था, क्योंकि अब च्वाइस नंबर बोली के आधार पर आवंटित किए जाते हैं। राज्य शासन के नए निर्णय के बाद वाहन मालिकों को नीलामी प्रक्रिया के बिना ही उनका पुराना च्वाइस नंबर मिल जाएगा। शुक्रवार को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में मंत्रालय में मंत्रि-परिषद की बैठक इस बारे में निर्णय लिया गया। अफसरों ने बताया कि पुराने वाहन का च्वाइस नंबर नए वाहन में लेने के लिए गाड़ी मालिक को अपने पुराने वाहन का विधिपूर्वक पंजीयन निरस्त करवाना होगा। बैठक के बाद सचिव, परिवहन एवं परिवहन आयुक्त एस. प्रकाश और डी. रविशंकर ने बताया कि ये जानकारी भी दी गई है कि यदि पुराना नंबर सामान्य था तो भी वाहन स्वामी आवश्यक शुल्क भुगतान कर संबंधित परिवहन कार्यालय से वही नंबर प्राप्त कर सकता है। परिवहन विभाग पेट्रोल पंपों में वाहन प्रदूषण जांच केंद्र खोलने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए तैयारी शुरू कर दी गई है। शुक्रवार को परिवहन मुख्यालय में पेट्रोल पंप मालिकों की बैठक बुलाकर उन्हें इस बारे में जानकारी दी गई। दूसरे राज्यों में वाहन बेचे तो भी ले सकते हैं च्वाइस नंबर च्वाइस नंबर वाली गाड़ी अगर वाहन मालिक ने किसी दूसरे राज्य में बेच दी है और उस गाड़ी में च्वाइस नंबर तो वाहन मालिक यहां नए वाहन में फिर वही नंबर ले सकते हैं। अफसरों के अनुसार किसी दूसरे राज्य में वाहन बेचने पर उसका पंजीयन नंबर बदल जाता है और उसी राज्य की सीरीज का नंबर अलॉट होता है। ऐसी दशा में वाहन मालिक को वही नंबर लेने के लिए उस राज्य की एनओसी लानी होगी। पैन-आईआईटी की मदद से गरीब युवा, महिलाओं का कौशल विकास युवाओं को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए कौशल के साथ विदेशी भाषा सिखाई जाएगी। प्रदेश के आदिवासी, गरीब, युवा, महिला आैर थर्ड जेंडर के कौशल विकास के लिए प्रदेश सरकार आैर पैन-आईआईटी मिलकर प्रयास करेंगे। शुक्रवार को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में राज्य कैबिनेट ने वंचित लोगों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए एक गैर लाभकारी कंपनी के गठन का फैसला लिया। युवाओं, महिलाओं और आदिवासियों का कौशल विकास करने के साथ-साथ उन्हें विदेशी भाषा भी सिखाई जाएगी। ताकि वे विदेशों में काम करने के योग्य बन सकें। ज्वाइंट वेंचर कंपनी पूरे प्रदेश में वंचित समुदायों के विकास के लिए आदिवासी उपयोजना और अनुसूचित जाति उपयोजना की बची राशि को खर्च करेगी। इसके जरिए लोगों की आजीविका के अवसर बढ़ाए जाएंगे। साथ ही उनकी सामाजिक और आर्थिक स्थिति में भी बदलाव के लिए काम किया जाएगा। कौशल विकास के प्रशिक्षकों को भी पैन-आईआईटी द्वारा प्रशिक्षण दिया जाएगा। पैन आईआईटी द्वारा प्रशिक्षण देने के लिए जिला प्रशासन और विभागों द्वारा आवश्यक शासकीय भवनों का पहचान कर ज्वाइंट वेंचर कंपनी को हस्तांतरित किया जाएगा। अवैध प्लाटिंग रोकने संशोधन विधेयक का प्रारूप मंजूर
मंत्रिपरिषद द्वारा छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता संशोधन विधेयक 2025 के प्रारूप का अनुमोदन किया गया। इससे नक्शा बंटवारे और अभिलेखों को आसानी से अप-टू-डेट किया जा सकेगा। इससे अवैध प्लाटिंग पर रोक लगाने में भी मदद मिलेगी। साथ ही जियो-रेफरेंस मैप के उपयोग से भविष्य में जमीन से जुड़े विवादों में भी कमी आएगी। नामांतरण की प्रक्रिया आसान होगी। भूमि धारक की मृत्यु पर संयुक्त खाताधारकों और वारिसों को नामांतरण में सहूलियत होगी।


