ठाकुर जी को सर्दी से बचाने के लिए किए उपाय:गृभगृह में लगाई सिगड़ी, आहार और व्यवहार में भी किया बदलाव

भीलवाड़ा में सर्दी का सितम लगातार बढ़ता जा रहा है। ऐसे में भक्तों के साथ-साथ भगवान को भी सर्दी से बचने के लिए तरह-तरह के जतन किए जा रहे हैं। शहर के अनेक मंदिरों में भगवान की प्रतिमाओं पर ऊनी चोला चढ़ाया गया है और उन्हें ऊनी वस्त्र पहनाए गए हैं। ऐसे ही शहर के सांगानेरी गेट स्थित दूधाधारी मंदिर में भी ठाकुर जी को सर्दी से बचाने के लिए विशेष प्रयत्न किए गए हैं। मंदिर के पुजारी कल्याण शर्मा ने बताया कि भगवान हमेशा भाव के भूखे होते हैं, भगवान की भक्ति भाव के साथ की जाती है और इन्हीं भावों के साथ सर्दी से ठाकुर जी को बचाने के लिए मंदिर में तरह-तरह के जतन किए जा रहे हैं। इसके तहत सुबह सवेरे ठाकुर जी को सर्दी से बचाने के लिए सिगड़ी लगाई जाती है ताकि उस सिगड़ी के अंगारों की गर्माहट गर्भगृह में बनी रहे। इसी सिगड़ी पर ठाकुर जी के स्नान के लिए जल को गर्म किया जाता है। स्नान के बाद ठाकुर जी को भोग में कभी कचोरी, कभी समोसे ,कभी खिचड़ी, गर्म वस्तुओं का भोग लगाया जाता है। उनके राजभोग में भी दलिया, चावल आदि ठंडे खाद्य पदार्थों इसकी जगह तिल गुड़ और सर्दी व्यंजनों का भोग लगाया जा रहा है। ठाकुर जी की इत्र सेवा में भी बदलाव किया है पहले तक जहां गुलाब खस और मोगरे का इत्र ठाकुर जी को चढ़ाया जाता था। वहीं, अब केसर, हिना का इत्र काम में लिया जा रहा है। ठाकुर जी को पोशाक भी अब सर्दी के अनुकूल गर्म, ऊनी धराई जा रही है, पहले जहां कॉटन की पोशाक धराई जाती थी उनका स्थान अब मखमल की पोशाक ने ले लिया है। रात्रि सेवा में भी ठाकुर जी के रजाई और कंबल धारण कराई जाती है। सर्दी से बचाने के लिए जितने भी प्रयोग है वो ठाकुर जी की सेवा में इन दोनों किया जा रहे हैं। सर्दी का असर भीलवाड़ा में जरूर तेज हुआ है लेकिन भक्तों का भक्ति भाव ठाकुर जी के प्रति जरा भी काम नहीं हुआ है। अल सुबह होने वाली श्रृंगार आरती में बड़ी संख्या में भक्त मौजूद रहते हैं और ठाकुर जी की सेवा और भजन भाव का आनंद लेते हैं। मंदिर के पुजारी ने बताया कि पौष का महीना चालू हो चुका है ऐसे में ठाकुर जी को पौष बड़े का भोग भी लगाया जाएगा। मंदिर में सभी भक्तजन बड़े उत्साह और श्रद्धा भाव के साथ लगातार जाकर ठाकुर जी के दर्शन और सेवा का लाभ ले रहे हैं।

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