शिक्षा निदेशालय के सामने मंत्रालयिक संवर्ग की डीपीसी एवं काउंसलिंग की मांग को लेकर शिक्षा विभागीय कर्मचारी संघ का अनिश्चितकालीन धरना गुरुवार को 53वें दिन भी धरना जारी रहा। दरअसल, वित्त विभाग द्वारा मंत्रालयिक कर्मचारियों के पदों के नए नॉर्म्स मई 2017 में निर्धारित कर सभी विभागों को नए पद स्वीकृत 1 अप्रैल 2017 से प्रभावी किए गए। लेकिन शिक्षा विभाग ने पूर्व में उक्त नव स्वीकृत प्रशासनिक अधिकारी एवं संस्थापन अधिकारी के पदों की डीपीसी 1 अप्रैल 2017 से नही कर 6 फरवरी 2018 से की गई। जिससे 1 अप्रैल 17 से 6 फरवरी 2018 के मध्य सेवानिवृत्त हुए कर्मचारियों को डीपीसी से बाहर कर दिया गया। विभाग द्वारा गलत डीपीसी किए जाने से कर्मचारियों की मांग पर नियमानुसार उक्त पद 1 अप्रैल 17 से माने जाने के निर्देश वर्ष 2021 में जारी किए गए जिसकी पालना में निदेशक माध्यमिक शिक्षा ने 20 मई 2024 को उक्त नव स्वीकृत पदों को वर्ष 2018-19 के स्थान पर वर्ष 2017-18 से माने के निर्देश दिए। लेकिन अभी तक प्रशासनिक अधिकारी एवं संस्थापन अधिकारी की रिव्यु डीपीसी 1 अप्रैल 2017 से नहीं हो पाई है। जिसे कार्मिकों में नाराजगी है। संगठन के प्रदेशाध्यक्ष कमल नारायण आचार्य ने बताया कि इन दोनों पदों की डीपीसी के साथ लोक सेवा आयोग 1986 से चयनित वरिष्ठ कार्मिकों को वंचित रखने एवं तीन सन्तान मामले में कोर्ट एवं शासन के निर्णय के विरूद्ध विभाग द्वारा की गई 2023-24 की नियमित डीपीसी को संशोधित करने की मांग के साथ ही इसकी उच्च स्तरीय जांच एवं दोषियों को दण्ड देने की मांग को लेकर धरना जारी है।


