देशभर के बुनकरों का दो दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन 24 अगस्त से राजधानी में होगा। इसमें बुनकर आयोग के गठन का प्रस्ताव पास करके केंद्र को भेजा जाएगा। अधिवेशन में बुनकरों के लिए बेहतर अवसर, चुनौतियों और समस्याओं पर बातचीत होगी। साथ ही विशेषज्ञ समस्याओं के समाधान के उपायों और नवाचारों की चर्चा करेंगे। सहकार भारती का बुनकर प्रकोष्ठ इस राष्ट्रीय अधिवेशन का आयोजन कर रहा है। बुनकर प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय प्रमुख अनंत कुमार मिश्र कहते हैं, भारत में लाखों परिवार इस व्यवसाय से जुड़े हैं। बुनकर उद्योग के लिए बाजार का अभाव, आधुनिक तकनीक की जानकारी न होने और पूंजी की कमी जैसी समस्याओं के चलते देश के बुनकर आर्थिक रूप से संघर्ष कर रहे हैं। हस्तकरघा उद्योग की स्थिति में सुधार किए बिना बुनकरों का भला संभव नहीं है। इसलिए राष्ट्रीय स्तर पर बुनकर आयोग का गठन अनिवार्य हो गया है। अधिवेशन में बुनकरों के सामने की चुनौतियों और समस्याओं पर बातचीत होगी। बुनकर प्रकोष्ठ 28 राज्यों के 650 जिलों में कर रहा काम सहकार भारती का बुनकर प्रकोष्ठ अब तक 28 प्रांतों के 650 जिलों में काम कर रहे हैं। भौगोलिक विस्तार के साथ ही कार्य विस्तार किया जा रहा है। प्रकोष्ठों को सक्रिय और मजबूत बनाने के उद्देश्य से सम्मेलन व अधिवेशन किए जा रहे हैं। दो सालों में पुणे में आईटी प्रकोष्ठ अधिवेशन, नवी मुंबई में मत्स्य प्रकोष्ठ अधिवेशन, दिल्ली में क्रेडिट सोसायटी अधिवेशन, हैदराबाद में राष्ट्रीय महिला अधिवेशन, हुबली में पैक्स प्रकोष्ठ अधिवेशन मुंबई में गृह निर्माण संस्था प्रकोष्ठ अधिवेशन, पटना में ईपीओ प्रकोष्ठ और आणंद में डेयरी प्रकोष्ठ में अधिवेशन हो चुका है। छत्तीसगढ़ का बुनकर उद्योग: एक नजर में बुनकरों के सामने चुनौतियां


