कार्रवाई:15000 सिम और एक हजार मोबाइल को भी कराया ब्लॉक ताकि इससे दोबारा न हो ठगी

राजधानी में पिछले कुछ महीनों में हुए 78 ठगी के मामलों की जांच के दौरान चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। ठगों ने फ्रॉड के लिए 6000 म्यूल अकाउंट का उपयोग किया है। इसमें ठगी के 40 करोड़ रुपए का ट्रांजेक्शन किया गया है। इसके लिए ठगों ने 15000 सिम और 1000 मोबाइल हैंडसेट का उपयोग किया गया। पुलिस ने ठगी का पूरा पैसा होल्ड करा दिया। खाता, सिम और मोबाइल के आईएमईआई नंबर को भी ब्लॉक कराया दिया, ताकि कोई इन खातों, मोबाइल और फोन नंबर का दोबारा किसी घटना में उपयोग न कर सकें। यहां तक पीड़ितों को 4 करोड़ रुपए वापस कराया है। 36 करोड़ रुपए वापसी की प्रक्रिया चल रही है। वह भी कोर्ट के आदेश से पीड़ितों के खाते में जमा हो जाएगा। महिला से 58 लाख की ठगी
रायपुर की बुजुर्ग महिला एमवीएसएस लक्ष्मी को 14 नवंबर 2024 को मनी लॉड्रिंग केस में नाम आने का झांसा देकर ठगों ने डिजिटल अरेस्ट कर दिया। ठगों ने उनसे 58 लाख की ठगी की। जसविंदर सिंह समेत कई को गिरफ्तार किया गया। इसमें 120 से ज्यादा खातों का उपयोग हुआ था। शेयर का झांसा, 11 लाख ठगे
रिटायर डॉ. प्रकाश गुप्ता को शेयर मार्केट में निवेश पर मुनाफे का झांसा देकर नंवबर 2024 में 11 लाख की ऑनलाइन ठगी की गई। पुलिस ने 200 खातों की जांच की। ये सब म्यूल अकाउंट थे। दिल्ली के पवन कुमार और गगन दीप को गिरफ्तार किया गया। 12 राज्यों में ठगों के खिलाफ ऑपरेशन, 320 गिरफ्तार
पुलिस ने 12 राज्यों में पिछले एक साल के भीतर साइबर फ्रॉड को लेकर ठगों के खिलाफ बड़ा ऑपरेशन चलाया है। लगातार 25 घंटे के ऑपरेशन के बाद 100 लोगों को गिरफ्तार किया है। इस तरह एक साल के भीतर 320 लोगों को गिरफ्तार किया है। इसमें छत्तीसगढ़ के 240 आरोपी हैं। जबकि 80 आरोपियों को राजस्थान, गुजरात, पंजाब, पं. बंगाल, उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश, बिहार, झारखंड, महाराष्ट्र, आंध्रप्रदेश और दिल्ली से गिरफ्तार किया गया है। इसमें तीन विदेश आरोपी नाइजीरियन भी शामिल हैं। बैंक कर्मी से लेकर सिम कार्ड बेचने वालों को भी पुलिस ने गिरफ्तार किया है।
पहले फोन नंबर ब्लॉक कराते थे अब मोबाइल हैंडसेट भी ब्लॉक
अब तक पुलिस सिम(फोन नंबर) को ब्लॉक कराती थी, लेकिन ठगी के बढ़ते हुए मामलों को देखते हुए घटना में उपयोग हुआ मोबाइल (हैंडसेट) भी ब्लॉक करा रही है। सॉफ्टवेयर में मोबाइल का आईएमईआई नंबर अपलोड किया जा रहा है। उससे मोबाइल हैंडसेट भी ब्लॉक हो रहा है। अगर कोई भी सिम उसमें लगया जाता है तो जांच एजेंसी को इसकी जानकारी मिल जाती है। ठगी की घटना में उपयोग होने वाले एक-एक खातांे को बंद किया जा रहा है। एसएसपी डॉ. लाल उमेद सिंह ने बताया कि साइबर क्राइम व फ्रॉड के मामले की जांच रेंज साइबर पुलिस और साइबर सेल की संयुक्त टीम काम कर रही है। खाते और सिम ब्लॉक जरूरी
^ किसी भी घटना में ठगों का खाता और सिम जरूर ब्लॉक कराएं, ताकि उन खातों और सिम को दोबारा उपयोग न कर सके। लेकिन इससे ज्यादा पुलिस का फोकस आरोपी को पकड़ने पर होना चाहिए। गिरोह में शामिल एक-एक व्यक्ति को पकड़ें और पीड़ितों को पैसा लौटाएं।
– मुकेश चौधरी, एक्सपर्ट साइबर क्राइम म्यूल खातों में आ रही कमी
^ पुलिस की कार्रवाई से रायपुर में म्यूल अकाउंट संबंधित शिकायतें कम हुई। पिछले साल तक भारत सरकार से 350-360 खातों की जानकारी आती थी, जिसमें ठगी के पैसों को लेन-देन होता था। लेकिन अब यह संख्या घटकर 80-100 हो गई है। इसे भी धीरे-धीरे कम किया जा रहा है।
अमरेश मिश्रा, आईजी

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