जल जीवन मिशन:फिर लीपापोती… नल से जल योजना में 6500 गांव की डीपीआर जांचने के लिए सिर्फ 80 घंटे

मप्र में खटाई में पड़ी 6500 गांवों में हर घर में नल से जल देने की योजना में लापरवाही बरतने वालों पर कार्रवाई के बजाए लीपापोती की तैयारी कर ली गई है। ऐसा इसलिए, क्योंकि 6500 एकल ग्राम योजनाओं की पुनरीक्षित स्वीकृति के लिए तैयार की गई डीपीआर का परीक्षण केवल 15 दिन में पूरा करना है। चार परिक्षेत्र के लिए चार समिति बनाई गई हैं। इन 15 दिनों में पांच सरकारी अवकाश निकाल दें तो हर समिति को औसतन 1625 योजनाओं का परीक्षण करना होगा। ऐसे में 8 घंटे की दर से दस दिन में समितियां करीब 4800 मिनट भी काम करें तो उन्हें एक गांव में परीक्षण के लिए महज 3 मिनट मिलेंगे। इन तीन मिनट में ही समितियां पहले की गलत योजनाएं बनाने वालों की जिम्मेदारी भी तय करेंगी। 18 दिसंबर को जारी आदेश के तहत पुनरीक्षित योजना परीक्षण समिति इन योजनाओं की जांच पूरी कर अपनी रिपोर्ट 2 जनवरी तक ईएनसी पीएचई के पास सबमिट करेगी। यह आदेश अवर सचिव पीएचई शैलेष जैन ने जारी किया है। इसमें 13 नवंबर को मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक का भी जिक्र किया गया है। बता दें कि दैनिक भास्कर ने बुधवार को ‘जल जीवन मिशन अधूरा, राज्य का भी और बजट देने से इनकार’ शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था। इसमें बताया था कि कैसे मप्र के 6500 गांवों में हर घर तक ‘नल से जल’ योजना अधर में लटक गई है। समिति की ये जिम्मेदारियां… कैसे होगा क्रियान्वयन ऐसे तो बगैर फील्ड पर जाए ही बनेगी रिपोर्ट
सूत्रों का कहना है कि प्रदेशभर के 6500 गांवों में हुई प्लानिंग की जांच इतने कम दिनों में ठीक से होने की संभावना नजर नहीं आती। इसका मतलब यह है कि समितियों को बगैर फील्ड में जाए ही लीपापोती वाली रिपोर्ट पेश करनी पड़ेगी।

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