सुप्रीम कोर्ट ने बदला पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट का फैसला:पति द्वारा चुपके से की गई पत्नी की कॉल रिकॉर्डिंग वैध; ये गोपनीयता का उल्लंघन नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट के फैसले को बदल दिया है। इस गया है है कि पति द्वारा चुपके से रिकॉर्ड की गई पत्नी की टेलीफोनिक बातचीत को पारिवारिक अदालत में वैध एविडेंस के रूप में स्वीकार किया जा सकता है। कोर्ट ने इस मामले में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के उस फैसले को रद्द कर दिया जिसमें कहा गया था कि ऐसे रिकॉर्डिंग “निजता के अधिकार का स्पष्ट उल्लंघन” है और इसे एविडेंस के रूप में नहीं माना जा सकता। जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने कहा कि वैवाहिक संबंधों में गुप्त रूप से की गई रिकॉर्डिंग भी उस स्थिति में स्वीकार्य है जब वह किसी वैवाहिक विवाद, जैसे कि तलाक या क्रूरता के आरोपों, से संबंधित हो। सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियां: बठिंडा की पारिवारिक अदालत से जुड़ा मामला यह मामला पंजाब के बठिंडा की पारिवारिक अदालत में तलाक की कार्यवाही से जुड़ा है जहां पति ने पत्नी की टेलीफोन रिकॉर्डिंग एक सीडी के रूप में अदालत में पेश की थी, ताकि मानसिक क्रूरता को सिद्ध किया जा सके। पत्नी ने हाईकोर्ट में इसे चुनौती दी थी। हाईकोर्ट की जस्टिस लीसा गिल ने इसे निजता का उल्लंघन मानते हुए सीडी को एविडेंस मानने से इनकार कर दिया था और इसे खारिज कर दिया था। हाईकोर्ट के तर्क सुप्रीम कोर्ट का फैसला कोर्ट ने ये भी कहा कि अगर विवाह उस स्तर पर पहुंच चुका है जहां पति-पत्नी एक-दूसरे की जासूसी कर रहे हैं, तो यह पहले ही रिश्ते के टूटने का संकेत है। ऐसे में यह कहना कि रिकॉर्डिंग घरेलू शांति को प्रभावित करेगी, टिकाऊ तर्क नहीं है। याचिकाकर्ता का तर्क याचिकाकर्ता के वकील अंकित स्वरूप ने तर्क दिया कि निजता का अधिकार पूर्ण नहीं है और उसे अन्य कानूनी अधिकारों के साथ संतुलित किया जाना चाहिए। यह रिकॉर्डिंग मानसिक क्रूरता के आरोप को सिद्ध करने का तरीका है, क्योंकि ऐसे मामलों में गवाहों या लिखित प्रमाणों की अनुपस्थिति सामान्य है। फैमिली कोर्ट्स एक्ट, 1984 की धाराएं 14 और 20 अदालतों को लचीलापन देती हैं कि वे ऐसे एविडेंस को स्वीकार करें जिससे सच्चाई सामने आ सके।

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