हेल्थ रिपोर्टर | रांची राजधानी के एक होटल में शनिवार को ‘रांची कैंसर समिट’ का आयोजन हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने समिट को स्वस्थ और सशक्त झारखंड की दिशा में उठाया गया एक महत्वपूर्ण प्रयास बताया। उन्होंने कहा कि यह समिट कैंसर के इलाज में आ रही तकनीकी प्रगति और चिकित्सा क्षेत्र में हो रहे बदलावों को साझा करने का एक प्रभावशाली मंच है। राज्यपाल ने इस बात पर भी जोर दिया कि झारखंड देश के उन चुनिंदा राज्यों में शामिल है जहां इम्यूनोथेरेपी जैसे आधुनिक उपचार को सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं के दायरे में शामिल किया गया है, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को भी फायदा मिल रहा है। कार्यक्रम में स्वास्थ्य सचिव अजय कुमार सिंह, देशभर के कैंसर विशेषज्ञ डॉक्टर, मेडिकल संस्थानों के प्रतिनिधि व अन्य उपस्थित थे। स्वास्थ्य सचिव ने कैंसर से जुड़ी चिंताजनक स्थिति को सामने रखते हुए कहा कि राज्य में हर साल 14,000 से 16,000 नए कैंसर मरीज सामने आते हैं। इनमें से 60% मामलों में बीमारी की पहचान स्टेज-3 या 4 में होती है, जिससे इलाज जटिल और महंगा हो जाता है। उन्होंने बताया कि झारखंड में ओरल कैंसर (38%), सर्वाइकल कैंसर (16%) और ब्रेस्ट कैंसर के मामले सबसे अधिक दर्ज किए जाते हैं। इस चुनौती से निपटने के लिए सरकार ने शुरुआती जांच और स्क्रीनिंग को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता में शामिल किया है। रांची कैंसर समिट ने कैंसर से जुड़ी जागरूकता, उपचार और तकनीकी सहयोग पर गहन विमर्श का अवसर दिया। सर्वाइकल कैंसर की स्क्रीनिंग शुरू करने की तैयारी : सभी पीएचसी, सीएचसी व आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में जल्द ओरल, ब्रेस्ट और सर्वाइकल कैंसर की स्क्रीनिंग शुरू करने की तैयारी है। स्क्रीनिंग के बाद मरीजों का डेटा पोर्टल पर अपलोड कर उच्चस्तर पर रेफर किया जाएगा। समिट के आयोजक और मणिपाल के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. सतीश शर्मा ने कहा कि रांची कैंसर समिट झारखंड में कैंसर के खिलाफ एक सुनियोजित और सशक्त प्रयास है। हम चाहते हैं कि जागरूकता, ट्रीटमेंट और रिसर्च तीनों स्तर पर झारखंड आगे बढ़े। स्वास्थ्य सचिव ने समिट में कई महत्वपूर्ण योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा पांच मेडिकल कॉलेज (धनबाद, जमशेदपुर, हजारीबाग, पलामू, दुमका) में जल्द आंकोलॉजी विभाग खोला जाएगा। बताया गया कि रांची सदर अस्पताल देश का दूसरा बड़ा सरकारी कैंसर इलाज केंद्र बन चुका है। आयुष्मान भारत, मुख्यमंत्री आरोग्य योजना, गंभीर बीमारी योजना व ईएसआई सभी योजनाओं में कैंसर इलाज शामिल किया गया है। उन्होंने जानकारी दी कि पिछले साल कैंसर इलाज पर सरकार ने 42 करोड़ रुपए खर्च किए है।


