सड़कों पर मवेशी: पांच साल में 166 हादसे, 43 मौतें:हाईकोर्ट ने सरकार से पूछा- कैसे हटाओगे, बताओ; हकीकत-हर सड़क पर मवेशी छोड़ रहे मालिक

बिलासपुर में रतनपुर-केंदा सड़क पर 13 मवेशियों की तेज रफ्तार हाइवा से कुचलकर हुई मौतों पर हाईकोर्ट ने संज्ञान लिया। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा ने स्पेशल डिवीजन बेंच गठित कर मामले की सुनवाई की। इस दौरान सीजे सिन्हा ने सख्त लहजे में कहा कि हाईकोर्ट इस मामले की मॉनिटरिंग कर रहा है, इसके बाद भी लगातार ऐसी घटनाएं हो रही हैं। पहले भी सुनवाई के दौरान नगर निगम से लेकर पंचायतों तक जवाबदेही तय की गई थी, लेकिन अब भी ऐसी घटनाएं होना दुखद है। अब जवाबदेही तय करते हुए संबंधित अफसरों के सर्विस रिकॉर्ड में दर्ज करने को कहना पड़ेगा। इस मामले पर हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव और एनएचएआई के प्रोजेक्ट मैनेजर को शपथ पत्र देने के निर्देश दिए हैं। जनहित याचिका पर हाईकोर्ट के आदेश के बाद केस पर लगातार सुनवाई हुई, जिसमें समय-समय पर मुख्य सचिव को प्रदेश स्तर पर कार्य योजना बनाने के आदेश दिए गए। लेकिन, 10 साल बाद भी व्यवस्था जस की तस है। भास्कर की टीम ने पड़ताल की तो शहर से लेकर नेशनल हाईवे तक जगह-जगह मवेशियों का झुंड बैठा मिला, जिससे हादसे हो रहे हैं, वहीं जिम्मेदार दूर तक नहीं दिखाई दिए, पढ़िए ये ग्राउंड रिपोर्ट:- पहले सिलसिलेवार जानिए घटनाक्रम 14 जुलाई की रात ग्राम बारीडीह के पास अज्ञात वाहन चालक ने लापरवाही पूर्वक तेज रफ्तार से वाहन चालन करते हुए सड़क पर बैठे गौवंश को कुचल दिया, जिससे 13 गोवंश की मौके पर मौत हो गई और 5 गोवंश घायल है जिनका इलाज जारी है। 15 जुलाई को हादसे पर हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए महाधिवक्ता से पूछा कि इन घटनाओं पर लगाम कैसे लगेगी? जिस पर शासन की ओर जवाब के लिए समय मांगा गया। अब इस मामले में आगामी 30 जुलाई को सुनवाई होगी। मवेशी हटाने बनाई गई टीम इस घटना के बाद जिला प्रशासन ने मैदानी अमलों को मवेशियों को सड़कों से हटाने का आदेश दिया है। दावा किया जा रहा है कि मवेशियों के गले में रेडियम लगाए जा रहे हैं। इसके साथ ही जनपद पंचायत से लेकर पंचायत सचिव की टीम बनाई गई है, रात सात बजे से 12 बजे तक सड़कों पर मवेशी हटाएंगे। शहर से नेशनल हाईवे तक मवेशियों का जमावड़ा भास्कर की पड़ताल में 16 जुलाई बुधवार की रात शहर की हर सड़कों पर मवेशियों का जमावड़ा नजर आया। मंगला से उसलापुर सकरी रोड पर जगह-जगह मवेशी बैठे रहे। वहीं, नूतन चौक से सीपत रोड, महाराणा प्रताप चौक से मंगला रोड, महामाया चौक से कोनी रोड, तोरवा से मोपका रोड, गांधी चौक से तोरवा चौक, लिंक रोड, राजेंद्र नगर रोड, नेहरू चौक से मंगला रोड, शनिचरी बाजार रोड, गोड़पारा, बृहस्पति बाजार, चिंगराजपारा में मवेशी सड़कों पर दिखे। मवेशियों के कारण बढ़ रहे सड़क हादसे बारिश के मौसम में जगह-जगह कीचड़ की वजह से मवेशी सूखे जगह की तलाश करते हुए नेशनल हाईवे तक पहुंच जाते हैं, जो रात में सड़कों को महफूज मानकर वहां बैठ जाते हैं। नेशनल हाईवे पर भारी वाहनों की रफ्तार तेज रहती है, जिससे हादसों की स्थिति बनती है। मवेशियों को देखने के बाद भी गाड़ी चालक रफ्तार नियंत्रित नहीं कर पाते और मवेशियों को कुचल कर भाग जाते हैं। बीते हफ्ते रतनपुर रोड में तेज रफ्तार बाइक भैंस से टकरा गई, जिससे बाइक सवार युवक की मौत हो गई। वहीं, बाइक के पीछे बैठा युवक गंभीर रूप से घायल हो गया। रात में कहीं कोई जिम्मेदार नजर नहीं आया दैनिक भास्कर की ग्राउंड रिपोर्ट में शहर के साथ ही आसपास के नेशनल हाईवे का जायजा लिया गया। कुछ जगहों को छोड़कर हर जगह सड़कों पर गोवंश नजर आए। लेकिन, इस दौरान कोई भी जिम्मेदार सड़कों से मवेशी हटाते नहीं दिखे। हालांकि शहर से लगे ग्राम पंचायत ढेका में सचिव सहित कुछ लोग बिलासपुर-रायगढ़ और रायपुर नेशनल हाईवे पर बैठे मवेशियों को खदेड़ते दिखे। सड़क पर मवेशियों के कारण 166 हादसे, 43 की मौत जिले में मवेशियों के कारण पिछले 5 साल में 166 हादसे हुए। इनमें 43 लोगों की जान चली गई। 