कांग्रेस पर राज्य मंत्री बिट्टू का तंज:बोले-जो अपना दफ्तर नहीं बचा सके वर्करों की कद्र क्या करेंगे

पंजाब के जिला लुधियाना में बीते दिन कांग्रेस के दफ्तर को एक पक्ष ने कोर्ट के आदेशों पर खाली करवा लिया है। बीते दिन पूरा दिन कांग्रेस में दफ्तर में कब्जे को लेकर विवाद चलता रहा। जिसके बाद आखिरकार थाना डिवीजन नंबर 1 के एसएचओ ने स्पष्ट किया कि कोर्ट के आदेश पर दफ्तर खाली करवाया गया है। 25 साल से कांग्रेस ने इस दफ्तर का किराया तक नहीं भरा था। जो पार्टियां इतिहास भूल जाती उनके नामो-निशान खत्म हो जाते-बिट्टू कांग्रेस का दफ्तर खाली होने के बाद केन्द्रीय राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने कांग्रेस पर तंज कसा। बिट्टू ने कहा- जो पार्टियां अपने इतिहास को भूल जाती है उनके नामो-निशान मिट जाते है। आज इसी तरीके से कांग्रेस पार्टी का दफ्तर खाली हो गया है। कांग्रेस पार्टी के वर्करों से मेरा अनुरोध है कि सभी कांग्रेस पार्टी को छोड़ कर जिस किसी पार्टी में जो भी पद मिलता है जाए। आज कांग्रेस का जो दफ्तर खाली हुआ है वहां किसी समय अमर शहीद पूर्व सीएम स्व. बेअंत सिंह बतौर जिला प्रधान, पंजाब प्रधान और सीएम तक बनकर यहां बैठते रहे है। इस दफ्तर में सतपाल मित्तल, जोगिन्द्र पाल पांडे आदि अनेकों शहीदों ने इस दफ्तर को संभाला है। इसी दफ्तर से योजनाएं बनती रही है कि कैसे कांग्रेस को मजबूत करना है। इसी दफ्तर में बैठकर आतंकवाद के साथ लड़ाई लड़ने तक की योजनाएं बनी। कांग्रेस के इस दफ्तर में चार-चार पीढ़ियों ने सेवा की है लेकिन आज बहुत अफसोस हुआ कि आज उस कांग्रेस दफ्तर के भवन का सामान उठाकर बाहर फेंक दिया गया। मैं भी कांग्रेस में सांसद रहा हूं। उस समय भी बातें चलती रही थी कि कांग्रेस का एक अलग से दफ्तर बनाना चाहिए। कांग्रेस में दफ्तर से नहीं बल्कि घरों से चलती पार्टियां आज दुख हुआ कि जो पार्टी अपने दफ्तर को आज नहीं बचा सकी वह वर्करों की क्या कद्र करेगी। पहले भी कांग्रेस के इन नेताओं ने कई बड़े-बड़े घपले किए है। गांधी परिवार ने जो बिल्डिंगें बनाई है उनकी भी जांच चल रही है। आज कांग्रेस के वर्करों का कितना दिल टूटी होगा। इसलिए मैं सभी कांग्रेसियों को कहता हूं कि इस पार्टी में कही कांग्रेसियों की इज्जत नहीं है। आज कांग्रेस दफ्तर से नहीं घरों से चलती है। कांग्रेस आज अलग-अलग हिस्सों में बंट चुकी है। आज भाजपा का दफ्तर देखने योग्य है। हर नेता को कमरे और जगह मिलती है। आज मैंने एक राजनीतिक पार्टी के वर्कर का दुख साझा किया है कि किन कारणों से पार्टियां टूट रही है।

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