45 की उम्र के बाद मीनोपॉज का खतरा ज्यादा:इस वक्त महिलाओं को इमोशनल सपोर्ट की जरूरत; डॉक्टर्स बोले- महिलाएं खुद भी रखें अपना ध्यान

राजधानी रायपुर में मीनोपॉज पर अवेयरनेस और इस डील करने के तरीकों पर चर्चा करने के लिए रायपुर मीनोपॉज सोसाइटी की ओर से दो कॉन्फ्रेंस रखा गया। ये सोसाइटी का छठवां एनुअल कॉन्फ्रेंस था। इस माैके पर महिला के जीवन में मीनोपॉज के इम्पैक्ट, उनकी सेहत इसके प्रभाव पर बात की गई। इस मौके पर इस संस्था की चेयरपर्सन डॉ आशा जैन ने बताया कि एक प्राकृतिक जैविक प्रक्रिया है, जो महिलाओं के जीवन में उस समय को दर्शाता है जब उनकी माहवारी (पीरियड्स) स्थायी रूप से बंद हो जाती है और वे प्रजनन की अवस्था से बाहर आ जाती हैं। 45 से 55 उम्र के बीच मीनोपॉज होता है। इस उम्र में महिलाएं अकेली महसूस करती हैं, क्योंकि पति जॉब या बिजनेस की तनाव में उलझे होते हैं और बच्चों का फोकस करियर बनाने पर होता है। मीनोपॉज से जुड़ी कुछ अहम बातें यहां हम आपके साथ शेयर कर रहें हैं, जिन पर इस कांफ्रेंस में चर्चा हुई मीनोपॉज कब होता है? लक्षण : क्या करें? (उपाय व प्रबंधन): जरूरी फैक्ट: 50+ होने पर रूटीन चेकअप कराते रहें मीनोपॉज के बाद 50 प्लस महिलाएं को कैंसर की आशंका बढ़ जाती है। स्तन में गांठ बनने से पहले ही अगर कैंसर की पहचान हो जाए तो इलाज से महिलाओं को पूरी तरह ठीक किया जा सकता हैं। लेकिन ये तभी मुमकिन है जब 50 साल की उम्र के बाद महिलाएं हर दो साल में एक बार मैमोग्राफी स्क्रीनिंग कराएं। हर दो साल में रेगुलर चेकअप कराने से मीनोपॉज के बाद होने वाले कैंसर का पता समय रहते ही लगाया जा सकता है।

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