विधायक आपस में उलझे…:अध्यक्ष रमन बरसे, कहा- सदन है सड़क नहीं, मर्यादा न तोड़ें

विधानसभा में मंगलवार को प्रश्नकाल में पक्ष-विपक्ष के बीच तकरार में सदन की मर्यादा बार-बार टूटी। तकरार धरमलाल कौशिक के सवाल से शुरू हुई। इस दौरान भाजपा विधायक अजय चंद्राकर और कांग्रेस विधायक देवेंद्र यादव के बीच तीखी बहस हुई। यह इतनी बढ़ी कि सदस्य एक-दूसरे को अमर्यादित शब्दों के साथ और तल्ख लहजे में संबोधित करने लगे। देवेंद्र ने अजय को बैठने तक के लिए कह डाला। इस दौरान दोनों तरफ के सदस्य नारेबाजी करने लगे। मामला बढ़ते देख विधानसभा अध्यक्ष डॉ रमन सिंह ने हस्तक्षेप किया। उन्होंने सदस्यों से आपस में सीधे संवाद नहीं करने का निर्देश दिया। इसके बावजूद 11 बार से ज्यादा बार सदन की मर्यादा टूटीं। सदस्यों ने सीधे एक-दूसरे से सवाल किए। ऐसे शुरू हुआ विवाद… कौशिक ने कूटरचित दस्तावेजों पर कार्रवाई से जुड़ा सवाल किया, मंत्री के जवाब पर बीच में कूदे देवेंद्र यादव सत्ता पक्ष के विधायक धरमलाल कौशिक ने कूटरचित दस्तावेजों से काम प्राप्त करने के मामले में कार्रवाई को लेकर प्रश्नकाल में सवाल पूछा। जवाब में अरुण साव ने बताया कि 12 अनुबंध निरस्त किए गए हैं। मुख्य एजेंसी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। 7 एजेंसियों ने हाई कोर्ट में याचिका दी है। अपेक्स कमेटी की रिपोर्ट को कोर्ट से सेट असाइड किया है। यानी अदालत ने पहले दिए गए आदेश या कार्यवाही को रद्द कर दिया है। अधिकारियों के शामिल होने की कोई शिकायत नहीं मिली है किसी भी अफसर को बख्शने का सवाल ही नहीं है। कौशिक : शासकीय अधिकारी यदि कूटरचित दस्तावेज पेश करता है तो उसपर एफआईआर की जाती है लेकिन एजेंसियों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
साव: मेसर्स विजय वी सालुंखे ने कूटरचित दस्तावेज दिया गया था। उसके खिलाफ एफआईआर की गई है। बाकी 6 एजेंसियों ने जॉइंट वेंचर में 12 एग्रीमेंट किए थे। बाकी 6 लोगों का जो जॉइंट वेंचर में टेंडर हुए थे, उन सबके अनुबंध भी हमने निरस्त किए हैं। हमने उनकी ब्लैक लिस्टिंग के लिए शो काज नोटिस भी जारी किया था। कोर्ट ने उस पर रोक लगाई थी। इसके खिलाफ अपील करने की प्रक्रिया चल रही है।
कौशिक: पिछले सदन में आपने जवाब दिया था कि यदि जहां पर जल का स्रोत नहीं है। यदि जानबूझकर किसी ने इस तरह से काम किए हैं तो 60 %से अधिक भुगतान नहीं किया जाएगा। जबकि 80 % भुगतान किया है जबकि पेयजल नहीं मिल रहा है। साव: 60 % वाला कोई कमिटमेंट नहीं था।
इस पर देवेंद्र यादव ने आपत्ति करते हुए कहा कि यह सदन का कागज है और इसमें मंत्री जी ने साफ कहा है कि मैं स्पष्ट रूप से कहूंगा कि किसी भी ठेकेदार का जब तक काम पूरा नहीं होगा तब तक 70 प्रतिशत से अधिक भुगतान नहीं करेंगे। विभाग गुमराह कर रहा है। साव: मैंने कहा कि 60 % वाली बात नहीं थी। 70 प्रतिशत वाली बात की गई थी।
इस पर अजय चंद्राकर ने देवेंद्र यादव के सदन में बोलने पर आपत्ति की। उन्होंने आसंदी को संबोधित करते हुए कहा कि माननीय अध्यक्ष महोदय ये किस प्रक्रिया के तहत बोलने के लिए खड़े हुए हैं। इसके बाद यादव ने अमर्यादित तरीके से तीखे शब्दों में प्रतिक्रिया दी।
अध्यक्ष के कहने के बाद भी इन विधायकों ने तोड़ी मर्यादा
– ध्यानाकर्षण के दौरान अजय चंद्राकर ने नेता प्रतिपक्ष चरणदास को सीधे संबोधित किया। इसके बाद अजय और कांग्रेस उमेश पटेल भी एक दूसरे पर सीधे संवाद करने लगे।
– केदार कश्यप आपरेशन सिंदूर को लेकर सदन में प्रस्ताव रख रहे थे तो राम कुमार यादव ने टोका टाकी की। इसपर केदार कश्यप ने भी जवाब दिया। शेष|पेज 9
– इस दौरान धर्मजीत सिंह और राम कुमार यादव के बीच सीधा संवाद हुआ।
– रामकुमार यादव पर राजेश मूणत ने भी सीधे सवाल- जवाब किया।
– आपरेशन सिंदूर पर अजय चंद्राकर जब बोलने के लिए खड़े हुए तो राम कुमार यादव और देवेंद्र यादव ने सीधे टिप्पणी की।
– अजय चंद्राकर बोल रहे थे तो अटल श्रीवास्तव और राम कुमार यादव ने सीधे टिप्पणी की।
विधानसभा अध्यक्ष डॉ रमन सिंह के निर्देश –
पक्ष- विपक्ष के सदस्यों के बीच आवेशात्मक अंदाज में संवाद पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ रमन सिंह ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि पूरा छत्तीसगढ़ प्रश्नकाल के महत्व को देखता है। विधानसभा की मर्यादा है, विधानसभा में बोलने का तरीका है। विधानसभा सड़क नहीं है कि आप भाषण देने आ रहे हो। इसलिए मेरा आप सभी सदस्यों से आग्रह है कि विधानसभा की मर्यादा को पूरा प्रदेश और देश देख रहा है। इस प्रकार के लहजे में विधानसभा में बातचीत उचित नहीं है। जो भी विषय है, उसमें अपनी बात को रखें, लेकिन उसमें इस बात का ध्यान रखें कि सदस्य सीधे आपस में बात न करें। आसंदी को देखकर बात करें। एक- दूसरे को देखकर बात करने की यह जगह नहीं है। आसंदी को सीधा संबोधित करिए।

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