अब 150 किमी में तय हो रहा रामानुजगंज-अंबिकापुर सफर:खराब सड़कों और बारिश ने बढ़ाई मुसीबत, पुलिया पर बह रहा पानी, रामचंद्रपुर-सनवाल मार्ग बंद

छत्तीसगढ़ के बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में इन दिनों राष्ट्रीय राजमार्ग 343 की बदहाल स्थिति और लगातार हो रही बारिश ने लोगों की परेशानियों को और भी बढ़ा दिया है। खराब सड़कों, गहरे गड्ढों और पुल-पुलियों पर बहते पानी ने आम जनता के लिए रामानुजगंज से अंबिकापुर तक के रास्ते को मुसीबतों भरा सफर बना दिया है। सड़क में गड्ढे, जिम्मेदार बेपरवाह स्थानीय लोगों का कहना है कि रामानुजगंज से बलरामपुर और अंबिकापुर जाने वाला राष्ट्रीय राजमार्ग भारी बारिश के कारण गड्ढों से छलनी हो गया है। चारपहिया वाहन हर दिन इन गड्ढों में फंसकर खराब हो रहे हैं, और दुर्घटनाएं भी आम हो चुकी हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग विभाग के अधिकारी सड़क सुधारने में कोई रुचि नहीं ले रहे, जबकि हालात दिन पर दिन बिगड़ते जा रहे हैं। बसें लेट, एम्बुलेंस फंस रही, मरीज परेशान लोगों ने बताया कि इस मार्ग से गुजरने वाली यात्री बसें 2 से 4 घंटे तक लेट हो रही हैं। समय पर न पहुंच पाने के कारण यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सबसे चिंताजनक स्थिति एम्बुलेंस सेवा की है, जो गड्ढों में फंस रही हैं और गंभीर मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाना मुश्किल हो गया है। गड्ढों से बचने को लोग बदल रहे रास्ता, दूरी बढ़ी इलाके के व्यापारी संजय गुप्ता का कहना है कि पहले रामानुजगंज से अंबिकापुर की दूरी 110 किमी थी। लेकिन सड़क की हालत खराब होने के कारण अब लोग प्रतापपुर या वाड्रफनगर होकर जा रहे हैं, जिससे दूरी 130 से 150 किलोमीटर तक पहुंच गई है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब देश में सड़कें दूरी कम करने के लिए बनती हैं, तो यहां दूरी क्यों बढ़ रही है? पुलिया पर पानी, रामचंद्रपुर-सनवाल मार्ग पूरी तरह बंद इधर, लगातार बारिश के कारण हालात और बिगड़ गए हैं। कुरसा नदी में जलस्तर इतना बढ़ गया कि पानी पुलिया के ऊपर से बहने लगा। सोमवार सुबह 8:30 बजे से रामानुजगंज-रामचंद्रपुर-सनवाल मुख्य मार्ग पूरी तरह बंद हो गया। दोनों ओर सैकड़ों वाहन और लोग फंसे हुए हैं, जो पानी कम होने का इंतजार कर रहे हैं। ऑफिस, स्कूल और जरूरी काम पर असर इस मार्ग से प्रतिदिन लोग ऑफिस, स्कूल और बाजार जाते हैं। रामचंद्रपुर में कई सरकारी दफ्तर हैं, लेकिन रास्ता बंद होने से कर्मचारी समय पर कार्यालय नहीं पहुंच पाए। कई शिक्षक भी स्कूल नहीं जा सके, जिससे पठन-पाठन प्रभावित हुआ है। अब 40 किलोमीटर का अतिरिक्त सफर करना पड़ रहा रामचंद्रपुर-सनवाल से रामानुजगंज आने के लिए अब लोगों को 40 किलोमीटर लंबा वैकल्पिक रास्ता अपनाना पड़ रहा है। यह न सिर्फ समय, बल्कि ईंधन और खर्चे दोनों में इजाफा कर रहा है। लोग परेशान, अधिकारी चुप इस पूरे हालात को लेकर स्थानीय लोगों में भारी नाराज़गी है। उनका कहना है कि प्रशासन और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण सिर्फ कागज़ों पर काम कर रहे हैं, जमीनी हकीकत कोई देखने को तैयार नहीं है।

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