सोलर लाइट खरीदने के मामले में अब तक राज्य का सबसे बड़ा घोटाला सामने आया है। फर्जीवाड़ा इतना बड़ा कि जिलों के ग्राम पंचायतों ने अपनी मर्जी से जिस कंपनी से जो चाहा खरीद लिया। बिना जांच के कंपनी को भुगतान भी हो गया। कांग्रेस की सरकार बदलने के बाद जब इसकी शिकायत और इसकी जांच शुरू की गई तो पहली ही रिपोर्ट में साबित हो गया कि 30 करोड़ से ज्यादा की खरीदी बिना किसी दस्तावेजों और परीक्षण के कर ली गई। जांच करने वाली समिति का दावा है कि अधिकतर खरीदी कागजों में की गई। ये जांच रिपोर्ट दैनिक भास्कर के पास मौजूद है। अब इस पूरे मामले में बड़े अफसरों को भी बचाने की कोशिश की जा रही है। खासतौर पर 2020-21 और 2021-22 में बस्तर, जगदलपुर, कोंडागांव और कांकेर में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, ग्रामीण पंचायत और जिला पंचायत में पदस्थ अफसरों के बयान तक नहीं लिए गए। 2020 से 2022 तक सुकमा, बस्तर, जांजगीर-चांपा, कोंडागांव और कांकेर में सौर स्ट्रीट लाइट (स्टैंड अलोन सोलर स्ट्रीट लाइट) की खरीदी करने की योजना बनी। तय किया गया कि इसका पूरा काम छत्तीसगढ़ क्रेडा से कराया जाएगा। लेकिन अफसरों ने इसमें गोलमाल किया। इसे ऐसे समझा जा सकता है कि बस्तर जिले में प्रधानमंत्री आदि आदर्श ग्राम योजना के अंतर्गत चयनित 311 गांवों में 172 में 484 स्ट्रीट लाइटें लगानी थी। इस काम के लिए तत्कालीन सरकार ने तकनीकी स्वीकृति में कार्य का नाम “सोलर स्ट्रीट लाइट” लिखा। लेकिन बाद में जब यह फाइल आगे बढ़ी तो इसी काम को प्रशासनिक स्वीकृति में कार्य का नाम “स्ट्रीट लाइट” लिख दिया गया। यानी जो काम क्रेडा दफ्तर से होना था, वो अब कहीं से भी कराने की आजादी मिल गई। इसके बाद बस्तर के हर जिले में इसी तरह से फर्जीवाड़ा किया गया। सुकमा में भी 33 ग्राम पंचायतों में सौर स्ट्रीट लाइट लगाने के लिए 96.13 लाख मिले। लेकिन खरीदी ग्राम पंचायतों के माध्यम से स्ट्रीट लाइट की कर ली गई।
मामले की जांच के लिए विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने जगदलपुर के विधायक किरण सिंहदेव की अध्यक्षता में विधायकों की एक समिति बनाई है। समिति अभी जांच कर रही है। विधायक लता उसेंडी का आरोप है कि बस्तर संभाग के 7 जिलों बस्तर, कांकेर, दंतेवाड़ा, बीजापुर, नारायणपुर, सुकमा, कोंडागांव और बिलासपुर संभाग में खनिज न्यास निधि और सांसद मद से करीब 100 करोड़ में सेमी इंटीग्रेटेड सोलर लाइट की खरीदी ग्राम पंचायतों से की गई। जो नियमों के खिलाफ है। ग्राम पंचायत ऐसी खरीदी के लिए अधिकृत ही नहीं हैं। इतना ही नहीं एक सेमी इंटीग्रेटेड सोलर लाइट का बिल 45 हजार पेश किया गया, जबकि यही लाइट बाजार में 15 हजार से ज्यादा की नहीं है। जिला क्रेडा की मंजूरी के बिना खरीदी बड़े अफसरों को जांच में छोड़ दिया
प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में केवल निचले अफसरों को निशाना बनाया गया। जिन्होंने अनुमति दी उनका नाम तक नहीं लिया गया। 2020 से 2022 तक बस्तर में डॉ. अय्याज तंबोली, रजत बंसल, चंदन कुमार और विजय दयाराम के कलेक्टर रहे। इनमें से किसी का भी न तो बयान लिया गया और न ही ये जाना गया कि किन अफसरों से इसकी खरीदी कराई गई थी। शुरुआती जांच में केवल तीन लोगों को दोषी मानकर एफआईआर की अनुशंसा की गई। इन पर FIR की सिफारिश 1. पीआर साहू, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जनपद पंचायत अंतागढ़
2. युगल किशोर ध्रुव, उप अभियंता, आरईएस (विद्युत) कांकेर
3. मेसर्स आरबी डीलर्स एंड कंस्ट्रक्शन कोंडागांव पंचायतों ने भी करोड़ों की खरीदी की।


