भास्कर न्यूज |बोकारो थर्मल बोकारो थर्मल में मिथिलांचल की परंपरा से जुड़ी मुधश्रावणी पूजा मंगलवार से आरंभ हो गई। नवविवाहितों के लिए यह पूजा आगामी पंद्रह दिनों तक चलेगी। इसमें नवविवाहिता अपने पति की लंबी आयु की कामना करती है। विवाह के बाद पहले सावन में होने वाली इस पूजा का अलग ही महत्व है। बोकारो थर्मल में भी इस वर्ष कई विवाहित मैथिल नवविवाहितों ने इस पूजा को विधिवत शुभारंभ किया है। परंपरानुसार नवविवाहिता 15 दिनों तक उपवास रखेंगी। दिन में फलाहार के बाद रात में ससुराल से आए अन्न से तैयार भोजन ग्रहण करेंगी। इस पर्व में शाम ढलते की नवविवाहिता नई दुल्हन की तरह सज-संवरकर तैयार होकर सखियों संग हर दिन डाला लेकर फूल लेने को निकलती हैं। पंडित जी की कथा भी काफी ध्यान से सुनती हैं। पूजा के समापन दिन नवविवाहिता के पति फिर से सिंदूर दान करते हैं। मुधश्रावणी पूजा शुरू होने से पहले दिन नाग-नागिन व उनके पांच बच्चे को जो कि मिट्टी के बनाए जाते हैं, साथ ही हल्दी से गौरी बनाने की परंपरा है। इस त्योहार के साथ प्रकृति का भी गहरा नाता है। मिट्टी और हरियाली से जुड़ी इस पूजा के पीछे का आशय पति की लंबी आयु होती है। यह पूजा नव विवाहिताएं अपने मायके में ही करती हैं। पूजा शुरू होने से पहले ही उनके लिए ससुराल से सारा सामान आ जाता है।


