भास्कर न्यूज|गढ़वा कोरोना काल में स्थापित गढ़वा सदर अस्पताल का हाई लेवल ऑक्सीजन प्लांट देखरेख के अभाव में एक साल से बंद पड़ा है। प्रधानमंत्री केयर्स फंड के तहत वर्ष 2020 में लगभग एक करोड़ की लागत से अस्पताल परिसर में यह प्लांट लगाया गया था, जो प्रति घंटे 500 लीटर ऑक्सीजन उत्पन्न करने में सक्षम था। इस प्लांट से गंभीर मरीजों को त्वरित राहत मिलती थी, लेकिन अब इसकी मशीनें खराब हो चुकी हैं और संचालन ठप है। इतना ही नहीं, उसी दौरान अस्पताल परिसर में पोस्टमार्टम हाउस के पास एक मिनी ऑक्सीजन प्लांट भी लगाया गया था। दोनों ही प्लांट आज जर्जर हालत में पड़े हैं। वजह है न तो ऑपरेटर की नियुक्ति हुई, न ही किसी तकनीकी स्टाफ की व्यवस्था की गई। संचालन के लिए लगाए गए लाखों की लागत वाले हाई पावर डीजल जेनरेटर तक अनुपयोगी साबित हो रहे हैं।2022 में अस्पताल के नए और पुराने भवनों में ऑक्सीजन पाइपलाइन का भी काम कराया गया था। हर बेड तक पाइपलाइन से ऑक्सीजन आपूर्ति की योजना बनाई गई थी, लेकिन जब ऑक्सीजन प्लांट ही काम नहीं कर रहा, तो यह व्यवस्था भी ठप पड़ी है। नतीजा यह है कि आज भी मरीजों को ऑक्सीजन सिलेंडर और कंसंट्रेटर मशीन के सहारे जीवित रखा जा रहा है। अस्पताल में प्रतिदिन 500 से 700 मरीज ओपीडी में इलाज के लिए पहुंचते हैं। इनमें कई ऐसे मरीज होते हैं जिन्हें तुरंत ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है। परंतु अक्सर सिलेंडर खाली मिलते हैं और इसी कारण कई बार मरीजों की जान तक चली जाती है। ऑक्सीजन की कमी से गुस्साए परिजन कई बार अस्पताल में हंगामा भी कर चुके हैं, जिसमें नर्स और डॉक्टरों के साथ धक्का-मुक्की की घटनाएं भी हो चुकी हैं। इसके बावजूद भी विभाग इसे गंभीरता से नहीं ले रहा है। एक सप्ताह के भीतर शुरू िकया जाएगा : सीएस सिविल सर्जन डॉ. जॉन एफ. केनेडी ने बताया कि ऑक्सीजन प्लांट का कंप्रेसर खराब हो गया है, जिसके कारण प्लांट बंद है। संबंधित कंपनी को पत्र भेजा गया था, लेकिन अब तक कोई सुधार नहीं हुआ। अब एक नई कंपनी को पत्र लिखा गया है और आश्वासन दिया गया है कि एक सप्ताह के भीतर कंप्रेसर की मरम्मत कर प्लांट को दोबारा चालू किया जाएगा। उधर लोगों ने कहा िक सवाल यह है कि रखरखाव क्यों नहीं हुआ।


