नगर निगम में कामकाज का ट्रेंड:सफाई, टैंकर सप्लाई और सिविल कामों में नेताओं का ही कब्जा कुछ ठेकेदार से नेता बने, कई नेतागिरी से उतर आए ठेकेदारी में

नगर निगम में सफाई ठेके से लेकर पानी टैंकरों की सप्लाई और वार्डों में सिविल के कामों में नेताओं का कब्जा है। टेंडर चाहे मैनुअल हो या ऑनलाइन, ठेका नेताओं को ही मिल रहा है। राजनीतिक संरक्षण से हटकर कोई भी व्यक्ति नगर निगम जैसी एजेंसी में काम हासिल करना चाहे, तो उनके लिए काफी मुश्किल है। सरकार बदलने के साथ सरकारी एजेंसियों में ठेका बदलना शुरू हो जाता है। कांग्रेस शासनकाल में कांग्रेसी नेता या उस माइंडसेट के ठेकेदारों को काम मिला। अब भाजपा शासनकाल में ठेका हासिल करने के लिए भाजपा नेताओं की होड़ शुरू हो गई है। इन दिनों नगर निगम में तेजी से सफाई ठेके बदले जा रहे हैं। नगर निगम में सबसे ज्यादा चर्चा का विषय सफाई ठेका रहता है। वार्डों में सफाई का पूरा काम प्लेसमेंट पर किया जा रहा है। हर साल 2960 सफाई कर्मचारी प्लेसमेंट पर लिए जाते हैं। प्लेसमेंट के कर्मचारियों को सालभर में करीब 39 करोड़ रुपए का भुगतान होता है। पानी टैंकरों की सप्लाई और सिविल काम सीजनल तथा समय-समय पर होते हैं, लेकिन सफाई का काम सालभर बिना रुके चलता है। इसीलिए सफाई ठेका हासिल करने सबसे ज्यादा मारामारी रहती है और सबसे ज्यादा विवाद भी इसी में है। कई बार सफाई सिस्टम में बड़ी खामियां उजागर हुईं। सफाई में प्लेसमेंट सिस्टम को लेकर भी सवाल उठे, लेकिन कांग्रेस और भाजपा किसी शासनकाल में िसस्टम नहीं बदल पाया। दैनिक भास्कर ने निगम के कामों में नेताओं को ठेके को लेकर पड़ताल की। पड़ताल में यह सामने आया कि हर काम में नेताओं का कब्जा है। सफाई में बड़े-बड़े धुरंधर
निगम के सभी 70 वार्ड और निगम मुख्यालय मिलाकर प्लेसमेंट पर 2960 सफाई कर्मचारी लिए जाते हैं। हर वार्ड का अलग-अलग ठेका दिया जाता है। जोन-2 के इंदिरा गांधी वार्ड, जोन-9 के कुशाभाऊ ठाकरे वार्ड, जोन-4 के भगवती चरण शुक्ल वार्ड, जोन-6 के शहीद राजीव पांडे वार्ड और जोन-10 के रानी दुर्गावती वार्ड में भाजपा के नेता संतोष सोनी का सफाई ठेका चल रहा है। सोनी पार्टी के पदाधिकारी भी हैं। जोन-6 में वार्डों का पुराना ठेका बदलकर राज कंस्ट्रक्शन को दिया जा रहा है। बताया जा रहा है, इसे स्थानीय जनप्रतिनिधि ही चलाएंगे। पानी टैंकरों पर भी बड़ा खेल
हर साल गर्मी में पानी सप्लाई के लिए नगर निगम किराए पर टैंकर लेता है। टैंकरों की सप्लाई करने के पूरे सिस्टम पर नेताओं कब्जा है। जोन-2 और तीन में अरविंद ठाकुर पानी टैंकरों की सप्लाई कर रहे हैं। वे भाजपा के निर्वाचित जनप्रतिनिधि हैं। जोन-3 और 5 में पानी टैंकर चला रहे केशव पांडे तेलीबांधा कांग्रेस के पदाधिकारी हैं। परिमल कश्यप, प्रवीण दीक्षित, हेमंत वर्मा भी निगम में सालों से टैंकरों की सप्लाई कर रहे हैं। इन्हें प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से स्थानीय जनप्रतिनिधियों का संरक्षण है। सभी बड़े काम वलेचा को
नगर निगम के पिछले कांग्रेस कार्यकाल में सिविल के ज्यादातर बड़े कामों पर भरत वलेचा का कब्जा रहता था। उन्हें राजनीतिक संरक्षण मिला हुआ था। रावतपुरा कालोनी में ठेकेदार को बड़े काम दिए गए थे। इसे लेकर उस वक्त भाजपा नेताओें ने शिकायत भी की थी। शहर में नाला-नालियां बनाने का काम भी उन्हें ही दिया जाता रहा है। इसके खिलाफ एक कांग्रेस पार्षद ने ही बगावत कर दिया था कि हर काम एक ही ठेकेदार को क्यों दिया जा रहा है। इसके बावजूद भी ठेकेदार वलेचा को लगातार निगम के काम मिले। ऑनलाइन हो रहे सभी टेंडर
^ सभी टेंडर ऑनलाइन हो रहे हैं। समिति के सामने टेंडर खुलता है। कम रेट आने वाले को टेंडर मिलता है। इसमें किसी एक व्यक्ति को समर्थन और दूसरे के साथ पक्षपात नहीं होता। कुछ लोग कई सालों से ठेकेदारी कर रहे हैं। वे पार्टी से जुड़ते हैं तो काम करना बंद नहीं कर सकते।
– रमेश सिंह ठाकुर, अध्यक्ष जिला भाजपा सबको कुछ न कुछ काम करना ही है
^ हर व्यक्ति किसी ना किसी पार्टी या जनप्रतिनिधि से किसी ना किसी रूप में जुड़ा होता है। यह नहीं कहा जा सकता कि प्रभाव के इस्तेमाल से काम दिया गया है। सभी को कोई काम करना ही है। अब टेंडर की प्रक्रिया काफी पारदर्शी हो गई है।
– गिरीश दुबे, अध्यक्ष जिला कांग्रेस सीधी बात – विश्वदीप, कमिश्नर ​ननि टेंडर प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और मजबूत किया जा रहा है सफाई हो, पानी टैंकरों की सप्लाई या फिर सिविल काम, ज्यादातर नेताओं और उनके परिचित-रिश्तेदार ही काम ले रहे हैं?
-ऑनलाइन टेंडर होता है। इसमें सभी पार्टिसिपेट करते हैं। कम रेट वालों को टेंडर दिया जाता है। यह पता नहीं चलता कि कौन किससे परिचित या रिश्तेदार हैं।
टेंडर प्रक्रिया में पता नहीं चलता कि ठेकेदार कौन है, लेकिन वे किसी ना किसी रूप में नेताओं से जुड़े होते हैं? इसका असर काम पर होता है?
-काम की गुणवत्ता में कोई समझौता नहीं होने दिया जाता है। कार्रवाई की जाती है। ना केवल ठेके निरस्त किए जाते हैं, बल्कि जिम्मेदारों पर भी कार्रवाई करते हैं।
व्यवस्था में सुधार के लिए क्या करेंगे, ताकि निगम में हित रखने वाले किसी भी तरह निगम के ठेके हासिल ना करें?
-इस पर काम चल रहा है। जल्द ही हम कुछ एेसी व्यवस्था लागू करेंगे। इसकी जल्द ही सूचना दी जाएगी।

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