बच्चों में रचनात्मक कौशल विकसित करते हुए उन्हें समुदाय के हित में काम करने योग्य बनाने के उद्देश्य से स्कूलों में अब क्लब बनाए जाएंगे। यह तीन स्तरों ‘प्राथमिक, उच्च प्राथमिक और हाई/हायर सेकेंडरी’ पर बनेंगे।
प्राथमिक स्तर पर बालसभा (चिल्ड्रन असेंबली), उच्चतर-माध्यमिक स्तर पर बाल कैबिनेट (चाइल्ड कैबिनेट) एवं हाई-हायर सेकेंड्री स्कूल पर यूथ एवं ईको क्लब तैयार किया जाएगा। स्कूलों में चुनाव के माध्यम से मंत्रिमंडल का गठन किया जाएगा और उनकी भूमिका एवं जिम्मेदारियां बताकर शपथ दिलाई जाएगी।राज्य परियोजना कार्यालय, समग्र शिक्षा के प्रबंधन संचालक ने इसके लिए सभी जिलों के शिक्षा अधिकारियों को दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसका उद्देश्य छात्रों को आपस में जोड़ना, जिम्मेदारियों का निर्वहन सिखाना, विभिन्न सामाजिक एवं शैक्षणिक मुद्दों पर कार्य करना और समुदाय के साथ मिलकर रचनात्मक गतिविधियों से जुड़ना है। इस वर्ष छात्रों को शुरू से ही कुछ जिम्मेदारियां देते हुए उनके अंदर रचनात्मक कौशल विकसित करने और समाज के हित में कार्य करने योग्य बनाने पर जोर दिया गया है। इन्हीं उद्देश्यों की पूर्ति के लिए सभी स्तरों के क्लबों के गठन के लिए सभी जिला शिक्षा अधिकारियों, प्राचार्यों एवं जिला मिशन समन्वयकों को पत्र भेजा गया है। नोडल अधिकारी का चयन और संचालन की जिम्मेदारी
प्राथमिक से लेकर हायर सेकेंडरी तक हर स्तर पर इन क्लबों के संचालन के लिए शाला स्तर पर एक नोडल शिक्षक का चयन किया जाएगा। उन्हें क्लब संचालन की जिम्मेदारी दी जाएगी। नोडल शिक्षक का नाम और मोबाइल नंबर राज्य परियोजना कार्यालय को भेजना अनिवार्य होगा। गठन के बाद स्कूलों को मिलेगा बजट: जिले की सभी शालाओं में क्लब गठन और नोडल अधिकारी की जानकारी प्राप्त होने के बाद ही बजट जारी किया जाएगा। इस प्रक्रिया को जल्द से जल्द पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं और सभी स्कूलों से वीडियो रिकॉर्डिंग भी मंगाई गई है। क्लब के उद्देश्य


