भास्कर न्यूज | जालंधर मुस्लिम समुदाय ने कैंटोनमैंट बोर्ड पर जालंधर कैंट स्थित 100 साल पुरानी ईदगाह को छीनने का आरोप लगाया। शनिवार को जालंधर के मुस्लिम समुदाय ने एक मंच पर आकर इसका विरोध जताया। पत्रकार वार्ता के दौरान एडवोकेट नईम खान ने कहा कि पंजाब गुरुओं और पीरों की धरती है, जहां एक दूसरे के धर्म का सम्मान सबसे अहम है, लेकिन कैंटोनमैंट बोर्ड राजनीतिक नेताओं के दबाव में संवैधानिक धार्मिक अधिकारी छीनने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा जिस तरह भाजपा शासित राज्यों में मुस्लिम समुदाय के खिलाफ उनकी धार्मिक धरोहर, मस्जिदों को शहीद किया जा रहा है, उसी तर्ज पर अब पंजाब में भी काम शुरू हो गया है। बता दें कि बीती 17 जुलाई को कैंटोनमेंट बोर्ड ने ईदगाह के बाहर नोटिस चिपकाते हुए 29 जुलाई को पंजाब वक्फ बोर्ड और ईदगाह मैनेजमेंट कमेटी को अपना पक्ष रखने के लिए कहा है। भारत-पाक विभाजन से पहले साल 1909 के करीब अंजुमन इस्लामिया कमेटी की तरफ से इस जगह को ईदगाह के लिए वक्फ किया गया था, तब से यहां मुस्लिम समुदाय के लोग नमाज अदा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मामला सीएम के ध्यान में है। यह वही ईदगाह है,जहां सीएम और दर्जनों कैबिनेट मंत्री, विधायक और भाजपा नेता मुस्लिम समुदाय के साथ ईद की खुशियों में शामिल हो चुके हैं। आम आदमी पार्टी की सरकार में इस 100 साल पुरानी ईदगाह को खाली करवाने की कोशिश की जा रही है। इसे लेकर जालंधर समेत पंजाबभर के मुस्लिम समुदाय में गहरा रोष है। बैठक में मोहम्मद कयूम खान, खुर्शीद अली, दिलशाद, रिजवान, मास्टर तौसीफ, सिकंदर शेख, मोहम्मद इद्रीस, एम.आलम मजाहिरी, जब्बार सलमानी मौजूद थे।