68 लोग घायल हो गए हैं। वहीं, ऐसे भी हादसे हुए जिनमें बड़ी संख्या में मवेशियों की मौत हो गई। ज्यादातर मवेशी के मालिक हैं फिर भी आवारा छोड़ देते हैं कहा जा रहा है कि शहर यानी नगर निगम सीमा क्षेत्र के साथ ही नेशनल और स्टेट हाईवे पर बैठे ज्यादातर मवेशियों के मालिक हैं। लेकिन, वो जान बूझकर मवेशियों को आवारा छोड़ देते हैं, जो बाहर घूमते रहते हैं। इन्हें रोकने के लिए प्रशासन ने ऐसे मवेशी मालिकों के खिलाफ अब कार्रवाई करने का दावा किया है। हाईकोर्ट ने एडवोकेट जनरल से पूछा- कैसे लगेगी घटनाओं पर रोक वहीं हाइवा से कुचलकर मारे गए 13 मवेशियों को लेकर हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस रमेश कुमार सिन्हा की डिवीजन बेंच ने महाधिवक्ता से पूछा कि इन घटनाओं पर लगाम कैसे लगेगी? जिस पर शासन की ओर जवाब के लिए समय मांगा गया है। हाईकोर्ट ने कहा कि सभी जगह मुख्य सड़कों और हाईवे पर बहुत खतरनाक स्थिति है। अफ़सोस की बात है कि इस तरह के हादसे हो रहे हैं, शासन इन पर रोक लगाने के क्या उपाय कर रहा है? कोर्ट ने महाधिवक्ता से पूछा कि पूर्व में न्यायालय के आदेश पर कितना अमल किया गया है? गायों के मालिकों के खिलाफ एफआईआर हुई है या नहीं? महाधिवक्ता ने बताया कि, इस हादसे में दोषी लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। शासन ट्रैफिक की मानक संचालन प्रक्रिया का पूरा पालन करेगा। उन्होंने शासन की ओर से विस्तृत जवाब देने के लिए कोर्ट से समय देने का अनुरोध किया। जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है। पहली बार गौवंश के मालिकों पर केस दर्ज ग्राम बारीडीह के पास 13 गौवंश के कुचलने से हुई मौत के बाद पहली बार रतनपुर थाने में अज्ञात वाहन चालक के साथ ही मवेशी मालिक पर केस दर्ज किया गया है। पुलिस अफसरों ने यह भी दावा किया है कि भविष्य में इस प्रकार की दुर्घटनाओं को रोकने के लिए संबंधित गांव के सरपंच व कोटवार के साथ मिलकर एक कमेटी बनाई गई है, जो मवेशियों के गले में रेडियम नेक बेंड लगा रहे हैं। मवेशियों को लावारिस छोड़ने वाले पशु मालिकों के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज करने का प्रावधान है। ऐसी स्थिति में अब लापरवाह मवेशी मालिकों के खिलाफ केस दर्ज किया जाएगा। 5 दिन पहले ही हाईकोर्ट ने लगाई थी फटकार 11 जुलाई को हाईकोर्ट ने ​सड़क की खराब स्थिति व मवेशियों के जमावड़े पर स्वतः संज्ञान लेते हुए सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाया था। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की बेंच ने महाधिवक्ता को बुलवाकर कहा था कि सड़कें खराब हैं और मवेशियों के कारण लोग लोग दुर्घटनाग्रस्त हो रहे हैं। यह बहुत पीड़ा जनक है। अगर, कोर्ट न देखे तो क्या सरकार काम ही नहीं कराएगी। कोर्ट ने स्थिति को सुधारने के लिए कहा था। ………………………….. इससे जुड़ी खबर भी पढ़ें… तेज रफ्तार वाहन ने 22 गायों को कुचला…17 मौत:बिलासपुर में सड़क पर बिछे मवेशियों के शव, आवारा मवेशियों को हटाने निर्देशित कर चुका हाईकोर्ट छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में सोमवार की देर रात तेज रफ्तार अज्ञात वाहन ने 22 मवेशियों को कुचल दिया, जिससे 17 गायों की मौत हो गई। 5 मवेशी घायल हैं। गौ-सेवकों ने मामले की शिकायत पुलिस से की है। घटना रतनपुर थाना क्षेत्र की है। पढ़ें पूरी खबर…

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