कोडरमा आरपीएफ ने चाइल्ड ट्रैफिकिंग के एक मामले का खुलासा करते हुए 9 नाबालिग और 5 युवाओं को मानव तस्करों के चंगुल से मुक्त कराया है। इस मामले में दो तस्करों को गिरफ्तार किया गया है, जिनकी पहचान उमेश मुसहर और संतोष मुसहर के रूप में हुई है। फर्जी आधार कार्ड बनवाए थे रेस्क्यू किए गए सभी बच्चे और युवक गांवा थाना क्षेत्र के पांडेयडीह गांव के रहने वाले हैं। जानकारी के अनुसार, तस्कर इन बच्चों और युवाओं को दिल्ली ले जाकर होटलों में काम दिलाने का झांसा दे रहे थे। नाबालिग बच्चों की उम्र 12 से 15 वर्ष और युवाओं की उम्र 18 से 19 वर्ष के बीच है। तस्करों ने नाबालिग बच्चों के फर्जी आधार कार्ड बनवाए थे, जिनमें उम्र अधिक दर्शाई गई थी। प्लेटफॉर्म नंबर एक से किया गया रेस्क्यू आरपीएफ प्रभारी दीपक कुमार ने बताया कि सभी को पुरुषोत्तम एक्सप्रेस से दिल्ली ले जाने की योजना थी और उनके टिकट भी बन चुके थे। कोडरमा स्टेशन के प्लेटफॉर्म संख्या एक पर निगरानी के दौरान सभी को संदिग्ध स्थिति में देख आरपीएफ टीम ने पूछताछ की, जिसमें मामला सामने आया। फुट ओवर ब्रिज के पास 14 नाबालिग बच्चे दो वयस्कों के साथ बैठे दिखे। पूछताछ में बच्चों ने बताया कि ये दोनों उन्हें दिल्ली के होटलों में काम करवाने ले जा रहे हैं। तस्करों ने बच्चों को वेतन के बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी थी। उन्होंने सिर्फ इतना कहा था कि काम के हिसाब से पैसे मिलेंगे और जोखिम भरे काम का ज्यादा भुगतान होगा। तत्परता दिखाते हुए आरपीएफ ने सभी बच्चों और युवाओं का रेस्क्यू कर लिया और उन्हें तिलैया थाना की ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट को सौंप दिया गया।


